सिस्टम के मजाक का करण बन गई जल सुनवाई, मोबाइल की टॉर्च से हो रही पानी की जांच
Amresh Kushwaha | Jan 21, 2026, 12:20 IST
water quality investigation bhopal
भोपाल में हुई जल सुनवाई ने प्रशासन की लापरवाही को सामने ला दिया है। पानी की गुणवत्ता की जांच मोबाइल टॉर्च से की गई। वहीं पानी की जांच करते वक्त यह भी सामने आया कि प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी है और जरूरी उपकरण भी नहीं थे।
News In Short
- भोपाल में जल सुनवाई के दौरान पानी की जांच मोबाइल टॉर्च से की गई।
- कर्मचारियों को केवल क्लोरीन जांच की ट्रेनिंग दी गई, अन्य जांच नहीं हुई।
- आरोप है कि बिना वैज्ञानिक जांच के पानी की गुणवत्ता की गलत रिपोर्ट दी जा रही है।
- विशेषज्ञ का कहना है कि अस्थाई कर्मचारियों से पानी की जांच कराना गलत है।
- रिटायर्ड ईई ने प्रशिक्षित कर्मियों से जांच कराने की आवश्यकता जताई है।
News In Detail
लेकिन, भोपाल में हुई जल सुनवाई के दौरान सिस्टम की लापरवाही साफ नजर आई। अब तो ये जल सुनवाई मजाक बनकर रह गई है।
मोबाइल की टॉर्च से की पानी की जांच
जल सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के जरिए पानी की गुणवत्ता की जांच की जा रही थी, लेकिन हैरानी की बात ये थी कि ये जांच मोबाइल फोन की टॉर्च से की जा रही थी।
पानी में छोटे-छोटे कण देखकर कर्मचारी ने बिना कोई वैज्ञानिक जांच किए ही कह दिया कि पानी ठीक नहीं है। ये पूरी घटना इस बात का साफ सबूत है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर गंभीर नहीं है।
11 के निर्देश, लेकिन एक जांच की मिली ट्रेनिंग
जब रिपोर्टर ने पूछा कि बाकी की जांच क्यों नहीं हो रही, तो कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें सिर्फ क्लोरीन जांच की ट्रेनिंग दी गई है। इसके अलावा, रंग मिलाने और केमिकल डालने को लेकर भी कर्मचारियों को असमंजस था, जो वाकई चिंता की बात है।
बिना केमिकल की पानी की जांच
किताब से रंग मिलाकर बताया पानी में क्लोरीन
अस्थाई कर्मचारी कर रहे पानी की जांच
Sootr Knowledge
जानें क्या है इंदौर का भागीरथपुरा कांड ?
इससे फीकल कोलिफॉर्म और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया फैल गए। इसके अलावा, इलाके के बोरवेल का गंदा पानी नर्मदा की पाइपलाइन में घुसकर पीने के पानी को जहरीला बना रहा था।
इस वजह से उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां फैल गईं, और 3500 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए। इसे भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के मुख्य कारण के तौर पर बताया जा रहा है।
भागीरथपुरा में अभी तक 34631 घरों का सर्वे किया है। अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। एक 6 महीने का बच्चा भी इस संकट का शिकार हो गया।
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