झुग्गी बस्ती से मिला IAS बनने का लक्ष्य, AIR-743 से 19 तक पहुंचे विभोर भारद्वाज
Saurabh Mishra | Sept 23, 2026, 16:37 IST
विभोर भारद्वाज
बुलंदशहर के गांव से निकले विभोर भारद्वाज ने घर से UPSC की तैयारी की थी। तीसरे में AIR-19 हासिल कर आईएएस बने। फिलहाल वे जयपुर में असिस्टेंट कलेक्टर अंडर ट्रेनिंग हैं।
बड़े सपने सिर्फ बड़े शहरों में नहीं देखे जाते। बुलंदशहर के छोटे से गांव से निकले विभोर भारद्वाज ने भी आईएएस बनने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए लगातार खुद को बेहतर किया। पहली कोशिश में उन्हें रेलवे में नौकरी मिली, लेकिन मंजिल तो IAS थी। दूसरी बार इंटरव्यू तक पहुंचकर भी सेलेक्शन नहीं हुआ। इस नाकामी ने उन्हें रोकने के बजाय अपनी कमियां सुधारने का मौका दिया। द तंत्र में आज आईएएस विभोर की सफलता के बारे में बात करेंगे।
तीसरी कोशिश में मेहनत रंग लाई और विभोर ने यूपीएसी सीएसई-2024 में ऑल इंडिया 19वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया। उनका सफर बताता है कि UPSC में एक असफल कोशिश कहानी का अंत नहीं होता, बल्कि अगली कोशिश को बेहतर बनाने की शुरुआत भी हो सकता। राजस्थान कैडर के विभोर फिलहाल जयपुर में असिस्टेंट कलेक्टर (अंडर ट्रेनिंग) के तौर पर प्रशासनिक काम की बारीकियां सीख रहे।
![IAS- विभोर]()
विभोर भारद्वाज मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की अनूपशहर तहसील के खालौर गांव से हैं। परिवार बाद में शिकारपुर तहसील के उटरावली गांव में रहने लगा था। पिता सतीश चंद्र मैकेनिकल इंजीनियर हैं और मां हाउसवाइफ। विभोर की शुरुआती पढ़ाई गांव में हुई थी। इसके बाद उन्होंने शिकारपुर के सूरजभान सरस्वती विद्या मंदिर से आगे की पढ़ाई की।
हाईस्कूल में 88 फीसदी और 12वीं में 91 फीसदी अंक हासिल किए। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वो ग्रेजुएशन के लिए दिल्ली पहुंचे। दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद इसी विषय में ही मास्टर्स डिग्री ली।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के दौरान में ही विभोर नेशनल सर्विस स्कीम यानी NSS से जुड़े। इस दौरान उन्हें यमुना खादर की झुग्गी बस्तियों में लोगों के बीच काम करने का मौका मिला। यमुना की सफाई जैसे अभियानों में भी हिस्सा लिया। लोगों से मिलते हुए उन्हें महसूस हुआ कि बड़े स्तर पर बदलाव लाने के लिए सिस्टम का हिस्सा बनना जरूरी। यहीं से सिविल सर्विस में जाने का विचार मजबूत हुआ।
एमएससी के आखिरी सेमेस्टर में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की तैयारी शुरू कर दी। साल 2021 में ऑनलाइन कोचिंग ली और घर से ही तैयारी का आगाज किया।
![विभोर भारद्वाज]()
विभोर ने 2022 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी। पहली कोशिश में AIR-743 मिली और इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस(IRMS) में सेलेक्शन हो गया। सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने UPSC की तैयारी नहीं छोड़ी। उनका लक्ष्य आईएएस था।
