संगठन सृजन अभियान : औपचारिक दिखा चयन, कांग्रेस जिलाध्यक्ष वे ही बने, जिन पर वरिष्ठ नेताओं का हाथ रहा

राजस्थान में कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान औपचारिक रहा। असल में कांग्रेस जिलाध्यक्ष वे ही बने, जिन पर वरिष्ठ नेताओं का हाथ रहा। फीडबैक के बाद भी पुराने चेहरों पर दांव खेला गया। 45 में से 17 जिलों पर विधायक और पूर्व विधायक काबिज।

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Rakesh Sharma
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Congress

Photograph: (the sootr)

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Jaipur. राजस्थान में कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने के लिए संगठन सृजन अभियान औपचारिक ही रह गया। अभियान के तहत जिलाध्यक्षों के चयन में बड़े पैमाने पर फीडबैक और संवाद कार्यक्रम हुए, लेकिन जिलाध्यक्ष वे ही चुने गए हैं, जिन पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का हाथ रहा।

45 जिलों में से 10 जिलों में तो पुराने जिलाध्यक्ष ही काबिज रहे हैं। शेष जिलों में विधायक, पूर्व विधायक और नेताओं के सगे संबंधी ज्यादा नियुक्त हुए हैं। 

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सामने आने लगा विरोध

सूची बाहर आते ही दौसा, अजमेर, कोटा में विरोध सामने आना लगा है। दौसा में विधायक डीसी बैरवा ने फिर से जिलाध्यक्ष बनाए गए रामजीलाल ओड का विरोध जताया है। कोटा और अजमेर में भी कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर विरोध जताने लगे हैं। विवाद के चलते जयपुर शहर की घोषणा नहीं हो पाई।

जातिगत समीकरण साधे

राजस्थान में संगठन के हिसाब से 50 जिले हैं। इनमें से 45 जिलों में अध्यक्ष घोषित किए गए हैं। 12 जिलों की कमान वर्तमान विधायकों और पांच जिलों की जिम्मेदारी पूर्व विधायकों को दी गई है। जिलाध्यक्षों की सूची में जातिगत समीकरणों को साधा गया है। सामान्य वर्ग से 8, एससी से 9, एसटी से 8, ओबीसी से 16 और अल्पसंख्यक वर्ग से 4 जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं। इनमें से 7 महिलाएं भी जिलाध्यक्ष बनी हैं।

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डोटासरा, गहलोत और पायलट गुट हावी

45 जिलाध्यक्षों की सूची में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का प्रभाव देखा गया है। सूची में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक नेताओं को ज्यादा जगह मिली है। वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, कांग्रेस नेता हरीश चौधरी, डॉ. सीपी जोशी, भंवर जितेंद्र सिंह अपने जिलों में समर्थक कार्यकर्ताओं को जिलाध्यक्ष बनाने में कामयाब रहे हैं। 

पूरी नहीं हुई उम्मीद

शेखावाटी और जयपुर संभाग के करीब बीस जिलों में डोटासरा की चली है, तो जोधपुर-पाली में गहलोत ने बाजी मारी। पायलट टोंक, दौसा, करौली और हाड़ौती के कुछ जिलों में अपने समर्थक नेताओं को अध्यक्ष बनाने में कामयाब रहे हैं। कुछ जिलों में नए लोगों को जिम्मेदारी दी गई है। वे भी वरिष्ठ नेताओं के आशीर्वाद से जिलाध्यक्ष बने हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं से अभियान से संगठन को मजबूती देने की जो उम्मीद जगी थी, वह पूरी होती दिख नहीं रही है।

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जयपुर शहर में विवाद गहराया

वरिष्ठ नेताओं में सहमति नहीं बन पाने के कारण जयपुर शहर की घोषणा नहीं हो पा रही है। जयपुर शहर में सुनील शर्मा और पुष्पेंद्र भारद्वाज के नाम को लेकर घमासान मचा हुआ है। वहीं वर्तमान अध्यक्ष आरआर तिवाड़ी भी फिर से अध्यक्ष के लिए लॉबिंग में लगे हुए हैं। सुनील शर्मा सचिन पायलट, पुष्पेंद्र गोविंद सिंह डोटासरा और आरआर तिवाड़ी अशोक गहलोत गुट से है। सभी अपना पूरा जोर लगा रहे हैं।

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पांच जिलों में नहीं हुई घोषणा

पांच जिलों में जिलाध्यक्ष की घोषणा नहीं हो पाई। राजसमंद, प्रतापगढ़, बारां और झालावाड़ में अब घोषणा होगी। अंता उपचुनाव के चलते झालावाड़ व बारां जिला में चुनाव नहीं हुए। वहां अब रायशुमारी का दौर चल रहा है। राजसमंद से आदित्य प्रताप सिंह, देवकीनंदन गुर्जर काका, हरिसिंह राठौड़ के नाम हैं, तो प्रतापगढ़ से दिग्विजय सिंह, इंद्रा मीणा, ओमप्रकाश ओझा और उदय अहीर के नाम पर पेंच फंसा हुआ है।

बड़े नेताओं के प्रभाव में फंसा

कांग्रेस के अभियान की शुरुआत दिसंबर, 2024 में कर्नाटक अधिवेशन से हुई। अधिवेशन में पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए संगठन सृजन अभियान की शुरुआत की। सबसे पहले गुजरात, फिर हरियाणा और मध्यप्रदेश में संगठन बना। अब राजस्थान की घोषणा की गई है। 

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कोई काम नहीं आया अभियान

अभियान के तहत हर जिले में विधानसभा, तहसील और वार्डवार फीडबैक लिया गया, तो सैकड़ों दावेदार सामने आए। कई दिनों तक संवाद कार्यक्रम चला। कार्यकर्ताओं का लगा कि इस बार संगठन में एक्टिव कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी मिलेगी, लेकिन जब सूची सामने आई तो अधिकांश जिले पूर्व जिलाध्यक्ष, विधायक और पूर्व विधायकों के पास चले गए। 

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