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News in Short
- मंदाकिनी दीक्षित पर देवास के ठेकेदार से रिश्वत मांगने का आरोप, हर महीने 7.5 लाख रुपए मांगने का मामला।
- ठेकेदार दिनेश मकवाना ने आत्महत्या से पहले दीक्षित पर रिश्वत के गंभीर आरोप लगाए।
- ठेकेदार की मां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दीक्षित पर FIR की मांग की।
- हाईकोर्ट ने कनाडिया थाना प्रभारी से 28 जनवरी को जवाब देने का आदेश दिया।
- मंदाकिनी दीक्षित ने अपने सस्पेंशन को चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली।
News in Detail
शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना से पांच दुकानों के बदले हर महीने 7.5 लाख रुपए की रिश्वत मांगने की आरोपी देवास की सहायक आयुक्त आबकारी मंदाकिनी दीक्षित सस्पेंड हो चुकी है। इस सस्पेंशन को दीक्षित ने चुनौती दी है जिसमें हाईकोर्ट ने राहत नहीं दी। उधर इसी मामले में ठेकेदार की मां हाईकोर्ट पहुंच गई है। इसमें दीक्षित पर FIR की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने अब कनाडिया थाना प्रभारी टीआई को 28 जनवरी को पेश होकर जवाब देने के आदेश दिए हैं।
क्या है मकवाना का केस
दिनेश मकवाना इंदौर कनाडिया के रहने वाले थे। उनके देवास में शराब के ठेके थे। मकवाना ने 8 नवंबर को सुसाइड कर लिया। मौत के कुछ दिन बाद उनका वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने सुसाइड के पहले मंदाकिनी दीक्षित पर रिश्वत के गंभीर आरोप लगाए। उन्हीं से प्रताड़ित होकर जान देने की बात कही।
इस वीडियो के सामने आने पर 24 नवंबर को दीक्षित ने देवास एसपी को पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था कि ठेकेदार की मां और परिजनों द्वारा उनसे दो करोड़ की मांग की जा रही है। उधर वीडियो आने के बाद मप्र शासन ने दीक्षित को सस्पेंड कर दिया। दीक्षित ने इस सस्पेंशन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एक-दो नहीं पूरे नौ वकील बचाव में उतार दिए, लेकिन राहत नहीं मिली। उधर ठेकेदार की मां संतोष बाई ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
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दीक्षित पर कमीशन के भी लगाए आरोप
ठेकेदार की मां संतोष बाई ने अपनी याचिका में खुलकर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि दीक्षित द्वारा हर माह उनके बेटे से प्रति दुकान से 1.50 लाख की रिश्वत मांगी जा रही थी। बेटे के पास वहां 5 दुकान ठेके पर हैं। वह अभी तक मेरे बेटे से 22 लाख रुपए ले चुकी थी।
उनके द्वारा कहा गया था कि शराब का क्वार्टर 80 रुपए की जगह 90 रुपए में बेचो और ऊपर के 10 रुपए उन्हें कमीशन के तौर पर दो। ऐसा नहीं कर पर उनके द्वारा कठोर कदम उठाए जाएंगे और शराब कारोबार मुश्किल कर देगी। याचिकाकर्ता ने कहा कि उनके इसी तरह के दबाव और शोषण के कारण बेटे ने सुसाइड किया है। लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने दीक्षित पर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं की। जांच के नाम पर मामले को लटका कर रखा हुआ है।
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याचिका में इन सभी को बनाया पक्षकार
ठेकेदार की मां ने याचिका में प्रमुख सचिव गृह विभाग मप्र शासन के साथ ही पुलिस कमिशनर संतोष सिंह, एरिया असिस्टेंट कमिशनर ऑफ पुलिस, टीआई कनाडिया और मंदाकिनी दीक्षित को पक्षकार बनाया है। याचिका के पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने टीआई कनाडिया को 28 जनवरी को पेश होकर जवाब देने के आदेश दिए हैं।