अगली कोशिश में वे प्री और मेंस परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सके। इस नतीजे के बाद उन्होंने नए सिरे से पूरी तैयारी बदलने के बजाय अपनी कमजोरियां तलाशीं। जिन विषयों में नंबर कम थे, उन पर ज्यादा काम किया।
विभोर भारद्वाज को तीसरे प्रयास में मेहनत का नतीजा मिला। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में उन्होंने ऑल इंडिया 19वीं रैंक हासिल की। उन्हें लिखित परीक्षा में 824 और इंटरव्यू में 193 अंक मिले। कुल स्कोर 1017 रहा। इस रैंक के साथ उनका आईएएस में चयन हुआ और राजस्थान कैडर मिला। विभोर की इस यात्रा में तीन अलग नतीजे रहे। पहले प्रयास में AIR-743 और रेलवे की नौकरी मिली। दूसरे में इंटरव्यू तक पहुंचे। तीसरी कोशिश में AIR-19 के साथ IAS बनने का लक्ष्य पूरा किया।
विभोर ने ग्रेजुएशन और मास्टर्स दोनों फिजिक्स विषय में किए थे, इसी वजह से उन्होंने यूपीएससी में फिजिक्स को ऑप्शनल विषय के तौर पर चुना। वे करीब पांच साल से इस विषय को पढ़ रहे थे। इसलिए नए विषय पर समय लगाने के बजाय, जिस सबजेक्ट में मजबूत थे, उसके साथ आगे बढ़े। तैयारी में उन्होंने तीन चीजों को सबसे ज्यादा अहमियत दी थी- सिलेबस, रिवीजन और पिछले सालों के सवाल यानी PYQs।
जनरल स्टडीज के लिए कोचिंग ली और अपने नोट्स बनाए। करेंट अफेयर्स की अलग से भारी-भरकम नोटबुक बनाने के बजाय नई जानकारी को उसी टॉपिक के नोट्स में जोड़ते गए। उनका फोकस ज्यादा मैटेरियल जमा करने के बजाय पढ़ी हुई चीजों को बार-बार दोहराने पर रहा।
तैयारी के शुरुआती दिनों में विभोर रोजाना करीब 10 से 12 घंटे पढ़ते थे। लेकिन वे तैयारी को केवल पढ़ाई के घंटों से जोड़कर नहीं देखते। उनका मानना है कि 12 या 16 घंटे पढ़ने का टारगेट लेकर बैठने से दबाव बढ़ सकता। इसलिए उन्होंने घंटों के बजाय रोज का काम तय किया।
कितने टॉपिक पढ़ने हैं और कितना रिवीजन करना है, इस पर फोकस रखा। उनके मुताबिक UPSC कोई छोटी दौड़ नहीं। लंबे समय तक तैयारी में बने रहने के लिए ब्रेक लेना और अपनी पसंद के काम करना भी जरूरी है। विभोर को गिटार बजाना, संगीत सुनना और बगीचे में घूमना पसंद है।
विभोर ने इंटरव्यू की तैयारी में टेक्नोलॉजी की भी मदद ली। उन्होंने Gemini जैसे एआई टूल्स का इस्तेमाल मॉक इंटरव्यू और संभावित सवालों की प्रैक्टिस के लिए किया। हालांकि उनकी तैयारी का आधार एआई नहीं था। सिलेबस की समझ, खुद के नोट्स, PYQs, रिवीजन और लगातार अपनी कमियों पर काम करना उनकी रणनीति का मुख्य हिस्सा रहा।
विभोर भारद्वाज की तैयारी सिर्फ लंबे समय तक किताबों के सामने बैठने पर टिकी नहीं थी। उन्होंने अपने लिए एक तरीका बनाया और हर प्रयास के बाद उसमें जरूरी बदलाव किए। AIR-743 से AIR-19 तक पहुंचने के उनके सफर में पांच बातें लगातार उनकी तैयारी का हिस्सा रहीं।
घंटे नहीं गिने, रोज का टारगेट बनाया: विभोर ने शुरुआत में रोज 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई की, लेकिन वे 12 या 16 घंटे पढ़ने को सफलता का पैमाना नहीं मानते। उनका फोकस इस बात पर रहता था कि दिन के लिए तय टॉपिक और रिवीजन पूरा हुआ या नहीं।
