द सूत्र पड़ताल : E-Attendance पर शिक्षकों का बहाना या कोई और बना रहा निशाना

मध्य प्रदेश में शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी (E-Attendance) पर बवाल मचा है। शिक्षक इसे साइबर ठगी का कारण बता रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स ने दावों की पोल खोल दी है।

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Sanjay Sharma
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Teachers are making excuses or someone else is targeting e-Attendance

Photograph: (the sootr)

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News in Short

  • मध्य प्रदेश के शिक्षक ई-अटेंडेंस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे हैं।
  • साइबर ठगी, सर्वर और नेटवर्क की समस्या के आधार पर लगाई है याचिका।
  • स्कूल पहुंचकर मोबाइल एप्लीकेशन पर दर्ज करनी होती है शिक्षकों को हाजिरी।
  • शिक्षकों के विरोध को स्कूल शिक्षा विभाग बहाना बताकर टालती रही है आरोप।
  • साइबर ठगी की असल वजह को लेकर `द सूत्र` ने साइबर एक्सपर्ट जानी हकीकत।

News in DETAIL

BHOPAL. ई-अटेंडेंस का विवाद बीते शैक्षणिक सत्र से गरमाया हुआ है और अब यह मामला हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। अब तक नेटवर्क और सर्वर की समस्याएं गिना रहे शिक्षक बीते महीनों में हुई साइबर ठगी की वारदातों के लिए भी ई-अटेंडेंस एप्लीकेशन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वहीं सरकार शिक्षकों के आरोपों को सिरे से खारिज कर चुकी है।

ई-अटेंडेंस अब दूसरे विभागों सहित पूरे सरकारी सिस्टम के लिए अहम होने जा रही है। ऐसे में शिक्षकों के आरोपों को लेकर `द सूत्र` ने पड़ताल की है। इसमें शिक्षकों से उनकी समस्याओं के साथ ही  द सूत्र ने इस गंभीर मामले को लेकर साइबर एक्सपर्ट से तकनीकी जानकारी जुटाई तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 

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हाईकोर्ट में ई-अटेंडेंस को चुनौती

जबलपुर हाईकोर्ट में शिक्षक मुकेश सिंह वरकडे जबलपुर, सत्येंद्र तिवारी सतना सहित 27 शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस को चुनौती दी है। इस याचिका में नेटवर्क और सर्वर की समस्याओं के साथ ही डेटा लीक होने और साइबर ठगी का अंदेशा भी जताया गया है। शिक्षक ऑनलाइन ठगी को आधार बनाकर दावों को मजबूत बता रहे हैं।

हाईकोर्ट में पेश की गई याचिका में शिक्षकों के आरोप कितने मजबूत हैं और सरकारी की दलीलें कितनी असरदार हैं यह जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह ई-अटेंडेंस की व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। बीते पांच सालों में साइबर ठगी की वारदातें तेजी से बढ़ी हैं। लिंक, ओटीपी, क्यूआर कोड के जरिए बदमाश लोगों को शिकार बना रहे हैं। इसके अलावा साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट को भी बड़ा हथियार बना लिया है। 

शिक्षकों के दावों में कितनी सच्चाई

साइबर एक्सपर्ट अखिलेश जाटव का कहना है आज के दौर में हर कोई इंटरनेट का उपयोग कर रहा है। लोग मोबाइल फोन का उपयोग जरूरी काम से ज्यादा सोशल साइट्स, ब्राउजिंग और सर्फिंग में करता है। इंटरनेट पर उनकी यही उपस्थिति X-अटेंडेंस है। ई- अटेंडेंस केवल कंपनी या सरकारी विभाग के एप के जरिए हो सकती है।

इंटरनेट के जरिए ठगी की ऐसी वारदातों का हवाला देकर शिक्षक ई-अटेंडेंस से बचने की कोशिश कर रहे हैं। द सूत्र की पड़ताल में सामने आया है कि साइबर ठगी ई- अटेंडेंस के कारण नहीं X-अटेंडेंस के चक्कर में हो रही है। 

