वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस: जबलपुर बना आस्था और कला का संगम

चौथी वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस जबलपुर में शुरू हुई। यहां कला, भक्ति और संस्कृति का संगम देखने को मिल रहा है। पेंसिल की नोक पर श्रीराम और सैंड आर्ट आकर्षण बना।

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Neel Tiwari
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Jabalpur. संस्कारधानी जबलपुर में चौथे वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस की शुरुआत होते ही मानस भवन परिसर कला, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम बन गया है।

पेंसिल की नोक पर उकेरे गए श्रीराम से लेकर रेत में सजी रामकथा तक, हर कोना राममय नजर आ रहा है। 20 देशों के डाक टिकटों का संग्रह भी दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ इंदौर से डुमना एयरपोर्ट होते हुए जबलपुर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने मानस भवन में चौथे वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह में भाग लिया।

इसके अलावा, उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्चरल एंड इंफॉर्मेशन सेंटर गीता भवन का उद्घाटन किया और विजय नगर स्थित सरदार पटेल उद्यान में सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण भी किया।

मानस भवन में सजी अनूठी चित्र प्रदर्शनी

वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के पूर्व मानस भवन परिसर में एक विशेष चित्र प्रदर्शनी शुरू हुई है। इस प्रदर्शनी ने शहरवासियों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी खासा ध्यान खींचा है। इस प्रदर्शनी में शहर की एक कलाकार ने रामचरितमानस के सुंदर कांड को पहली बार एक धनुष की आकृति में समाहित कर प्रस्तुत किया है।

इतनी सूक्ष्म और कल्पनाशील रचना को देखने के लिए कई कलाकृतियों को लेंस से देखना पड़ रहा है। यह राजस्थानी और पारंपरिक भारतीय कला की बारीकी को दर्शाता है।

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पेंसिल की नोक पर उकेरा श्रीराम का चित्र

प्रदर्शनी का सबसे अनोखा आकर्षण पनागर निवासी इंजीनियर रिंकू रजक की कलाकृति रही, जिन्होंने पेंसिल की नोक पर प्रभु श्रीराम की आकृति उकेरी है। बेहद सूक्ष्म और धैर्यपूर्ण इस कला ने दर्शकों को हैरान कर दिया। इतनी छोटी सतह पर की गई यह बारीक कलाकारी लोगों के लिए कौतूहल और आस्था दोनों का केंद्र बनी हुई है।

रामायण कॉन्फ्रेंस में पहली बार सैंड आर्ट

इस बार वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में पहली बार सैंड आर्ट को भी शामिल किया गया है। ओडिशा से आए प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट गोपाल चरण ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर रेत से भगवान श्रीराम की भव्य कलाकृति तैयार की है।

आमतौर पर समुद्र तटों पर नजर आने वाली यह कला अब जबलपुर में भी लोगों को आकर्षित कर रही है। करीब 8 घंटे की मेहनत से बनी यह आर्ट अगले दो दिनों तक रामायण कॉन्फ्रेंस में देखी जा सकेगी।

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देश-विदेश से पहुंचे साधक और कलाकार

2, 3 और 4 जनवरी को मानस भवन में आयोजित है। इस चौथे वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में न केवल भारत बल्कि कई देशों से रामायण के अध्येता और श्रोता पहुंचे हैं। बौद्ध भिक्षु, श्रीलंका के उडुगामा सारनाथिसा और लाओस के आचरन सिफान डान भी कार्यक्रम में भाग लेने आ रहे हैं।

इसके अलावा श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया सहित कई देशों के कलाकार और साहित्यकार जबलपुर पहुंचे हैं, जिससे यह आयोजन सच में अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है।

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20 देशों के डाक टिकटों में दिखी रामायण

कॉन्फ्रेंस में एक और खास आकर्षण 20 देशों के डाक टिकटों की प्रदर्शनी है, जिनमें भगवान श्रीराम और रामायण के विभिन्न पात्रों को दर्शाया गया है। इन टिकटों में श्रीराम और सीता के साथ-साथ रावण और मेघनाथ जैसे पात्रों पर भी डाक टिकट शामिल हैं। जबलपुर के डाक टिकट संग्राहकों ने दुनिया भर से ये दुर्लभ टिकट एकत्र कर प्रदर्शनी में रखा है।

रिटायरमेंट के बाद रामायण स्टांप कलेक्शन बना मिशन

इस प्रदर्शनी के पीछे जबलपुर निवासी सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी सतीश कुमार श्रीवास्तव की खास मेहनत है। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने शौक को एक मिशन में बदलते हुए केवल राम और रामायण पर आधारित डाक टिकटों का संग्रह शुरू किया।

शुरुआत भारत से हुई, फिर नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मॉरीशस सहित करीब 20 देशों के डाक टिकट उन्होंने एकत्र किए। उनका यह संग्रह रामायण की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

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रामकथा और आध्यात्मिक प्रवचन

इस वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज भी शामिल हो रहे हैं, जो रामकथा और आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दे रहे हैं। पूरा आयोजन भारतीय संस्कृति, रामचरितमानस और सनातन मूल्यों पर केंद्रित है, जिसमें कला, साहित्य और आध्यात्म का अद्भुत मेल देखने को मिल रहा है।

संस्कारधानी में राममय वातावरण

कुल मिलाकर वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस ने जबलपुर को इन दिनों पूरी तरह राममय बना दिया है। कला, संस्कृति, भक्ति और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता से सजा यह आयोजन न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि कला प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए भी एक यादगार अनुभव बनता जा रहा है। मप्र में वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस

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