DSP गोविंद की उदयपुर नियुक्ति पर रोक, कन्हैयालाल हत्याकांड से रहा इनका संबंध
Ashish Bhardwaj | Jun 11, 2026, 13:46 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में निलंबित रहे पुलिस अधिकारी गोविंद सिंह की उदयपुर नियुक्ति पर रोक लगा दी गई है। कन्हैयालाल के परिवार ने गोविंद सिंह की उदयपुर नियुक्ति का विरोध किया था।
ऐसे समझें पूरा मामला
- उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड से जुड़ी एक बड़ी खबर आई सामने।
- पीड़ित परिवार की आपत्ति पर डीएसपी गोविन्द सिंह की उदयपुर नियुक्ति पर रोक।
- गोविंद सिंह का बांसवाड़ा से डीएसीपी के रूप में उदयपुर किया गया था तबादला।
- कन्हैयालाल की हत्या के समय गोविंद सिंह उदयपुर में थानाधिकारी के रूप में थे।
- परिजनों का आरोप है कि थानाधिकारी के लापरवाही से उनके पिता की हत्या हुई।
Udaipur: राजस्थान के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पीड़ित परिवार की आपत्ति के बाद डीएसपी गोविन्द सिंह की उदयपुर नियुक्ति पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। गोविंद सिंह इस हत्याकांड में थानाधिकारी के रूप में निलंबित रह चुके हैं।
डीएसपी गोविंद सिंह का हाल ही में बांसवाड़ा से उदयपुर ट्रांसफर किया गया था। इनके उदयपुर ट्रांसफर होने पर स्वर्गीय कन्हैयालाल के बेटे यश तेली ने विरोध जताया। बुधवार को यश तेली अपने समाज के लोगों के साथ आईजी गौरव श्रीवास्तव से मिले थे। उन्होंने आईजी से डीएसपी गोविंद सिंह की जॉइनिंग उदयपुर जिले में नहीं किए जाने की मांग की।
तबादला सूची आते ही शुरू हुआ विरोध
उनकी जगह बांसवाड़ा साइबर क्राइम से डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित को उदयपुर गिर्वा के पद पर तैनात किया गया था। लेकिन, जैसे ही गोविंद सिंह के उदयपुर ट्रांसफर की जानकारी हुई, वैसे ही कन्हैयालाल के परिवार और स्थानीय समाज ने इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया।
कन्हैयालाल के बेटे की आईजी से मुलाकात
यश तेली ने आईजी को एक ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट शब्दों में मांग की कि डीएसपी गोविंद सिंह को उदयपुर जिले में किसी भी पद पर जॉइन न कराया जाए और उनकी नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। पीड़ित परिवार ने राज्य सरकार को भी इस संबंध में अपनी गंभीर आपत्तियों से अवगत कराया, जिसके बाद मामले की उच्च स्तरीय समीक्षा शुरू हुई और फिलहाल उनकी जॉइनिंग पर रोक लगा दी गई।
आरोप: सुरक्षा मांगी थी, लेकिन समझौता कराकर छोड़ दिया
हत्या से पहले मेरे पिताजी ने खुद थाने जाकर जान का खतरा बताते हुए सीआई गोविंद सिंह से सुरक्षा की गुहार लगाई थी, लेकिन उन्होंने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। सुरक्षा देने के बजाय, उन्होंने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर जबरन समझौता करवा दिया और मामले को रफा-दफा कर दिया। इसी लापरवाही का नतीजा था कि समाज कंटकों के हौसले बुलंद हुए और मेरे पिताजी की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
यश तेली ने कहा कि जब तक कन्हैयालाल हत्याकांड में पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, तब तक इस तरह के विवादित अधिकारियों की उदयपुर में नियुक्ति उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है और इससे उनकी भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचती है।
क्या था पूरा कन्हैयालाल हत्याकांड?
दरअसल, भाजपा की तत्कालीन राष्ट्रीय प्रवक्ता नुपुर शर्मा के एक विवादित बयान के समर्थन में कन्हैयालाल के सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट शेयर हुई थी, जिसके बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं।
आरोपियों ने न केवल इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया, बल्कि इसका एक खौफनाक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी किया था। इसके बाद पुलिस ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। लापरवाही के आरोप में थानाधिकारी गोविंद सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था।
प्रशासन बैकफुट पर, अग्रिम आदेशों का इंतजार
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब इस मामले में सरकार और मुख्यालय स्तर पर पुनः समीक्षा की जा रही है। जल्द ही गोविंद सिंह के स्थान पर किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति या उनके तबादला आदेश में संशोधन को लेकर नया आदेश जारी किया जा सकता है।
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