उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के गठन पर कानूनी पेंच: HC ने सरकार से मांगा जवाब
Amresh Kushwaha | Jul 18, 2026, 10:27 IST
इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन
उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि गठन की प्रक्रिया संविधान और कानून के विपरीत है। कोर्ट ने चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- उज्जैन और इंदौर को मिलाकर मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाया गया है।
- इस गठन के खिलाफ हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई।
- हाई कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
- सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
- याचिकाकर्ता का कहना है कि निकायों का अधिकार सीमित हो जाएगा।
हाई कोर्ट में क्या हुआ
सुनवाई जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच के सामने हुई। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अखत पहाड़िया ने पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अथॉरिटी का गठन तय नियमों के विपरीत हुआ है। उनकी दलील को कोर्ट ने गंभीरता से सुना।
मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी क्यों बनती है
याचिका में क्या दावा
याचिका में यह भी लिखा है कि इंदौर, उज्जैन, धार और देवास के स्थानीय निकायों से कोई सलाह नहीं ली गई। इन शहरों की राय के बिना ही पूरा फैसला ले लिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह तरीका संविधान के 74वें संशोधन के खिलाफ है। साथ ही यह अनुच्छेद-14 का भी उल्लंघन करता है। अनुच्छेद-14 समानता का अधिकार देता है।
कोर्ट ने क्या पूछा
अधिवक्ता ने कोर्ट में यह भी कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की अहमियत कम हो जाएगी। इसकी जगह अफसरों का दबदबा बढ़ेगा। उनका कहना है कि यह लोकतांत्रिक ढांचे के लिए ठीक नहीं है।
इंदौर-उज्जैन का फर्क
याचिका में यह बात भी उठाई गई कि प्रस्तावित अथॉरिटी की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे। इसमें ज्यादातर अफसर ही शामिल रहेंगे। जनता द्वारा चुने गए नेताओं की भूमिका बहुत कम रह जाएगी। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह व्यवस्था आम लोगों की आवाज को कमजोर करेगी।
स्थानीय निकायों पर असर
आगे क्या होगा
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