सिलेबस और PYQs को बनाया आधार:उनकी तैयारी का बड़ा हिस्सा यूपीएससी के सिलेबस और पिछले वर्षों के सवालों यानी PYQs के आसपास रहा। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि किस टॉपिक को कितना पढ़ना है और परीक्षा में किस तरह के सवाल पूछे जाते हैं।
हर प्रयास के बाद कमियां पहचानीं: पहले प्रयास में AIR-743 के साथ रेलवे में चयन हुआ। दूसरे प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं मिली। इसके बाद पूरी रणनीति बदलने के बजाय उन्होंने अपनी कमजोरियां पहचानीं और उन्हीं हिस्सों पर ज्यादा मेहनत की। तीसरे प्रयास में AIR-19 हासिल हुई।
विभोर का सफर हर उस युवा के लिए सीख है, जो किसी बड़े लक्ष्य की तैयारी कर रहा। एक कोशिश में सफलता न मिले तो रुकने के बजाय अपनी कमियां पहचानें, उनसे सीखें और अगली कोशिश पहले से बेहतर करें।
यह खबरें भी पढ़ें...
पिता को मिले ताने, भाई ने छोड़ा अपना सपना; अर्नव ने 21 साल में IAS बन पूरी की दोनों की जिद
8वीं क्लास में रोशनी गई, फिर भी नहीं छोड़ा सपना; IAS मनु गर्ग से सीखें जीत का जज्बा
तीन बार असफलता, चौथी कोशिश में AIR-251: IAS आराधना चौहान की जिंदगी की 5 बड़ी सीख
राजस्थान एलडीसी भर्ती का रिजल्ट जल्द, 27-28 सितंबर को जारी होने की संभावना
तीसरी कोशिश में मेहनत रंग लाई और विभोर ने यूपीएसी सीएसई-2024 में ऑल इंडिया 19वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया। उनका सफर बताता है कि UPSC में एक असफल कोशिश कहानी का अंत नहीं होता, बल्कि अगली कोशिश को बेहतर बनाने की शुरुआत भी हो सकता। राजस्थान कैडर के विभोर फिलहाल जयपुर में असिस्टेंट कलेक्टर (अंडर ट्रेनिंग) के तौर पर प्रशासनिक काम की बारीकियां सीख रहे।
IAS- विभोर
विभोर का गांव से निकलकर IAS बनने का सफर
हाईस्कूल में 88 फीसदी और 12वीं में 91 फीसदी अंक हासिल किए। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वो ग्रेजुएशन के लिए दिल्ली पहुंचे। दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद इसी विषय में ही मास्टर्स डिग्री ली।
NSS से आया सिविल सर्विस का ख्याल
एमएससी के आखिरी सेमेस्टर में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की तैयारी शुरू कर दी। साल 2021 में ऑनलाइन कोचिंग ली और घर से ही तैयारी का आगाज किया।
विभोर भारद्वाज
पहली कोशिश में विभोर को मिली थी रेलवे की नौकरी
अगली कोशिश में वे प्री और मेंस परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सके। इस नतीजे के बाद उन्होंने नए सिरे से पूरी तैयारी बदलने के बजाय अपनी कमजोरियां तलाशीं। जिन विषयों में नंबर कम थे, उन पर ज्यादा काम किया।
विभोर तीसरे प्रयास में बने IAS
फिजिक्स को ही विभोर ने बनाया था ऑप्शनल
जनरल स्टडीज के लिए कोचिंग ली और अपने नोट्स बनाए। करेंट अफेयर्स की अलग से भारी-भरकम नोटबुक बनाने के बजाय नई जानकारी को उसी टॉपिक के नोट्स में जोड़ते गए। उनका फोकस ज्यादा मैटेरियल जमा करने के बजाय पढ़ी हुई चीजों को बार-बार दोहराने पर रहा।
