व्यापमं आरक्षक भर्ती घोटाला: दोषियों को सजा सुनाने के लिए पहली बार रात 8 बजे तक चली सुनवाई
Anjali Dwivedi | Dec 06, 2025, 20:03 IST
COURT
व्यापमं आरक्षक भर्ती घोटाले में पहली बार कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई। दोषियों को 12-12 हजार रुपए का जुर्माना भी हुआ। कोर्ट देर रात तक चली, क्योंकि आरोपी रास्ते में थे। फैसले में महज 15 मिनट लगे।
GWALIOR : व्यापमं आरक्षक भर्ती घोटाले में पहली बार अदालत रात 8 बजे तक चली। खास बात ये रही कि सजा सुनाने के बाद ही जज कोर्ट से गए। विशेष सत्र न्यायालय ने ग्वालियर में आरक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा मामले मेंदोषी हरवेंद्र चौहान उर्फ प्रवेंद्र और सॉल्वर रणवीर सिंह को 7-7 साल की सजा सुनाई है। दोनों पर 12-12 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
कोर्ट का फैसला देर से हुआ, क्योंकि व्यापमं आरक्षक भर्ती घोटाला के आरोपी रास्ते में थे। उनकी पेशी का इंतजार करते हुए अदालत रात 8 बजे तक लगी। आरोपियों के वकील बार-बार कोर्ट को सूचना दे रहे थे कि वे रास्ते में हैं। करीब तीन घंटे इंतजार करने के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया और फिर सजा सुनाने में महज 15 मिनट लगे।
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यह पहला मामला है जब व्यापमं घोटाले से जुड़ी किसी घटना में सात साल की कठोर सजा दी गई है। इससे पहले ऐसे मामलों में अधिकतम सजा पांच साल ही होती थी। कोर्ट ने इस धोखाधड़ी को सुनियोजित अपराध बताया है। कोर्ट ने कहा कि परीक्षा में धोखाधड़ी एक गंभीर अपराध है, क्योंकि यह मान्यता प्राप्त परीक्षा थी।
यह मामला 30 सितंबर 2012 आरक्षक भर्ती घोटाला एमपीसे जुड़ा है। आरक्षक भर्ती परीक्षा में रणवीर सिंह की जगह हरवेन्द्र चौहान ने परीक्षा दी। एक शिक्षिका ने देखा कि परीक्षार्थी और उसके फॉर्म में फोटो और हस्ताक्षर मैच नहीं कर रहे थे। इस पर उसने केंद्राध्यक्ष को सूचना दी थी। पूछताछ के बाद मामला सामने आया और पुलिस ने कार्रवाई की।
इसके बाद मध्य प्रदेश के मुरैना के शासकीय कन्या विद्यालय में हुई परीक्षा में हरवेन्द्र चौहान को सॉल्वर (solver) के रूप में पकड़ा गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और केस को सीबीआई (CBI) को सौंप दिया।
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कोर्ट ने क्यों किया इंतजार?
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