महिला वित्त विकास निगम नहीं होगा बंद, पांच साल के विस्तार पर बनी सहमति

मध्य प्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम अगले पांच साल तक कायम रहेगा। विभाग के ठोस तर्कों के बाद वित्त विभाग ने निगम को बंद करने की ​अपनी सिफारिश वापस ले ली है।

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Ravi Awasthi
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News in Short

  • महिला वित्त एवं विकास निगम अब नहीं होगा बंद।
  • निगम को अगले 5 साल तक जारी रखने पर हुई सहमति।
  • निगम देता है महिला उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों को 2% ब्याज अनुदान 
  • अगले 5 साल में केवल 18.27 करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान।
  • प्रस्ताव को जल्द कैबिनेट में पेश किया जाएगा।

News in Detail

मध्य प्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम अब बंद नहीं होगा। महिला एवं बाल विकास विभाग के ठोस तर्कों के बाद वित्त विभाग इसे जारी रखने पर सहमत हो गया है। वित्त विभाग ने इससे कुछ दिन पहले निगम को बंद करने की सिफारिश की थी। बहरहाल, वित्त विभाग की पहले ना और फिर हां के बाद निगम को जारी रखने का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट बैठक में आ सकता है।  

वित्त बनाम महिला एवं बाल विकास विभाग

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग ने हाल ही में इस निगम को जारी नहीं रखने को सरकार से कहा था। उसने तर्क दिया था कि महिला कल्याण से जुड़ी अधिकांश योजनाओं का संचालन पहले से महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग कर रहे हैं, इसलिए अलग निगम की कोई आवश्यकता नहीं है।

हालांकि, महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस तर्क को खारिज कर दिया था। उसने कहा कि निगम न सिर्फ लाभ की स्थिति में है, बल्कि महिला सशक्तिकरण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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पहले भी हो चुकी है कोशिश

यह पहली बार नहीं है, जब निगम को बंद करने की कोशिश की गई है। इससे पहले भी वित्त विभाग ने ऐसा आदेश जारी किया था, जिसे तत्कालीन प्रमुख सचिव ने यह कहकर निरस्त करवा दिया था कि निगम उनके विभाग द्वारा स्थापित संस्था है। वित्त विभाग केवल राय दे सकता है, न कि निर्णय।

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महिला सशक्तिकरण में अहम भूमिका

विभाग ने स्पष्ट किया कि महिला वित्त एवं विकास निगम महिला उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों और अन्य हितग्राही महिलाओं को 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान उपलब्ध कराता है। साथ ही, बीते बरसों में निगम ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यक्रमों का सफल संचालन किया है।

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कम खर्च, ज्यादा प्रभाव

प्रस्ताव के अनुसार निगम के संचालन पर अगले पांच साल (2030-31 तक) में 18.27 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कर्मचारियों की संख्या सीमित होने और अधिकांश पद प्रतिनियुक्ति से भरे होने के कारण निगम का प्रशासनिक खर्च न्यूनतम है।

अब वित्त विभाग भी सहमत

सूत्र बताते हैं कि महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रस्ताव पर अब वित्त विभाग ने भी सहमति जता दी है। प्रशासकीय स्वीकृति के बाद मामला कैबिनेट के समक्ष लाया जाएगा।

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निगम का वर्तमान ढांचा

साल 1988 में स्थापित निगम में फिलहाल सिर्फ 9 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें एक महाप्रबंधक और एक सहायक लेखापाल शामिल हैं। वर्तमान महाप्रबंधक अरविंद भाल अगले माह सेवानिवृत्त होने वाले हैं।  हालांकि, निगम की प्रबंध संचालक एवं महिला ​बाल विकास विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता ने कहा कि निगम को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

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