विभोर ने क्वांटिटी के बजाए क्वालिटी पर जोर दिया
कितने टॉपिक पढ़ने हैं और कितना रिवीजन करना है, इस पर फोकस रखा। उनके मुताबिक UPSC कोई छोटी दौड़ नहीं। लंबे समय तक तैयारी में बने रहने के लिए ब्रेक लेना और अपनी पसंद के काम करना भी जरूरी है। विभोर को गिटार बजाना, संगीत सुनना और बगीचे में घूमना पसंद है।
इंटरव्यू में AI को भी बनाया मददगार
विभोर के सफर से युवा तीन बातें सीख सकते
घंटे नहीं गिने, रोज का टारगेट बनाया: विभोर ने शुरुआत में रोज 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई की, लेकिन वे 12 या 16 घंटे पढ़ने को सफलता का पैमाना नहीं मानते। उनका फोकस इस बात पर रहता था कि दिन के लिए तय टॉपिक और रिवीजन पूरा हुआ या नहीं।
सिलेबस और PYQs को बनाया आधार:उनकी तैयारी का बड़ा हिस्सा यूपीएससी के सिलेबस और पिछले वर्षों के सवालों यानी PYQs के आसपास रहा। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि किस टॉपिक को कितना पढ़ना है और परीक्षा में किस तरह के सवाल पूछे जाते हैं।
हर प्रयास के बाद कमियां पहचानीं: पहले प्रयास में AIR-743 के साथ रेलवे में चयन हुआ। दूसरे प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं मिली। इसके बाद पूरी रणनीति बदलने के बजाय उन्होंने अपनी कमजोरियां पहचानीं और उन्हीं हिस्सों पर ज्यादा मेहनत की। तीसरे प्रयास में AIR-19 हासिल हुई।
विभोर का सफर हर उस युवा के लिए सीख है, जो किसी बड़े लक्ष्य की तैयारी कर रहा। एक कोशिश में सफलता न मिले तो रुकने के बजाय अपनी कमियां पहचानें, उनसे सीखें और अगली कोशिश पहले से बेहतर करें।
यह खबरें भी पढ़ें...
पिता को मिले ताने, भाई ने छोड़ा अपना सपना; अर्नव ने 21 साल में IAS बन पूरी की दोनों की जिद
8वीं क्लास में रोशनी गई, फिर भी नहीं छोड़ा सपना; IAS मनु गर्ग से सीखें जीत का जज्बा
तीन बार असफलता, चौथी कोशिश में AIR-251: IAS आराधना चौहान की जिंदगी की 5 बड़ी सीख
राजस्थान एलडीसी भर्ती का रिजल्ट जल्द, 27-28 सितंबर को जारी होने की संभावना
खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की VC पर सोशल मीडिया पोस्ट से विवाद, यूनिवर्सिटी ने आरोपों को बताया भ्रामक
By Umeshwari Baghel
त्योहार से पहले नहीं हटेगी स्ट्रीट वेंडर्स की दुकान, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बनेगा ढाल, जानें कैसे
By Manya Jain
रूस ने यूक्रेन में भारतीय कारोबारी की दवा फैक्ट्री पर किया ड्रोन हमला, 400 करोड़ का नुकसान
By Ashish Bhardwaj
विधायकों के आलीशान 4 बीएचके फ्लैट का नक्शा तैयार, भूपेश बघेल की योजना को अब मिलेगा आकार
By Arun Tiwari
RBSE ने लिया बड़ा फैसला, अब साल में दो बार होगी दसवीं की परीक्षा, जानें क्या किया गया है बदलाव?
By Jageshwar prasad
कूनो में फिर गूंजी किलकारी: भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने दिया 5 शावकों को जन्म, देश में चीतों की संख्या 60 पहुंची
By Arohi Raj
संगठित अपराध और ड्रोन तस्करी पर DGP का बड़ा बयान, पुलिसिंग में बढ़ी महिला भागीदारी
By Jyoti Mahender Bhardwaj