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News In Short
- एसआईआर के पहले चरण के बाद एमपी में 83 लाख मतदाताओं के पोलिंग बूथ बदले गए हैं।
- भोपाल में 2 लाख से ज्यादा वोटर्स को नए पोलिंग बूथों पर शिफ्ट किया गया है।
- वोटर कार्ड और नई वोटर लिस्ट में अलग-अलग पोलिंग बूथ की जानकारी होगी।
- 10 हजार नए मतदाताओं के नाम लिस्ट में जोड़े जाएंगे, जिनके लिए नए ईपिक कार्ड जारी होंगे।
- चुनाव के दिन समय की बर्बादी और बीएलओ पर दबाव बढ़ सकता है।
News In Detail
भोपाल. चुनावों में वोटर्स का मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां की जाती हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में आगामी चुनावों में वोटर्स को एक बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के बाद राज्य में 83 लाख से अधिक मतदाताओं के पोलिंग बूथ बदल दिए गए हैं। यह बदलाव वोटर कार्ड और नई वोटर लिस्ट में अंतर पैदा कर सकता है। इस वजह से लाखों मतदाताओं को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
नई पोलिंग बूथों की वजह से कन्फ्यूजन
राज्य में 6 हजार 934 नए पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। भोपाल में 260 नए पोलिंग बूथ बढ़ाए गए हैं। इसके कारण, वोटर कार्ड पर दर्ज पोलिंग बूथ और नई वोटर लिस्ट में दिए गए पोलिंग बूथ के बीच अंतर हो सकता है।
इसका मतलब यह है कि जब मतदाता वोटर कार्ड लेकर मतदान केंद्र पहुंचेगा। तब उसका नाम उस पोलिंग बूथ पर नहीं मिलेगा, जिस पर उसका वोटर कार्ड आधारित है। यह भ्रम बढ़ सकता है और चुनाव के दिन समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।
नए मतदाता के लिए वोटर कार्ड जारी
इस बीच, 10 हजार नए मतदाता पहली बार वोटर लिस्ट में शामिल होंगे और उनके लिए नए वोटर कार्ड जारी किए जाएंगे। इन नए मतदाताओं को 22 जनवरी तक आवेदन करके अपने नाम जोड़ने की सुविधा दी गई है। इस तारीख तक आवेदन करने के बाद ही उन्हें मतदान में भाग लेने का अधिकार मिलेगा।
भोपाल में लाखों मतदाता प्रभावित
भोपाल में लगभग 2 लाख मतदाताओं के पोलिंग बूथ बदल गए हैं और पूरे मध्य प्रदेश में यह संख्या 83.20 लाख तक पहुंच चुकी है। इस बदलाव का प्रभाव उन मतदाताओं पर पड़ेगा, जिनके वोटर कार्ड पर और नई वोटर लिस्ट में अलग-अलग पोलिंग बूथ दर्ज हैं। यह मतदाता सही पोलिंग बूथ पर पहुंचने के लिए पहले अपने पुराने पोलिंग बूथ को तलाशेंगे, जिससे समय बर्बाद होगा और मतदान का समय छूट सकता है।
क्यों बदले गए पोलिंग बूथ?
चुनाव आयोग ने यह निर्णय लिया था कि हर पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1200 वोटर्स होंगे। वहीं भोपाल में कई पोलिंग बूथों पर 1500 से ज्यादा मतदाता थे, इस कारण नए पोलिंग बूथ बनाए गए और वोटर्स को शिफ्ट किया गया।
अब भोपाल में कुल 2 हजार 289 पोलिंग बूथ होंगे, जो पहले 2022 थे। मध्यप्रदेश में कुल पोलिंग बूथों की संख्या 65 हजार से बढ़कर 71 हजार 930 हो गई है।
कितने नाम कटे?
एमपी में एसआईआर के बाद, भोपाल में 4 लाख 38 हजार 876 नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इनमें से 1.16 लाख से ज्यादा नाम नो-मैपिंग वोटर्स (जो किसी पोलिंग बूथ से जुड़े नहीं थे) थे।
चुनाव के दिन समस्याएं
चुनाव के दिन वोटर पुरानी पोलिंग बूथ पर पहुंच सकते हैं, जिससे सही मतदान केंद्र खोजने में समय बर्बाद होगा। इस कारण मतदान में देरी हो सकती है और बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है, जिससे व्यवस्था में अव्यवस्था फैल सकती है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में एसआईआर के बाद 83 लाख मतदाताओं के पोलिंग बूथ बदल गए हैं, जिससे वोटर कार्ड और नई वोटर लिस्ट में भिन्नता से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मतदाता को सही मतदान केंद्र पर पहुंचने में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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