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सरकार का दावा एप सुरक्षित

ई-अटेंडेंस संबंधित ज्यादातर एप्लीकेशन सुरक्षित होते हैं और उनसे डेटा चोरी या लीक होने का खतरा न के बराबर होता है। इन एप्लीकेशन का उपयोग कुछ सेंकेंड या मिनट ही रहती है, जबकि सोशल साइट्स पर लोग घंटों समय बिताते हैं। यहां से डेटा चोरी होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है, ऐसी साइट्स पर साइबर ठगों की भी नजर होती है, जहां जिज्ञासा में फंसकर लोग साइबर ठगों का काम आसान कर देते हैं। यही से डेटा साइबर बदमाशों तक यूजर की रुचि, सोशल साइट्स पर सक्रियता, बैंक अकाउंट डिटेल पहुंच जाती है। 

मनोरंजन के चक्कर में फंस रहे शिक्षक 

साइबर एक्सपर्ट प्रदीप श्रीवास्तव का कहना है ई- अटेंडेंस की वजह से शिक्षकों का डेटा लीक हो रहा है या साइबर ठगी हो रही है, ये आरोप तर्क संगत नहीं हैं। आमतौर पर देखें तो लोगों के मोबाइल फोन में एप्लीकेशन भरे पड़े हैं। पेमेंट एप्लीकेशन, फोटो- वीडियो एडिटिंग एप, चैटिंग एप्लीकेशन और सोशल मीडिया से जुड़े एप्लीकेशन की मोबाइल में भरमार होती है। ऐसे में केवल ई- अटेंडेंस को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

ऐसे एप्लीकेशन निजी उपयोग के लिए होते हैं। उनसे डेटा चोरी आसान नहीं है। ज्यादातर लोग सोशल साइट्स पर मनोरंजन के चक्कर में साइबर बदमाशों के जाल में फंसते हैं, क्योंकि ये साइट्स और एप्लीकेशन उतनी सुरक्षित नहीं होती। इन साइट्स पर सक्रियता उनकी X-अटेंडेंस होती है। 

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जिज्ञासा, मनोरंजन के जाल में फंसते हैं यूजर

साइबर ठगी के मामलों में ज्यादातर लोग अपनी जिज्ञासा और मनोरंजन के आनंद में डूबने की वजह से फंसते हैं। साइबर बदमाश इसका फायदा उठाकर लिंक भेजते हैं और लोग क्लिक कर उसे इंटरनेट के जरिए अपने मोबाइल फोन पर कब्जा करने का रास्ता खोल देते हैं। एनीडेस्क जैसे एप्लीकेशन वे ऐसी ही लिंक के जरिए  मोबाइल में इंस्टॉल कर उसे अपने काबू में कर लेते हैं। बस यही से मोबाइल का सारा डेटा और निजी जानकारी उनके हाथ लग जाती हैं।

इसका उपयोग वे बैंक अकाउंट से रुपए उड़ाने या डिजिटल अरेस्ट के जरिए ब्लैकमेल या धमकाते हुए वसूली करने में करते हैं। शिक्षक ई- अटेंडेंस के कारण ठगी के आरोप लगा रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश में साइबर ठगी की वारदातों में शिक्षकों के साथ हुई वारदातों का आंकड़ा बहुत छोटा है। 

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शिक्षकों से ठगी के ये हैं मामले 

1. इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में रहने वाली शिक्षिका से बदमाशों ने भाई की आवाज में कॉल कर दोस्त को हार्ट अटैक का बहाना बनाकर रुपए मांगे। शिक्षिका ने उसके भेजे क्यूआर कोड पर 97 हजार रुपए भेज दिए। साइबर बदमाशों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए भाई की आवाज में उससे बात की थी इसलिए वह झांसे में आ गई। 

2. रतलाम के शिक्षक से साइबर बदमाशों ने 1.35 करोड़ रुपए की ठगी की है। बदमाशों ने शिक्षक की इंटरनेट पर सक्रियता का फायदा उठाकर उसे डिजिटल अरेस्ट कर पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का भय दिखाया। भयभीत शिक्षक ने मकान बेंचकर रुपए ट्रांसफर करने मजबूर हो गया। 

3. मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में महिला शिक्षक डिजिटल अरेस्ट से घबराकर आत्महत्या तक कर चुकी है। महिला शिक्षक रेशमा पांडे को पुलिस की वर्दी में वीडियो भेजकर गिरफ्तारी का भय दिखाकर बदमाशों ने 50 हजार रुपए मांगे थे। महिला केवल 22 हजार रुपए का इंतजाम कर पाई और घबराकर जान दे दी।

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