डांगावास दलित हत्याकांड में आया फैसला, कोर्ट ने सभी 40 आरोपी किए बरी

Mukesh Sharma | Aug 05, 2026, 17:23 IST
Share
डांगावास हत्याकांड
डांगावास हत्याकांड

राजस्थान में नागौर के डांगावास में 15 मई 2015 को भूमि विवाद के चलते छह लोगों की हत्या के मामले में मेड़ता एससी/एसटी कोर्ट ने सबूत साबित नहीं होने आधार पर सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 2015 के नागौर डांगावास हत्याकांड में मेड़ता एससी/एसटी कोर्ट का फैसला।
  • 3.77 हेक्टेयर भूमि विवाद और पंचायत के दौरान हुई हिंसक झड़प में 6 लोगों की हुई थी मौत।
  • सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूतों के साबित न होने पर सभी आरोपियों को किया बरी।
  • राज्य सरकार ने पहले सीआईडी और बाद में मामला सीबीआई को सौंपा था।
राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास में 15 मई 2015 को हुए दलित हत्याकांड में कोर्ट ने सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया है। मेड़ता की एसटी-एससी मामलों की विशेष कोर्ट ने बुधवार को यह फैसला दिया। इस हत्याकांड में 6 लोगों की मौत हुई थी। कोर्ट ने मामले में सीबीआई की ओर से पेश सबूतों के साबित नहीं होने के आधार पर आरोपियों को बरी किया है।

यह था मामला

15 मई 2015 को, राजस्थान के नागौर जिले के डंगावास गाँव में भूमि विवाद को लेकर जाट समुदाय के 200 से अधिक सदस्यों ने पांच दलितों सहित छह लोगों पर हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। तत्कालीन राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।

यह 3.77 हेक्टेयर जमीन का विवाद था

एक जाट परिवार के वंशजों ने दावा था कि वह जमीन 1964 में एक दलित ने एक जाट को बेची थी। लेकिन, 1955 के राजस्थान काश्तकारी अधिनियम-1955 की धारा 42 के अनुसार, अनुसूचित जाति (SC) के किसी सदस्य की जमीन को एसटी सहित किसी अन्य समुदाय के व्यक्ति को हस्तांतरित या बेचा नहीं जा सकता है।

दलित परिवार की कहानी

दलित परिवार का कहना था कि उन्होंने करीब 40 साल पहले जाट परिवार को जमीन पर खेती के अधिकार देकर उनसे 1500 रुपये उधार लिए थे। 20 साल बाद जब उनके पैसे वापस लौटाए तो जाट परिवार ने जमीन वापस करने से इनकार कर दिया। बाद में मामला स्थानीय अदालत में पहुंचा। अदालत में भूमि रिकॉर्ड में विसंगतियों के कारण यह लंबित रहा। मई 2015 में हिंसा में मारे गए रत्नाकर मेघवाल ने जमीन के उसी टुकड़े पर एक मकान बना लिया था।

गांव की पंचायत में हुआ था बवाल

जमीन को लेकर जाट व मेघवाल समाज के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। विवाद को सुलझाने के लिए गांव की पंचायत बुलाई गई थी। बातचीत के दौरान जाटों ने दलित परिवार के एक सदस्य अर्जुन पर लाठी से वार कर दिया। विवाद बढ़ा तो जाटों की भीड़ में से किसी ने दलित रामपाल पर फायर कर दिया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।

इसके बाद जाटों ने दलित परिवार पर हमला कर दिया। दलित पोखरमल,रत्नाराम व पांचूराम को ट्रैक्टर से रौंदकर मार डाला। निर्दयता इतनी कि पांचूराम को मारने के बाद उसकी आंखों में लकड़ी घोंप दी गई थी। एक दलित महिला पर नुकीली वस्तुओं और डंडों से प्रहार कर उसे गंभीर रुप से घायल कर दिया था। परिवार के लोग बचने के लिए छत पर छिपे तो उग्र भीड़ ने घर ही ढ़हा दिया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान सरकार ने जांच सीआईडी (CID) को सौंप दी और बाद में मामला सीबीआई (CBI) को रेफर कर दिया गया। इसके बाद सीबीआई ने 40 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जनवरी 2018 में नागौर के मेड़ता स्थित एससी/एसटी अत्याचार मामलों की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी।

ये खबर भी पढे़:-

रविंद्र सिंह भाटी को कोर्ट से राहत, छात्र आंदोलन मामले में दोषमुक्त

SDM थप्पड़कांड में नरेश मीणा करेंगे सरेंडर, जमानत रद्द होने से गरमाई राजनीति

केंद्र ने कहा- मानगढ़ धाम राष्ट्रीय स्मारक नहीं बनेगा, बेनीवाल और कांग्रेस का पलटवार

ओबीसी आरक्षण पर होगा फैसला, 2500 सरपंच व 1750 पार्षद पद हो सकते हैं आरक्षित



Tags:
  • राजस्थान सरकार
  • सीबीआई
  • अनुसूचित जाति
  • नागौर
  • राजस्थान काश्तकारी अधिनियम-1955
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब

By VINAY VERMA

अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान

By Ashish Bhardwaj

RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
वेदांता ग्रुप को जल्द नया और युवा नेतृत्व मिलेगा: प्रिया अग्रवाल हेब्बर हो सकती हैं उत्तराधिकारी, कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी?

By Arohi Raj

वेदांता ग्रुप को जल्द नया और युवा नेतृत्व मिलेगा: प्रिया अग्रवाल हेब्बर हो सकती हैं उत्तराधिकारी, कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी?
हाईकोर्ट की फटकार से जागा स्वास्थ्य विभाग: सचिव अमित कटारिया पर लगा जुर्माना, लापरवाही में कांकेर CMHO सस्पेंड

By Umeshwari Baghel

हाईकोर्ट की फटकार से जागा स्वास्थ्य विभाग: सचिव अमित कटारिया पर लगा जुर्माना, लापरवाही में कांकेर CMHO सस्पेंड