ट्विशा शर्मा मौत मामला: 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में ट्रायल ट्रांसफर पर सुनवाई, पिता नवनिधि शर्मा ने लगाई याचिका
Neel Tiwari | Oct 09, 2026, 18:51 IST
ट्विशा शर्मा मौत मामले में पिता नवनिधि शर्मा ने मुकदमा भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है।
ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में उनके पिता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने मुकदमा भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है। इस याचिका पर 16 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इसी दिन हाई कोर्ट में आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर दोपहर 2:30 बजे सुनवाई होनी है।
16 अक्टूबर को दो अदालतों में अहम सुनवाई
दूसरी तरफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में आरोपी गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर दोपहर 2:30 बजे सुनवाई होनी है। हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत आवेदन में संशोधन करने के लिए समय दिया था। अब संशोधित आवेदन पर होने वाली सुनवाई पर भी नजरें रहेंगी।
पिता ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों लगाई याचिका?
उन्होंने एक अलग आवेदन भी दिया है। इसमें याचिका पर फैसला आने तक भोपाल में मुकदमे की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। फिलहाल भोपाल की अदालत में आरोप तय करने के मुद्दे पर बहस चल रही है।
पूर्व जज सास और पति हैं आरोपी
गिरिबाला सिंह भोपाल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं। घटना के समय वह भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष थीं। वहीं, समर्थ सिंह भोपाल में अधिवक्ता हैं।
जमानत याचिका में संशोधन के बाद हाई कोर्ट में सुनवाई
ऐसे में संशोधित आवेदन पर होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट में ट्रायल ट्रांसफर याचिका पर भी सुनवाई होनी है। दोनों मामले अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं। दोनों में कानूनी मुद्दे भी अलग हैं।
सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद CBI ने संभाली जांच
सीबीआई ने 14 अगस्त को गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 के तहत क्रूरता का आरोप लगाया गया है। धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। वहीं, धारा 3(5) समान मंशा से संबंधित है।
दहेज से जुड़े पहलुओं की आगे की जांच अभी जारी है।
भोपाल में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर पिता ने जताई आशंका
याचिका में 25 जुलाई को उनकी नियमित जमानत खारिज होने का भी उल्लेख है। उस समय भोपाल के एक सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका को निराधार नहीं माना था।
पांच दिन में पांच अदालतों तक पहुंचा जमानत मामला
इनमें तीन न्यायाधीशों ने फाइल वापस कर दी थी या खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था। एक न्यायाधीश ने व्यक्तिगत कारणों से अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी।
एक अन्य न्यायाधीश ने बताया था कि समर्थ सिंह उनके वकील रह चुके हैं। तीसरे न्यायाधीश ने कहा था कि गिरिबाला सिंह ने उन्हें प्रोबेशनर के रूप में प्रशिक्षित किया था।
अग्रिम जमानत का आदेश हाई कोर्ट ने किया था रद्द
राज्य सरकार ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 27 मई को अग्रिम जमानत का आदेश रद्द कर दिया था।
नवनिधि शर्मा ने इस घटनाक्रम का भी अपनी याचिका में उल्लेख किया है। उन्होंने इसे मुकदमा दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग के समर्थन में पेश किया है।
शुरुआती जांच और साक्ष्यों को लेकर भी सवाल
याचिकाकर्ता के मुताबिक, जिस छत पर घटना हुई थी, उसे ठीक से सील नहीं किया गया। पहले पोस्टमार्टम के समय फांसी में इस्तेमाल सामग्री को जांच के लिए नहीं भेजा गया था।
याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि घटना के अगले दिन गिरिबाला सिंह ने घर और एक ब्यूटी पार्लर के सीसीटीवी फुटेज की प्रतियां प्राप्त कर ली थीं।
अदालत परिसरों की घटनाओं का भी उल्लेख
इसके अलावा 22 मई को जबलपुर जिला अदालत भवन में हुई एक अन्य कथित घटना का भी उल्लेख है। आरोप है कि वहां पीड़ित परिवार के वकील के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। उन्हें अदालत भवन से बाहर धकेले जाने की बात भी कही गई है।
याचिकाकर्ता ने इन घटनाओं को निष्पक्ष सुनवाई को लेकर अपनी आशंका का आधार बताया है।
दिल्ली में जांच और गवाहों की मौजूदगी का तर्क
इसके अलावा सीएफएसएल, नई दिल्ली ने फॉरेंसिक रिपोर्ट जारी की है। याचिका में कहा गया है कि जांच अधिकारी, पीड़ित परिवार और कई प्रमुख गवाह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहते हैं।
इन्हीं आधारों पर मुकदमे को भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की गई है।
अब 16 अक्टूबर की दोनों सुनवाइयों पर नजर
सुप्रीम कोर्ट में ट्रायल ट्रांसफर की मांग पर विचार किया जाएगा। दूसरी ओर, हाई कोर्ट में जमानत आवेदन पर आगे की कार्यवाही होगी।
दोनों अदालतों की सुनवाई इस मामले की आगे की कानूनी दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, अदालतें क्या आदेश देंगी, यह सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
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