एमपी में यूसीसी कानून पर लगा ब्रेक! मानसून सत्र में विधेयक आना मुश्किल, जानें क्यों
Sourabh Bhatnagar | Jul 04, 2026, 15:17 IST
एमपी में यूसीसी कानून पर लगा ब्रेक
मध्य प्रदेश में यूसीसी (Uniform Civil Code) विधेयक मानसून सत्र में पेश होना मुश्किल है। सरकार ने कमेटी का कार्यकाल 26 जुलाई तक बढ़ाया, जबकि सत्र 24 जुलाई को खत्म होगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में यूसीसी (Uniform Civil Code) कानून मानसून सत्र में आना मुश्किल हो गया है।
- सरकार ने यूसीसी कमेटी का कार्यकाल 26 जुलाई तक बढ़ा दिया है।
- विधानसभा का मानसून सत्र 24 जुलाई को खत्म हो जाएगा।
- यानी सत्र खत्म होने के दो दिन बाद कमेटी का काम पूरा होगा।
- ऐसे में इसी सत्र में विधेयक पेश होने की संभावना कम मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार कर रही उच्च स्तरीय समिति का कार्यकाल बढ़ा दिया है। यह कार्यकाल अब 26 जुलाई 2026 तक रहेगा। दूसरी तरफ विधानसभा का मानसून सत्र 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा। इस वजह से इसी सत्र में विधेयक पेश होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई है।
कार्यकाल बढ़ाने की वजह
गुजरात मॉडल पर आधारित ड्राफ्ट
सीएम के बयान से बने कयास
सरकार अब भी कोशिश में हो सकती है
कितने दिन चलेगी विधानसभा
- मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई तक चलेगा।
- सरकार पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी।
- स्वामित्व योजना से जुड़े संशोधन विधेयक लाए जा सकते हैं।
- सिंहस्थ 2028 को लेकर मेला अधिनियम में बदलाव संभव।
- एकीकृत श्रम कानून और कोचिंग रेग्यूलेशन बिल पेश हो सकते हैं।
- विपक्ष और सरकार के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस के आसार हैं।
यूसीसी का मकसद क्या है
प्रस्तावित ड्राफ्ट की मुख्य बातें
- धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासी UCC में शामिल होंगे।
पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाज मानने वाले आदिवासियों को इससे बाहर रखा जाएगा। - विवाह धार्मिक परंपराओं के अनुसार हो सकेंगे।
लेकिन शादी से जुड़े कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियां सभी के लिए समान रहेंगी। - हर शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा।
विवाह के 60 दिन के भीतर पंजीयन कराना अनिवार्य रहेगा। - पुरानी शादियों और तलाक का भी रिकॉर्ड बनेगा।
पहले हो चुके विवाह और तलाक को भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जा सकेगा। - भरण-पोषण और गुजारा भत्ता पर समान नियम होंगे।
बच्चों की अभिरक्षा, भरण-पोषण और गुजारा भत्ता के मामले में सभी समुदायों पर एक जैसे नियम लागू होंगे। - संपत्ति बंटवारे के लिए समान उत्तराधिकार नियम लागू होंगे।
बिना वसीयत मृत्यु होने पर संपत्ति का बंटवारा एक समान कानून के तहत होगा। - वसीयत को लेकर साफ कानूनी प्रक्रिया बनेगी।
वसीयत बनाने, बदलने और रद्द करने की प्रक्रिया तय की जाएगी। - विवाद होने पर अदालत संपत्ति की सुरक्षा कर सकेगी।
कोर्ट जरूरत पड़ने पर संपत्ति की देखरेख के लिए कस्टोडियन नियुक्त कर सकेगी। - विवाह और तलाक का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा।
शादी, तलाक और अन्य पारिवारिक रिकॉर्ड का डिजिटल पंजीयन होगा। - गलत जानकारी देने पर कार्रवाई होगी।
झूठी जानकारी देने या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने पर दंड का प्रावधान रहेगा। - UCC का मकसद समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
इसका उद्देश्य पारिवारिक मामलों में एक जैसे नियम, पारदर्शिता और व्यवस्थित प्रक्रिया लागू करना है।
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