सिर्फ गाली देने पर नहीं लगेगा SC/ST एक्ट, साबित करना होगा इंटेंशन...Sc का बड़ा फैसला

Sanjay Dhiman | Jan 21, 2026, 17:16 IST
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SC-ST Act will not be imposed just on abusing, intention will have to be proved SCs big decision
Photograph: (the sootr)

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ गाली देना SC/ST एक्ट नहीं है। जाति के नाम पर अपमान करना और नीचा दिखाना ही अपराध की श्रेणी में आता है।

NEWS IN SHORT

  • केवल गाली देना SC/ST एक्ट के तहत कोई जुर्म या अपराध नहीं माना जाएगा।
  • अपराध तब बनेगा जब गाली केवल व्यक्ति की जाति के आधार पर दी जाए।
  • गाली देने के पीछे पीड़ित को जातिगत रूप से नीचा दिखाने की मंशा जरूरी है।
  • बिना जातिगत अपमान के FIR या चार्जशीट कानून की नजर में मान्य नहीं होगी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थान पर जानबूझकर अपमान करना अनिवार्य है।

NEWS IN DETAIL

New Delhi. आज हम एक ऐसे कानूनी विषय पर बात करेंगे जिसे लेकर अक्सर गली-मोहल्लों और कचहरियों में चर्चा गर्म रहती है। मामला है SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का। हम अक्सर सुनते हैं कि किसी ने किसी को कुछ कह दिया और मामला इस कड़े कानून के तहत दर्ज हो गया। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही है, जो हर नागरिक और पुलिस अधिकारी को समझनी चाहिए।

अदालत ने साफ-साफ कहा है कि किसी व्यक्ति को सिर्फ अपशब्द या गाली-गलौज देना अपने आप में SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं है। अब आप सोच रहे होंगे कि फिर कानून कब लागू होता है? कोर्ट के मुताबिक, मामला तब बनता है जब यह साबित हो कि गाली देने वाले की मंशा यानी नीयत सामने वाले को उसकी जाति की वजह से अपमानित करने की थी।

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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

कोर्ट ने कहा कि SC/ST एक्ट की धारा 3(1) के तहत यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति या जनजाति के सदस्य को गाली देता है, तो यह आवश्यक नहीं है कि मामला SC/ST एक्ट के तहत बने। यदि गाली देने का इरादा जातिगत अपमान करने का नहीं है, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने इस बात का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल यह तथ्य कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति या जनजाति से है, पर्याप्त नहीं है।

SC/ST एक्ट का मामला कब बनता है?

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि SC/ST एक्ट के तहत मामला तब बनता है जब गाली देने की मंशा जातिगत अपमान करने की हो और यह सार्वजनिक स्थल पर किया गया हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि गाली देने के दौरान यदि जाति का नाम लिया जाता है और इसका उद्देश्य जातिगत अपमान करना हो, तभी मामला SC/ST एक्ट के तहत आता है।

कानून की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) क्या कहती है?

सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के दो मुख्य हिस्सों को बहुत ही सरल भाषा में समझाया है:

  • धारा 3(1)(r): यह तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी SC/ST सदस्य को सार्वजनिक स्थान पर 'जानबूझकर' अपमानित या डराने की कोशिश करता है। यहां मुख्य शब्द 'जानबूझकर अपमानित करना' है।
  • धारा 3(1)(s): यह धारा तब लगती है जब कोई व्यक्ति पीड़ित को उसकी जाति का नाम लेकर गाली देता है, ताकि समाज में उसे नीचा दिखाया जा सके।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अपराध सिद्ध करने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि गाली केवल इसलिए दी गई क्योंकि वह व्यक्ति दलित या आदिवासी समुदाय से संबंध रखता है। अगर विवाद जमीन का है या कोई आपसी रंजिश है और उसमें सामान्य गाली दी गई है, तो उसे सीधे SC/ST एक्ट में नहीं घसीटा जा सकता।

कोर्ट ने क्या निर्णय लिया?

इस मामले में अपीलकर्ता के खिलाफ आरोप थे कि उसने आंगनवाड़ी केंद्र पर जातिसूचक गालियां दीं और धमकियां दीं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि आरोप अस्पष्ट और सामान्य थे, और इसमें किसी विशेष जाति का उल्लेख नहीं था। कोर्ट ने यह माना कि यदि आरोप सही भी माने जाएं, तो ये SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं बनते।

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और अपीलकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर रिकॉर्ड में यह नहीं दिखता कि गाली देने का उद्देश्य जातिगत अपमान था, तो मामले को SC/ST एक्ट के तहत नहीं लिया जा सकता।

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