सिर्फ गाली देने पर नहीं लगेगा SC/ST एक्ट, साबित करना होगा इंटेंशन...Sc का बड़ा फैसला
Sanjay Dhiman | Jan 21, 2026, 17:16 IST
Photograph: (the sootr)
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ गाली देना SC/ST एक्ट नहीं है। जाति के नाम पर अपमान करना और नीचा दिखाना ही अपराध की श्रेणी में आता है।
NEWS IN SHORT
- केवल गाली देना SC/ST एक्ट के तहत कोई जुर्म या अपराध नहीं माना जाएगा।
- अपराध तब बनेगा जब गाली केवल व्यक्ति की जाति के आधार पर दी जाए।
- गाली देने के पीछे पीड़ित को जातिगत रूप से नीचा दिखाने की मंशा जरूरी है।
- बिना जातिगत अपमान के FIR या चार्जशीट कानून की नजर में मान्य नहीं होगी।
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थान पर जानबूझकर अपमान करना अनिवार्य है।
NEWS IN DETAIL
अदालत ने साफ-साफ कहा है कि किसी व्यक्ति को सिर्फ अपशब्द या गाली-गलौज देना अपने आप में SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं है। अब आप सोच रहे होंगे कि फिर कानून कब लागू होता है? कोर्ट के मुताबिक, मामला तब बनता है जब यह साबित हो कि गाली देने वाले की मंशा यानी नीयत सामने वाले को उसकी जाति की वजह से अपमानित करने की थी।
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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
SC/ST एक्ट का मामला कब बनता है?
कानून की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) क्या कहती है?
- धारा 3(1)(r): यह तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी SC/ST सदस्य को सार्वजनिक स्थान पर 'जानबूझकर' अपमानित या डराने की कोशिश करता है। यहां मुख्य शब्द 'जानबूझकर अपमानित करना' है।
- धारा 3(1)(s): यह धारा तब लगती है जब कोई व्यक्ति पीड़ित को उसकी जाति का नाम लेकर गाली देता है, ताकि समाज में उसे नीचा दिखाया जा सके।
कोर्ट ने क्या निर्णय लिया?
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