विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त, ग्वालियर हाईकोर्ट ने रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया

Sanjay Dhiman | Mar 09, 2026, 15:10 IST
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ramniwas rawat
Photograph: (thesootr)

ग्वालियर हाईकोर्ट ने क्रिमिनल रिकॉर्ड छिपाने के आरोप में विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य कर दिया। कोर्ट ने रनरअप रहे रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया है।

News in Short

  • ग्वालियर हाईकोर्ट ने विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य किया।
  • रामनिवास रावत ने याचिका में मल्होत्रा के खिलाफ 6 आपराधिक मामलों को छिपाने का आरोप लगाया।
  • कोर्ट ने कहा कि मल्होत्रा ने नामांकन में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी।
  • कोर्ट ने रामनिवास रावत को विजयपुर का विधायक घोषित किया।
  • यह फैसला राजनीति में पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की महत्ता को दिखाता है।

News in Detail

Gwalior.ग्वालियर हाईकोर्ट ने विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित कर दिया है। यह निर्णय बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत की याचिका पर आया है। कोर्ट ने कहा कि मुकेश मल्होत्रा ने उपचुनाव के दौरान अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी सही तरीके से नहीं दी थी।

रामनिवास रावत ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मुकेश मल्होत्रा ने अपनी नामांकन पत्र में 6 आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। कोर्ट ने इस पर गंभीरता से विचार करते हुए फैसला सुनाया कि मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त कर दिया जाए और रामनिवास रावत को विजयपुर सीट का विधायक घोषित किया जाए।

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब रावत ने 2023 के उपचुनाव में मल्होत्रा की जीत पर सवाल उठाए। रावत ने यह आरोप लगाया कि मल्होत्रा ने अपने नामांकन में चुनाव आयोग को जानकारी देने में जानबूझकर चूक की। जब अदालत ने मामले की गहराई से जांच की, तो मल्होत्रा के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी पाई गई, जो उन्होंने पहले छिपाई थी।

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अदालत का फैसला

ग्वालियर हाईकोर्ट के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाई है। कोर्ट ने कहा कि मल्होत्रा ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की है और उनका चुनाव शून्य घोषित किया जाता है। इसके साथ ही रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा का विधायक घोषित किया गया है।

रावत का पक्ष

रामनिवास रावत ने इस फैसले के बाद खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह न्याय की जीत है। उन्होंने कहा कि राजनीति में नैतिकता और पारदर्शिता बेहद अहम हैं, और इस मामले ने यह सिद्ध कर दिया कि जनता के बीच सच्चाई सामने आनी चाहिए। रावत ने यह भी कहा कि इस फैसले से यह संदेश जाएगा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

क्यों रद्द हुआ मुकेश मल्होत्रा का चुनाव?

राजनीति में पारदर्शिता बहुत जरूरी है, लेकिन यहां चूक हो गई। मुकेश मल्होत्रा ने अपने नामांकन फॉर्म में बड़ी गलती कर दी थी। उन्होंने अपने ऊपर दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी पूरी नहीं दी थी। भारतीय कानून के अनुसार, उम्मीदवार को अपने सारे केस बताने पड़ते हैं। मल्होत्रा ने शपथ पत्र में कुछ गंभीर केसों को छिपा लिया था। इसी कानूनी दांवपेच ने उनकी विधायकी को पूरी तरह खत्म कर दिया।



रामनिवास रावत की कानूनी लड़ाई और बड़ी जीत

पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने इसके खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने ग्वालियर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। रावत ने मल्होत्रा के खिलाफ दर्ज सभी 6 मामलों का सबूत दिया। उन्होंने साबित किया कि मल्होत्रा ने जनता और चुनाव आयोग से सच छिपाया। कोर्ट ने पाया कि मल्होत्रा का नामांकन पत्र कानूनी रूप से गलत था। चूंकि रावत चुनाव में दूसरे नंबर पर थे, इसलिए उन्हें विजेता माना गया।

उपचुनाव में 7,364 वोट से जीते थे मुकेश मल्होत्रा

विजयपुर विधानसभा उपचुनाव 2024 में मुकाबला बहुत ही कांटे का और दिलचस्प रहा था। सरकारी आंकड़ों और खबरों के मुताबिक, कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने बीजेपी के दिग्गज नेता और तत्कालीन वन मंत्री रामनिवास रावत को 7,364 वोटों के अंतर से हराया था।

इस चुनाव के कुछ खास आंकड़े इस प्रकार रहे:

जीत का अंतर: 7,364 वोट।

किसे कितने वोट मिले: मुकेश मल्होत्रा को लगभग 1,00,317 वोट मिले, जबकि रामनिवास रावत के खाते में करीब 92,953 वोट आए थे।

मुख्य बात: इस हार के तुरंत बाद रामनिवास रावत ने नैतिक आधार पर अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

लेकिन अब कहानी पूरी तरह बदल गई है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के उस चुनाव को रद्द (शून्य) घोषित कर दिया है और दूसरे नंबर पर रहे रामनिवास रावत को नया विधायक घोषित कर दिया है।

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चुनावी राजनीति का प्रभाव

यह फैसला विजयपुर क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। रावत के विधायक बनने से यहां की राजनीति में नई दिशा देखने को मिल सकती है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में रावत इस सीट से किस प्रकार से कार्य करेंगे और विधानसभा में अपने विरोधियों से किस प्रकार से निपटेंगे।

लोकतंत्र में सच की जीत: हाई कोर्ट का संदेश

उच्च न्यायालय का यह फैसला नेताओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है। चुनावी मैदान में उतरने से पहले आपको अपना रिकॉर्ड साफ रखना होगा। जनता के सामने गलत जानकारी देना अब महंगा पड़ने वाला है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधूरा नामांकन लोकतंत्र की पवित्रता को बिगाड़ता है। विजयपुर की जनता अब रामनिवास रावत को अपना नया प्रतिनिधि मानेगी। इस फैसले से पूरे मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई है।

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