नहीं रहे राजस्थानी सुरों के भागीरथ केसी मालू, लोक संगीत को दिलाई वैश्विक पहचान
Jageshwar prasad | Jul 14, 2026, 13:26 IST
नहीं रहे राजस्थानी सुरों के भगीरथ केसी मालू, 80 साल में दिल्ली में निधन
राजस्थान की लोकधुनों को ऊंचाई पर ले जाने वाले केसी मालू का सोमवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने राजस्थानी लोकसंगीत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। वे आखिरी पल तक लोक संगीत के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे।
राजस्थान के लोक संगीत की पहचान जब भी देश-दुनिया में होगी तो उसमें केशरी चंद उर्फ केसी मालू का नाम हमेशा सबसे ऊंचे पायदान पर लिया जाएगा।
उन्होंने केवल सफल उद्योगपति के रूप में नहीं, बल्कि राजस्थानी माटी के सुरों के सबसे बड़े संवाहक के रूप में अपनी पहचान बनाई।
सोमवार देर रात दिल्ली में हार्ट अटैक से 80 वर्ष की उम्र में मालू का निधन हो गया। उनके निधन से राजस्थानी संस्कृति का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है।
मालू जीवन के आखिरी पल तक लोक संगीत के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे। अपने निधन से 4 दिन पहले यानी 10 जुलाई 2026 को उन्होंने 'चाल साथ बागां में चालां' नाम से नया राजस्थानी एल्बम रिलीज किया था।
एक दौर था जब राजस्थानी लोकगीत केवल ग्रामीण अंचलों या सीमित दायरों तक ही सिमटे हुए थे। केसी मालू ने तकनीक और संस्कृति का ऐसा अनूठा संगम कराया कि राजस्थानी लोकगीत टेप रिकॉर्डर के माध्यम से देश-दुनिया के घर-घर तक पहुंच गए।
जब कैसेट का दौर शुरू हुआ, तब उन्होंने वीणा कैसेट्स अब वीणा म्यूजिक की स्थापना की। उनके द्वारा प्रोड्यूस किए गए घूमर, चीरमी, कांगसियो, गोरबंद और पिपली जैसे एल्बम आज भी राजस्थानी संगीत प्रेमियों की जुबान पर हैं। हर शादी-ब्याह व सांस्कृतिक आयोजन की जान हैं।
उन्होंने गायिका सीमा मिश्रा सहित सैकड़ों स्थानीय लोक कलाकारों को तराशा और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
केसी मालू के लिए लोक संस्कृति का संरक्षण कोई व्यापार नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी थी। उन्होंने बिना किसी सरकारी सहायता के 5,000 से अधिक राजस्थानी लोकगीतों की पांडुलिपियां और ध्वनिलिपियां तैयार करवाईं। उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग करवाई ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों को न भूलें।
मालू ने राजस्थानी लोक संस्कृति में एक और रिकॉर्ड दर्ज कराया। उन्होंने 221 राजस्थानी विवाह गीतों का एक अनूठा संकलन तैयार किया। इसे हिंदी, अंग्रेजी और राजस्थानी भाषा में बाकायदा पुस्तक रूप में प्रकाशित किया गया। साथ में 24 ऑडियो-वीडियो सीडी भी जारी की गईं। इसे संगीत जगत में विश्व का सबसे बड़ा विवाह गीत संग्रह माना जाता है।
मालू का जन्म 1946 में चूरू जिले के सुजानगढ़ में हुआ। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एमए की डिग्री ली। उन्होंने पास साहित्य रत्न और जैन सिद्धांत रत्न की उपाधियां भी ली।
उन्होंने महान संगीतकार नौशाद के साथ मिलकर राजस्थानी लोक संगीत को नए शास्त्रीय आयाम दिए। वर्ष 1987 के भीषण अकाल के दौरान उन्होंने ‘लता मंगेशकर नाइट’ का आयोजन कर करीब 1 करोड़ रुपए राहत कार्यों के लिए जुटाए थे। उस दौर में यह एक अविश्वसनीय रिकॉर्ड था।
वे राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराने की मुहिम के मुखर समर्थक रहे।
इसके लिए सतत प्रयास किए।
राजस्थानी लोक संगीत और संस्कृति के संरक्षण में उनके अतुलनीय योगदान के लिए केसी मालू को कई शीर्ष सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें राजस्थान रत्न सम्मान से विभूषित किया गया।
राजस्थान संगीत नाटक अकादमी ने मालू को समग्र कला साधना अवॉर्ड से नवाजा। महजूर महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन ने उन्हें डागर घराना अवॉर्ड दिया।
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उन्होंने केवल सफल उद्योगपति के रूप में नहीं, बल्कि राजस्थानी माटी के सुरों के सबसे बड़े संवाहक के रूप में अपनी पहचान बनाई।
सोमवार देर रात दिल्ली में हार्ट अटैक से 80 वर्ष की उम्र में मालू का निधन हो गया। उनके निधन से राजस्थानी संस्कृति का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है।
कैसेट्स के जरिए घर-घर पहुंचाई माटी की खुशबू
एक दौर था जब राजस्थानी लोकगीत केवल ग्रामीण अंचलों या सीमित दायरों तक ही सिमटे हुए थे। केसी मालू ने तकनीक और संस्कृति का ऐसा अनूठा संगम कराया कि राजस्थानी लोकगीत टेप रिकॉर्डर के माध्यम से देश-दुनिया के घर-घर तक पहुंच गए।
जब कैसेट का दौर शुरू हुआ, तब उन्होंने वीणा कैसेट्स अब वीणा म्यूजिक की स्थापना की। उनके द्वारा प्रोड्यूस किए गए घूमर, चीरमी, कांगसियो, गोरबंद और पिपली जैसे एल्बम आज भी राजस्थानी संगीत प्रेमियों की जुबान पर हैं। हर शादी-ब्याह व सांस्कृतिक आयोजन की जान हैं।
उन्होंने गायिका सीमा मिश्रा सहित सैकड़ों स्थानीय लोक कलाकारों को तराशा और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
बिना सरकारी मदद के तैयार कीं 5,000 से अधिक पांडुलिपियां
मालू ने राजस्थानी लोक संस्कृति में एक और रिकॉर्ड दर्ज कराया। उन्होंने 221 राजस्थानी विवाह गीतों का एक अनूठा संकलन तैयार किया। इसे हिंदी, अंग्रेजी और राजस्थानी भाषा में बाकायदा पुस्तक रूप में प्रकाशित किया गया। साथ में 24 ऑडियो-वीडियो सीडी भी जारी की गईं। इसे संगीत जगत में विश्व का सबसे बड़ा विवाह गीत संग्रह माना जाता है।
सुजानगढ़ से शास्त्रीय जुगलबंदी तक का सफर
उन्होंने महान संगीतकार नौशाद के साथ मिलकर राजस्थानी लोक संगीत को नए शास्त्रीय आयाम दिए। वर्ष 1987 के भीषण अकाल के दौरान उन्होंने ‘लता मंगेशकर नाइट’ का आयोजन कर करीब 1 करोड़ रुपए राहत कार्यों के लिए जुटाए थे। उस दौर में यह एक अविश्वसनीय रिकॉर्ड था।
वे राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराने की मुहिम के मुखर समर्थक रहे।
इसके लिए सतत प्रयास किए।
कई पुरस्कार और सम्मान मिले
राजस्थान संगीत नाटक अकादमी ने मालू को समग्र कला साधना अवॉर्ड से नवाजा। महजूर महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन ने उन्हें डागर घराना अवॉर्ड दिया।
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