पटवारी कार्यालय के ठीक सामने बड़ा खेल, सरकारी नहर पाटकर काटी जा रही अवैध प्लॉटिंग, जांच के आदेश
Umeshwari Baghel | Oct 26, 2026, 09:19 IST
रायपुर में अवैध प्लॉटिंग का बड़ा खेल उजागर
Raipur Illegal Plotting: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला सामने आया है। केंदुल गांव में सरकारी नहर को मिट्टी और मुरुम डालकर पाटने का आरोप है। बताया जा रहा है कि नहर की जमीन पर रास्ता बनाकर आसपास प्लॉट काटे जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब पटवारी कार्यालय के ठीक सामने हुआ।
ग्रामीणों की शिकायत के(रायपुर राजस्व विभाग) बाद कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने एसडीएम को जांच और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
रायपुर से लगे केंदुल गांव में (Chhattisgarh Land Dispute) जमीन की अवैध खरीद-बिक्री की शिकायत सामने आई है। (सरकारी नहर अतिक्रमण) ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी नहर को मिट्टी और मलबे से भर दिया गया। इसके बाद उस जगह से प्लॉटिंग क्षेत्र तक पहुंचने का रास्ता बना दिया गया।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार खसरा नंबर 116/3, 117/4 और 117/5 सरकारी नहर से संबंधित हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन जमीनों पर नियमों के खिलाफ काम किया गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सरकारी जमीन की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने नहर का पुराना स्वरूप बहाल करने की भी मांग की है।
नहर बंद होने से आसपास के किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। इस नहर का उपयोग खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए होता है। बारिश के दौरान यह पानी की निकासी में भी मदद करती है।
ग्रामीणों का कहना है कि नहर बंद होने से पानी का बहाव प्रभावित होगा। इससे खेतों में पानी पहुंचने में परेशानी हो सकती है। बारिश के मौसम में आसपास जलभराव का खतरा भी बढ़ सकता है।
किसानों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी नहर को दोबारा चालू किया जाना चाहिए।
शिकायत में कई कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग करने का आरोप लगाया गया है। इनमें खसरा नंबर 116/1, 116/2, 116/4 और 116/5 शामिल हैं। इसके अलावा 117/1, 117/2, 117/3 और 117/6 का भी उल्लेख किया गया है।
आरोप है कि जमीन का जरूरी डायवर्शन नहीं कराया गया। कॉलोनी विकसित करने के लिए आवश्यक अनुमतियां भी नहीं ली गईं। इसके बावजूद कृषि भूमि को छोटे प्लॉट में बांटकर बेचने की गतिविधियां शुरू कर दी गईं।
कुछ जमीनों की रजिस्ट्री होने की बात भी सामने आई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति पंजीयन दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद स्पष्ट होगी।
इस मामले में ग्रामीणों की शिकायत में छह लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें प्यारेलाल वर्मा, शंकरलाल वर्मा और नीलमणी वर्मा शामिल हैं। इनके अलावा ओमप्रकाश श्रीवास, मुरलीधर वर्मा और एजाज अली का भी नाम है।
शिकायत में इन लोगों का संबंध कथित प्लॉटिंग गतिविधियों से बताया गया है। हालांकि किसी की कानूनी जिम्मेदारी अभी तय नहीं हुई है। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
इस मामले में राजस्व (Chhattisgarh Land Dispute) अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध प्लॉटिंग की गतिविधियां पटवारी कार्यालय के सामने चल रही थीं।
इसके बावजूद समय रहते काम रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं ने पटवारी और तहसीलदार स्तर पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का सवाल है कि सरकारी नहर पाटने की गतिविधियां अधिकारियों की जानकारी में क्यों नहीं आईं। शिकायत होने के बाद भी जमीन से जुड़े काम कैसे जारी रहे।
अब प्रशासनिक जांच में अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
मामले की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में भी की गई थी। इसके बाद संबंधित पटवारी उमा प्रधान ने रिपोर्ट तैयार की।
