Rajasthan Health Crisis: जयपुर, सीकर और श्रीगंगानगर के अस्पतालों में दूषित पानी, प्यूरीफायर तक खराब

Jageshwar Prasad | Oct 26, 2026, 10:42 IST
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सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़। पानी में सीवेज बैक्टीरिया और नाइट्रेट।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़। पानी में सीवेज बैक्टीरिया और नाइट्रेट।

सरकारी अस्पतालों में मरीज अपनी बीमारियों का इलाज कराने पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें वहां संक्रमण का बड़ा खतरा मिल रहा है। हाल ही में जयपुर, सीकर और श्रीगंगानगर के एक दर्जन से अधिक अस्पतालों के पानी के नमूनों की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए। यहां कहीं पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिले हैं, तो कहीं नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा से 6 गुना तक अधिक पाई गई है।

श्रीगंगानगर के रावला मंडी सीएचसी के पानी में 100 एमएल में 460 बैक्टीरिया मिले, जबकि सीकर के जनाना अस्पताल में नाइट्रेट 290 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया। इस लापरवाही ने अस्पतालों की व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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08 Oct 2026 ,
By Sandeep Kumar
सरकार ने कैंसर की दवाएं सस्ती करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कैंसर का इलाज करने वाली सभी गैर-अनुसूचित दवाओं पर दुकानदारों का मुनाफा अब एमआरपी का 30 फीसदी तक रहेगा। सरकार को ढाई हजार करोड़ रुपए की बचत का अनुमान है। कैंसर दवाओं पर 30 फीसदी मुनाफा तय होने से कैंसर मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। NPPA 131 कैंसर दवाओं की कीमत तय कर चुका है।
सरकार ने कैंसर की दवाएं सस्ती करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कैंसर का इलाज करने वाली सभी गैर-अनुसूचित दवाओं पर दुकानदारों का मुनाफा अब एमआरपी का 30 फीसदी तक रहेगा। सरकार को ढाई हजार करोड़ रुपए की बचत का अनुमान है। कैंसर दवाओं पर 30 फीसदी मुनाफा तय होने से कैंसर मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। NPPA 131 कैंसर दवाओं की कीमत तय कर चुका है।

अस्पतालों में पानी के रखरखाव की पोल खुली

पड़ताल में सामने आया कि अधिकांश अस्पतालों में ट्यूबवेल का पानी सीधे टंकियों में स्टोर किया जाता है। कई अस्पतालों की टंकियों पर सफाई की तारीख तक दर्ज नहीं मिली, जबकि कई जगहों पर वाटर प्यूरीफायर पूरी तरह खराब पड़े हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अस्पताल में आने वाले मरीज पहले से ही अस्वस्थ और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले होते हैं। ऐसे में दूषित पानी (Contaminated water)पीने से पेट और आंतों का गंभीर संक्रमण होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

उदयपुर में ANM सीखेंगी गर्भवती महिलाओं की जांचें, राजस्थान में पहली बार लागू होगा नया मॉड्यूल | ANMs in Udaipur to Learn Pregnant Women's Tests, New Module to be Implemented for the First Time in Rajasthan
राजस्थान में पहली बार: गर्भवती महिलाओं की जांचें करना सीखेंगी ANM, उदयपुर से लागू होगा मॉड्यूल
25 Oct 2026 ,
By Jageshwar Prasad
उदयपुर जिले में गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए नई पहल की जा रही है। जिले की 670 ऑग्जिलरी नर्स मिडवाइफ (ANM) को अस्पतालों में लैब टेक्नीशियन के साथ रखकर 9 प्रमुख जांचों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे, जिन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। यह मॉड्यूल लागू करने वाला उदयपुर राजस्थान का पहला जिला बनेगा।
उदयपुर जिले में गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए नई पहल की जा रही है। जिले की 670 ऑग्जिलरी नर्स मिडवाइफ (ANM) को अस्पतालों में लैब टेक्नीशियन के साथ रखकर 9 प्रमुख जांचों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे, जिन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। यह मॉड्यूल लागू करने वाला उदयपुर राजस्थान का पहला जिला बनेगा।

सीकर और श्रीगंगानगर के अस्पतालों का हाल बेहाल

शेखावाटी के सबसे बड़े एसके अस्पताल में रोजाना 5 हजार से ज्यादा मरीज आते हैं। यहां पानी के सैंपल में 100 एमएल में 23 से अधिक कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और 140 मिलीग्राम प्रति लीटर नाइट्रेट मिला, जबकि टंकी के पास लगा प्यूरीफायर खराब पड़ा है।

सीकर के ही जनाना अस्पताल में नाइट्रेट की मात्रा 290 मिलीग्राम प्रति लीटर (तय सीमा 45 से 6 गुना ज्यादा) पाई गई। लक्ष्मणगढ़ जिला अस्पताल में 43 और श्रीमाधोपुर सीएचसी में 9 बैक्टीरिया मिले।