इधर मंदाकिनी को राहत नहीं, चार्जशीट सौंपी
उधर मंदाकिनी द्वारा अपने सस्पेंशन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था। इस पर भी सुनवाई हुई। इसमें सरकार ने बताया कि दीक्षित को आरोपों की चार्जशीट दे दी गई है। उनके पास इसमें जवाब देने का अवसर मौजूद है।
वहीं शासन ने एक इंटरविनयर याचिका भी लगाई है कि यह याचिका मेंटेनेबल नहीं है। क्योकि शासकीय प्रक्रिया की जा रही है और इसमें संबंधित अधिकारी को इसमें नोटिस का जवाब देने का पूरा अवसर मौजूद है। इस पर अब दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।
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मंदाकिनी दीक्षित ने बचाव में यह तर्क रखे हुए हैं
दीक्षित की ओर से बताया गया कि इंदौर के दिनेश मकवाना ने देवास में शराब ठेके लिए हैं। इनके द्वारा सितंबर माह में एक वीडियो बनाया गया जिसमें दीक्षित पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए, लेकिन सुसाइड मकवाना द्वारा 8 नवंबर को किया गया।
इसके बाद 9 नवंबर, 11 नवंबर और 16 नवंबर को मकवाना के रिश्तेदार बृजेश मकवाना, उनकी मां संतोष बाई ने उनके अधीनस्थ को प्रेम यादव को यह वीडियो भेजा। दो करोड़ राशि मांगने के लिए ब्लैकमेल किया। इस बारे में 24 नवंबर को हमने एसपी को सूचित कर दिया और विभागीय अधिकारियों को बता दिया था, लेकिन जब 5 दिसंबर को वीडियो वायरल हुआ तो 6 दिसंबर को सरकार ने केवल वाट्सअप मैसेज के आधार पर सस्पेंड कर दिया। न कोई नोटिस दिया और न ही किसी तरह की जांच कराई गई।
इस पर सरकार यह दे चुकी जवाब
इस पर हाईकोर्ट जस्टिस ने पूछा था कि जब आपके अधनीस्थ अधिकारी को ठेकेदार के सुसाइड के बाद 9 नवंबर को ही वीडियो की जानकारी मिल गई थी। फिर आपके द्वारा विभाग को सूचना क्यों नहीं दी गई।
दीक्षित के अधिवक्ता ने कहा कि हमने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और आबकारी आयुक्त को बताया था। 24 नवंबर को ही एसपी को बताया था। इस पर सरकारी अधिवक्ता बताया था कि इन्होंने भले ही एसपी को 24 नवंबर को बताया हो, लेकिन शासन स्तर पर उच्च अधिकारियों को 6 दिसंबर को ही बताया जब इन्हें सस्पेंड किया गया। इन्हें वीडियो की जानकारी 9 नवंबर को ही आ गई थी।
सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित सस्पेंड , शराब ठेकेदार सुसाइड केस में रिश्वत के आरोप
हाईकोर्ट ने कहा था इसमें कुछ फिशी है
इन तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें कुछ फिशी यानी संदिग्ध है। यदि जानकारी 9 नवंबर को मिली थी, तो शासन को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। यह सामान्य मामला नहीं है, एक ठेकेदार ने आत्महत्या की है। भले ही वीडियो पहले बना था और 5 दिसंबर को व्हाट्सएप पर आया, यह गंभीर मामला है। इसमें रिश्वत के गंभीर आरोप लगे हैं।
यह था ठेकेदार के सुसाइड वीडियो में
इंदौर निवासी मकवाना पहले शराब दुकान में मैनेजर था। बाद में उसने देवास में करणावद, चापड़ा और डबलचौकी में शराब दुकान के ठेके लिए थे। वीडियो में मकवाना का आरोप है कि सहायक आयुक्त आबकारी मंदाकिनी दीक्षित एक दुकान से 1.5 से दो लाख मांग रही थी। मेरे पास पांच दुकान है, हर माह वह साढ़े सात लाख रुपए मांग रही थी। अभी तक 20-22 लाख रुपए उन्हें दे चुका हूं। रुपए नहीं देने पर वेयरहाउस से माल नहीं उठाने देती थी। उनसे त्रस्त होकर मैं आत्महत्या कर रहा हूं।
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