सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की MP के जज निर्भय सुलिया की बर्खास्तगी
Anjali Dwivedi | Jan 06, 2026, 14:49 IST
supreme court rejects dismissal nirbhay sulya
सुप्रीम कोर्ट ने निर्भय सिंह सुलिया की 2014 में हुई बर्खास्तगी को अवैध ठहराया है। साथ ही यह भी कहा कि केवल गलत फैसले के आधार पर जज पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।
पांच प्वाइंट में समझें पूरा मामला
- SC ने पूर्व जज निर्भय सिंह सुलिया की 2014 में हुई बर्खास्तगी को अवैध ठहराया।
- कोर्ट ने कहा कि केवल गलत फैसले के आधार पर जज पर कार्रवाई नहीं हो सकती।
- प्रशासनिक डर से जजों के विवेक को प्रभावित करना गलत है।
- जजों के खिलाफ फर्जी शिकायत करने वालों और वकीलों पर सख्ती के निर्देश।
- कदाचार साबित होने पर कार्रवाई जरूरी, लेकिन मानवीय चूक और भ्रष्टाचार में अंतर हो।
2014 का फैसला पलटा
क्या कहना है सुप्रीम कोर्ट का-
जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने बताया कि 27 साल तक बेदाग सेवा देने वाले जज को बिना ड्यू प्रोसेस अपनाए हटाया गया, जो न्यायसंगत नहीं। उन्हें सामान्य सेवानिवृत्ति आयु तक सेवा में माना जाए। पूर्ण बकाया वेतन सहित सभी लाभ दिए जाएं। सभी लाभ 8 सप्ताह में 6% ब्याज के साथ जारी हों।
सुप्रीम कोर्ट की सलाह: न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई का डर निचली अदालतों में जमानत देने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। इससे कई सही मामलों में जमानत नहीं मिल पाती है। इसके कारण जमानत याचिकाएं उच्च अदालतों तक पहुंचती हैं। हाई कोर्ट को यह समझना चाहिए कि जिला न्यायाधीशों के सामने कितनी दबावपूर्ण परिस्थितियां होती हैं और बिना ठोस आधार के कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
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झूठी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस फैसले से भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है। अगर किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कदाचार की पहली नजर में पुष्टि होती है, तो तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। क्योंकि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया जा सकता।
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