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News In Short
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने वेदों और यज्ञ की महत्ता पर जोर दिया।
शास्त्री ने बागेश्वर धाम में गुरुकुल बनाने की घोषणा की।
उनका कहना था कि वेदों से दूर बच्चे भविष्य में असुरक्षित हो सकते हैं।
शास्त्री ने जावेद और नावेद को लेकर विवादित बयान दिया।
शास्त्री ने आरएसएस के योगदान की सराहना करते हुए समाज में एकता की बात की।
News In Detail
बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री अपने बयान से एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। इस बार उन्होंने वेदों और यज्ञ की महत्ता पर जोर दिया है। उनका कहना था कि यदि हम वेदों से दूर रहते हैं, तो हमारे बच्चे भविष्य में जावेद और नावेद बन जाएंगे। यह बयान शास्त्री ने जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया है। यहां वे रामभद्राचार्य की कथा में शामिल होने पहुंचे थे।
शास्त्री ने किया गुरुकुल बनाने का ऐलान
धीरेंद्र शास्त्री ने बागेश्वर धाम में वेदों की शिक्षा के लिए गुरुकुल बनाने का ऐलान किया है। उनका मानना है कि वेदों से युवा पीढ़ी जुड़ सकेगी। वे कहते हैं कि खाना एक दिन, पानी एक घंटा टिकता है, लेकिन विद्या जीवनभर रहती है।
शास्त्री का कहना है कि वेदों को जीवन में महत्व देना चाहिए। वे मानते हैं कि जो बच्चे वेदों से दूर रहते हैं, उनका भविष्य असुरक्षित हो सकता है। वे बिना संस्कृति के दिशा नहीं पा सकते।
इसी वजह से शास्त्री ने बागेश्वर धाम पर गुरुकुल बनाने का फैसला लिया है। इसका उद्देश्य वेदों का प्रसार करना है।
धीरेंद्र शास्त्री ने जावेद-नावेद को लेकर क्या कहा?
धीरेंद्र शास्त्री का बयान विवादों में आ गया है। उन्होंने कहा कि वेदों को न मानने वालों के बच्चों के नाम जावेद और नावेद हो सकते हैं। इसका इशारा उन्होंने इस्लाम धर्म की ओर किया। हालांकि, शास्त्री ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल समाज को वेदों और यज्ञ की दिशा में जागरूक करना है।
आरएसएस पर शास्त्री का बयान
धीरेंद्र शास्त्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, यदि RSS न होता, तो भारत में इतने हिंदू नहीं होते। शास्त्री का मानना है कि RSS ने समाज में एकता बनाए रखने के लिए बहुत अच्छा काम किया है।
घर-घर ऑनलाइन हवन अभियान
धीरेंद्र शास्त्री ने वैदिक परंपाओं को जीवित रखने के लिए एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत 4 जनवरी को करीब 3 लाख लोगों ने ऑनलाइन हवन किया गया था। वहीं, अब 12 फरवरी को रात 9 बजे एक और सामूहिक ऑनलाइन हवन होगा। शास्त्री का कहना है कि जिन घरों में ब्राह्मण नहीं पहुंच पाते, वहां ऑनलाइन हवन से वैदिक परंपरा फैलाना जरूरी है।
वेद और यज्ञ की ओर करें वापसी- शास्त्री
शास्त्री ने अपने उद्देश्य के बारे में बताया कि उनका लक्ष्य भारत को वेदों और यज्ञों के गौरवमयी युग में वापस ले जाना है। उनका कहना है कि समाज को जागरूक करने के लिए वेदों की परंपरा को हर घर तक पहुंचाना होगा। इससे युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति पर गर्व महसूस कर सकेगी।
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पंडित धीरेंद्र शास्त्री की जीवन यात्रा
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने सत्यनारायण की कथा से अपने धार्मिक कार्य की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने प्रवचन देना शुरू किया और राम कथाओं का आयोजन किया।
शास्त्री ने अपने दादाजी की तरह मंगलवार और शनिवार को दिव्य दरबार लगाने शुरू किए। यहां लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाते थे।
उनके दरबार का प्रसारण सोशल मीडिया पर होने लगा, जिससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ी।
शास्त्री ने कन्या विवाह आयोजन की शुरुआत की, जो अब कई जोड़ों के विवाह में बदल चुका है।
शास्त्री की बढ़ती लोकप्रियता के कारण कई राजनीतिक दलों ने उनके प्रवचनों का आयोजन कराया।
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