उधर, श्रीगंगानगर के रावला मंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पानी में 100 एमएल में 460 बैक्टीरिया दर्ज किए गए। टंकी के पास गंदगी के बीच से ही मरीजों के लिए पानी भरा जा रहा था।

त्योहारों पर मावा-पनीर में मिलावट का खतरा: राजस्थान में 41% नमूने फेल, FSSAI की सख्त निगरानी | Mawa-Paneer Adulteration Risk During Festivals: 41% Samples Fail in Rajasthan, Strict FSSAI Surveillance
त्योहारों पर मावा-पनीर में मिलावट का खतरा, राजस्थान में 41% नमूने फेल; स्टोरेज से डिलीवरी तक निगरानी
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त्योहारों में मावा-पनीर की बढ़ती मांग के बीच FSSAI ने स्टोरेज, परिवहन और डिलीवरी के नियमों पर सख्ती के निर्देश दिए हैं। राजस्थान में जनवरी से अगस्त तक जांचे गए 233 मावा नमूनों में से 96 मिलावटी पाए गए। नियमों का उल्लंघन मिलने पर जुर्माना, खाद्य सामग्री की जब्ती और संबंधित कानून के तहत कैद तक की कार्रवाई हो सकती है।
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जयपुर जिले के अस्पतालों में भी नाइट्रेट की अधिकता

जयपुर जिले के चौमूं राजकीय उप जिला अस्पताल के पानी में नाइट्रेट 80 मिलीग्राम प्रति लीटर और गोविंदगढ़ सीएचसी में 109 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि जयपुर जिले के जांचे गए अस्पतालों के पानी में बैक्टीरिया नहीं मिले, लेकिन नाइट्रेट की मात्रा मानकों से काफी अधिक रही।

राजस्थान में जननी एक्सप्रेस की पोल खुली: 600 एंबुलेंस के बावजूद सिर्फ 12% हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को फायदा | Janani Express's Flaws Exposed in Rajasthan: Only 12% High-Risk Pregnant Women Benefited Despite 600 Ambulances
राजस्थान में जननी एक्सप्रेस की खुली पोल, 600 एंबुलेंस फिर भी सिर्फ 12% हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को फायदा
19 Oct 2026 ,
By Jageshwar prasad
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज में गर्भवती महिलाओं की मौत के बाद राजस्थान में मेटरनल हेल्थ सर्विसेस को लेकर सवाल उठ रहे। राजस्थान सरकार की समीक्षा में ही ये पता चला है कि सूबे में सिर्फ 12 फीसदी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को 104 जननी एक्सप्रेस की सुविधा मिली। पूरे प्रदेश में 600 एंबुलेंस हैं, लेकिन अलग-अलग वजहों से ये सुविधा गर्भवतियों को नहीं मिल पाई।
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अधिकारियों के बयान और सफाई

मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है:

  • नरोत्तम शर्मा (एडिशनल डायरेक्टर, अस्पताल प्रशासन): "सभी अस्पतालों से रिपोर्ट मंगवाकर लापरवाही की जांच कराएंगे।"
  • डॉ. अशोक महरिया (सीएमएचओ, सीकर): "पानी की गुणवत्ता में गड़बड़ी की सूचना मिलने पर जांच कराएंगे।"
  • डॉ. अजय सिंगला (सीएमएचओ, श्रीगंगानगर): "अस्पतालों में आरओ लगे हैं। जहां कोलीफॉर्म ज्यादा मिलते हैं, वहां ब्लीचिंग पाउडर से बैक्टीरिया नियंत्रित किए जाते हैं।"
  1. सरकारी अस्पतालों में पानी की गुणवत्ता के बारे में हाल ही में क्या गंभीर खुलासे हुए हैं?
    हाल ही में सरकारी अस्पतालों के पानी के नमूनों की जांच में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया (Coliform Bacteria) और नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उदाहरण के लिए, श्रीगंगानगर के रावला मंडी सीएचसी में 100 एमएल में 460 बैक्टीरिया मिले, जबकि सीकर के जनाना अस्पताल में नाइट्रेट 290 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया।
  2. अस्पतालों में पानी की समस्या के कारण क्या स्वास्थ्य के खतरनाक प्रभाव हो सकते हैं?
    दूषित पानी पीने से मरीजों में पेट और आंतों का गंभीर संक्रमण हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कमजोर होती है।
  3. सरकारी अधिकारियों ने राजस्थान के अस्पतालों में पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या कदम उठाने का आश्वासन दिया है?
    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लापरवाही की जांच का आश्वासन दिया है। एडिशनल डायरेक्टर नरोत्तम शर्मा ने कहा है कि सभी अस्पतालों से रिपोर्ट मंगवाई जाएगी और जांच की जाएगी।
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