MP हाईकोर्ट में वक्फ बोर्ड की एंट्री, कहा- बिना सुने कोई फैसला न हो
Sandeep Kumar | Jul 12, 2026, 20:36 IST
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मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने जबलपुर हाईकोर्ट में केविएट दाखिल की है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के कोर्ट जाने के ऐलान के बाद यह कदम उठाया गया। बोर्ड ने पक्ष सुने जाने की मांग रखी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- MP वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों पर विवाद जारी है।
- दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर सवाल उठे।
- आरिफ मसूद ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही।
- वक्फ बोर्ड ने जबलपुर हाईकोर्ट में केविएट लगाई।
- बोर्ड ने पहले अपना पक्ष सुनने की मांग की।
विधायक के ऐलान के बाद उठाया कदम
सिर्फ एहतियाती कानूनी कदम
आरिफ मसूद ने पहले क्या कहा था
मसूद ने यह भी आरोप लगाया था कि सरकार ने दो अन्य समाज के सदस्यों के स्थान पर तीन गैर-मुस्लिम प्रतिनिधियों को शामिल किया है। उनके मुताबिक इसकी वजह यह है कि आयुक्त भी अन्य समुदाय से हैं।
विवाद के बीच बढ़ी कानूनी हलचल
MP हाईकोर्ट में वक्फ बोर्ड की एंट्री
क्या होती है केविएट
FAQ
- वक्फ बोर्ड ने केविएट क्यों दाखिल की?
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के सुप्रीम कोर्ट जाने के ऐलान के बाद बोर्ड ने यह कदम उठाया। बोर्ड चाहता है कि किसी भी याचिका पर आदेश से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए। यह एक एहतियाती कानूनी कदम है। - केविएट का क्या मतलब होता है?
केविएट एक एहतियाती कानूनी आवेदन है। इसके जरिए पक्ष अदालत से मांग करता है कि उसे सुने बिना कोई अंतरिम आदेश पारित न हो। वक्फ बोर्ड ने इसी प्रावधान का उपयोग किया है।
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