पटवारी उमा प्रधान के अनुसार शिकायत मिलने के बाद रिपोर्ट तहसीलदार को भेज दी गई थी। आगे की कार्रवाई तहसीलदार के स्तर से की जानी है।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल रिपोर्ट भेजने से समस्या हल नहीं होगी। सरकारी जमीन पर हुए कथित कब्जे को हटाना भी जरूरी है।
मामला सामने आने के बाद (Raipur Collector Action) रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने एसडीएम से संबंधित जमीन और प्लॉटिंग की जांच कराने को कहा है।
कलेक्टर के अनुसार प्लॉटिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की रिपोर्ट भी मंगाई जाएगी।
संबंधित खसरा रिकॉर्ड पर रोक लगाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इस संबंध में अंतिम प्रशासनिक आदेश की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
फिलहाल जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरकारी नहर पर कितना कब्जा हुआ है। साथ ही यह भी पता चलेगा कि किन लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया है।
सरकारी नहर पाटकर बना दिया रास्ता
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार खसरा नंबर 116/3, 117/4 और 117/5 सरकारी नहर से संबंधित हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन जमीनों पर नियमों के खिलाफ काम किया गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सरकारी जमीन की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने नहर का पुराना स्वरूप बहाल करने की भी मांग की है।
किसानों के सामने सिंचाई का संकट
ग्रामीणों का कहना है कि नहर बंद होने से पानी का बहाव प्रभावित होगा। इससे खेतों में पानी पहुंचने में परेशानी हो सकती है। बारिश के मौसम में आसपास जलभराव का खतरा भी बढ़ सकता है।
किसानों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी नहर को दोबारा चालू किया जाना चाहिए।
बिना अनुमति कृषि भूमि पर प्लॉट काटने का आरोप
आरोप है कि जमीन का जरूरी डायवर्शन नहीं कराया गया। कॉलोनी विकसित करने के लिए आवश्यक अनुमतियां भी नहीं ली गईं। इसके बावजूद कृषि भूमि को छोटे प्लॉट में बांटकर बेचने की गतिविधियां शुरू कर दी गईं।
कुछ जमीनों की रजिस्ट्री होने की बात भी सामने आई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति पंजीयन दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद स्पष्ट होगी।
शिकायत में छह लोगों के नाम
शिकायत में इन लोगों का संबंध कथित प्लॉटिंग गतिविधियों से बताया गया है। हालांकि किसी की कानूनी जिम्मेदारी अभी तय नहीं हुई है। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
पटवारी कार्यालय के सामने कैसे हुई प्लॉटिंग?
इसके बावजूद समय रहते काम रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं ने पटवारी और तहसीलदार स्तर पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का सवाल है कि सरकारी नहर पाटने की गतिविधियां अधिकारियों की जानकारी में क्यों नहीं आईं। शिकायत होने के बाद भी जमीन से जुड़े काम कैसे जारी रहे।
अब प्रशासनिक जांच में अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
पटवारी ने तहसीलदार को भेजी रिपोर्ट
पटवारी उमा प्रधान के अनुसार शिकायत मिलने के बाद रिपोर्ट तहसीलदार को भेज दी गई थी। आगे की कार्रवाई तहसीलदार के स्तर से की जानी है।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल रिपोर्ट भेजने से समस्या हल नहीं होगी। सरकारी जमीन पर हुए कथित कब्जे को हटाना भी जरूरी है।
कलेक्टर ने एसडीएम को दिए कार्रवाई के निर्देश
कलेक्टर के अनुसार प्लॉटिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की रिपोर्ट भी मंगाई जाएगी।
संबंधित खसरा रिकॉर्ड पर रोक लगाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इस संबंध में अंतिम प्रशासनिक आदेश की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
फिलहाल जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरकारी नहर पर कितना कब्जा हुआ है। साथ ही यह भी पता चलेगा कि किन लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया है।
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