मांड गायिका गवरी देवी का निधन, अंतिम समय तक रहीं सक्रिय
Jageshwar prasad | Jun 12, 2026, 14:29 IST
मांड गायिका गवरी देवी का निधन
राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी का निधन हो गया है। वे करीब 98 वर्ष की थीं। गवरी देवी 8 दशक से मांड गायन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय थीं।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान की लोकप्रिय मांड गायिका गवरी देवी का निधन।
- गवरी देवी ने 98 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली।
- गवरी देवी 8 दशक से मांड गायन के क्षेत्र में सक्रिय थीं।
- बहू और पोती गायकी की विरासत सौंपकर दुनिया से हुई विदा।
- आवाज का जादू ऐसा था कि जिसने भी उन्हें सुना, वह मंत्रमुग्ध हुआ।
उन्होंने गुरुवार देर रात अपने गवरी नगर (पाली) स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। शुक्रवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया। प्रदेश के अनेक कला प्रेमियों और नागरिकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
आठ दशकों का लंबा संगीतमय सफर
अपने अंतिम समय में वे अपनी बहू सुंदरदेवी और पोती नीतू को अपनी इस समृद्ध मांड गायकी की अमूल्य विरासत सौंपकर इस दुनिया से विदा हुईं। गवरी देवी अपने पीछे 5 बेटों और 1 बेटी सहित पूरा भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
बाड़मेर के कोरण गांव से शुरू हुआ सफर
अपने माता-पिता को गाते हुए देखकर और उनसे प्रेरणा लेकर ही उन्होंने मांड गायकी की बारीकियों को सीखा और इसे अपने जीवन का ध्येय बना लिया।
बाद में वे पाली आ गईं, जहां उनके संगीत के प्रति सम्मान को देखते हुए उनके नाम पर गवरी नगर बसाया गया, जिसमें उनका घर स्थित है।
प्रसिद्ध मांड गीत और भजन
उनके सबसे प्रसिद्ध मांड गीतों में शामिल हैं:
केसरिया बालम पधारो म्हारे देस...
ढोला थारे देश में...
मारे बोले रे मलजी...
जियो रे घनावर...
मांड गीतों के अलावा भक्ति संगीत (भजनों) में भी उनकी गहरी पैठ थी। उनके गाए लोकप्रिय भजनों में प्रमुख हैं:
मैं तो लियो सांवरिया...
मस्ताना रे मस्ती में...
थारे रे कारण जिवड़ा...
पुनागर माताजी री लाल...
दूरदर्शन और रेडियो की सेलिब्रिटी सिंगर
दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) पर उनके कार्यक्रम नियमित रूप से प्रसारित होते थे, जिन्हें सुनने के लिए लोग उत्सुक रहते थे। संगीत के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें जवाहर कला केंद्र, दूरदर्शन और वीर दुर्गादास राठौड़ लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका था।
क्या है मांड गायन शैली
प्रसिद्ध मारवाड़ी गीत 'केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश' की भी गायन शैली मांड ही है। यह राजस्थान का राज्य गीत भी है। ज्ञात हो 10 वीं 11 वीं शताब्दी में राजस्थान का जैसलमेर क्षेत्र माण्ड क्षेत्र कहलाता था।
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