राज्य सरकार ने 7 साल में घटाए 73% पद, नौकरी तलाश रहे युवाओं में निराशा
Manish Kumar | Feb 03, 2025, 19:44 IST
सरकारी नौकरियां नहीं निकलने से निराश हैं प्रदेशभर के युवा
राज्य सरकार ने सात वर्षों में प्रशासनिक सेवाओं (Administrative Services) में 73% पद कम कर दिए। भर्ती प्रक्रिया में देरी और पदों की संख्या घटने से युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। आवेदन करने वालों की संख्या भी तेजी से कम हो गई है।
BHOPAL. राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक सेवाओं में पिछले सात वर्षों में भर्तियों में भारी कमी की गई है। यह कदम युवाओं के लिए निराशा का कारण बन रहा है। वर्ष 2019 में जहां 571 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी, वहीं 2025 में केवल 158 पदों के लिए परीक्षा हो रही है। आंकड़ों के अनुसार, पदों में 73% की कमी देखी गई है। इसके साथ ही आवेदकों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है।
वर्ष 2019 में 571 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित हुई थी, जिसमें 3.66 लाख युवाओं ने आवेदन किया था। इसके विपरीत, वर्ष 2025 में मात्र 158 पदों के लिए आवेदन आए हैं और इनकी संख्या घटकर 1.18 लाख रह गई है। यह दर्शाता है कि राज्य सरकार की धीमी भर्ती प्रक्रिया के कारण युवा अब प्रशासनिक सेवाओं में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
यह खबर भी पढ़ें - गणतंत्र दिवस पर CM मोहन यादव के बड़े ऐलान, 2.5 लाख नौकरी, कृषि और महिला सशक्तिकरण पर जोर
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी 15 अगस्त 2022 में एक लाख नौकरियों का वादा किया था, लेकिन प्रदेश के युवा अभी भी उन नौकरियों की बांट जोह रहे हैं। युवा लगातार सरकार से सवाल कर रहे हैं कि आखिर उन नौकरियों का क्या हुआ जिसका वादा सीएम शिवराज चौहान ने किया था।
प्रदेश में विपक्ष भी लगातार सरकार से सवाल कर रहा है कि वह आखिर इन नौकरियों की राह ताक रहे युवाओं को कब तक बरगलाते रहेंगे। विपक्ष ने कई छात्र संगठनों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलनों को भी गाहे-बगाहे समर्थन देता रहता है। विपक्षी नेता सरकार को सड़क और विधानसभा में युवाओं और बेरोजगारी के मुद्दे पर लगातार घेरने की कोशिश में लगे रहते हैं।
यह खबर भी पढ़ें - औद्योगिक नीति 2025 : MP में फैक्ट्री लगाओ, 250 को नौकरी दो, सरकार देगी इंसेंटिव
2019 से लेकर 2025 तक पदों में लगातार कमी के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया में देरी भी एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। 2019 और 2020 की परीक्षाओं के परिणाम आने में कई वर्षों का समय लग गया। 2021 से 2024 तक की परीक्षाओं के परिणाम अभी भी अधर में हैं। इन देरी और अनिश्चितताओं के कारण युवा प्रशासनिक सेवाओं से अपना भरोसा खोते जा रहे हैं।
यह खबर भी पढ़ें - खुला सरकारी नौकरी का पिटारा, 32 से ज्यादा परीक्षाएं लेगा व्यापम
पिछले सात वर्षों में भर्ती प्रक्रिया में लचर रवैया, देरी और पदों में भारी कमी से युवाओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है। रोजगार के अवसर घटने से युवाओं का राज्य सरकार की नीतियों पर विश्वास कमजोर हो रहा है।
भर्ती में 87/13 फॉर्मूले का भी अहम रोल बताया जा रहा है। इस फॉर्मूले के तहत विभागीय अधिकारियों के लिए पद आरक्षित होते हैं, जिसके चलते खुली प्रतियोगिता में उपलब्ध पदों की संख्या और कम हो जाती है। यह भी युवाओं के असंतोष का एक प्रमुख कारण है।
भर्ती प्रक्रिया और आवेदकों की संख्या में कमी
यह खबर भी पढ़ें - गणतंत्र दिवस पर CM मोहन यादव के बड़े ऐलान, 2.5 लाख नौकरी, कृषि और महिला सशक्तिकरण पर जोर
शिवराज ने 2022 में किया था एक लाख नौकरियों का वादा
विपक्ष भी लगातार कर रहा सवाल
यह खबर भी पढ़ें - औद्योगिक नीति 2025 : MP में फैक्ट्री लगाओ, 250 को नौकरी दो, सरकार देगी इंसेंटिव
वर्षवार पदों और आवेदनों के आंकड़े
| वर्ष | पदों की संख्या | आवेदकों की संख्या (लाख में) |
|---|---|---|
| 2019 | 571 | 3.66 |
| 2020 | 260 | 3.44 |
| 2021 | 260 | 3.25 |
| 2022 | 457 | 2.75 |
| 2023 | 220 | 2.13 |
| 2024 | 110 | 2.00 |
| 2025 | 158 | 1.18 |
भर्ती प्रक्रिया में लापरवाही और देरी का असर
यह खबर भी पढ़ें - खुला सरकारी नौकरी का पिटारा, 32 से ज्यादा परीक्षाएं लेगा व्यापम
युवाओं के बढ़ते असंतोष का कारण
87/13 फॉर्मूला का प्रभाव
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
- 2019 में कितने पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी?
2019 में 571 पदों के लिए परीक्षा आयोजित हुई थी, जिसमें 3.66 लाख आवेदन आए थे। - 2025 में कितने पदों के लिए परीक्षा हो रही है?
2025 में केवल 158 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की जा रही है। - 87/13 फॉर्मूला क्या है और इसका क्या असर है?
यह फॉर्मूला विभागीय अधिकारियों के लिए पद आरक्षित करता है, जिससे खुली भर्ती में पदों की संख्या कम हो जाती है।
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj