476 करोड़ का अनुबंध, फिर भी नहीं सुधरी जयपुर डिस्कॉम की हालत
Ashish Bhardwaj | Jun 21, 2026, 11:51 IST
Photograph: (the sootr)
जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में 6 महीने में 2 लाख से अधिक बिजली शिकायतें आईं। 476 करोड़ के अनुबंध पर काम कर रही FRT कंपनी पर केवल 13.65 लाख पेनल्टी लगी। कागजी निस्तारण और कम संसाधन बड़ी समस्या।
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में 6 महीनों में 2 लाख से अधिक बिजली फॉल्ट शिकायतें दर्ज हुईं।
- फॉल्ट सुधार का 476 करोड़ का ठेका होने के बावजूद समय पर बिजली बहाल नहीं हो रही।
- शिकायतों के बाद भी कई मामलों में सिस्टम में समाधान दिखाकर फाइलें बंद की जा रही हैं।
- 90 मिनट में शहर, 2 घंटे में शहरी क्षेत्र और 4 घंटे में ग्रामीण सुधार का नियम लागू है।
- वैशाली नगर, झोटवाड़ा, विद्याधर नगर समेत कई इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
6 महीने में 2 लाख शिकायतें
476 करोड़ का ठेका, पर नतीजा क्या
लेकिन इतने बड़े अनुबंध के बावजूद दो महीनों में कंपनी पर केवल 13.65 लाख रुपए की पेनल्टी लगाई गई है। यह आंकड़ा शिकायतों की तादाद के मुकाबले बेहद कम है।
कितनी टीमें, कितना काम
जयपुर शहर में एलटी यानी लो टेंशन के 37 और एचटी यानी हाई टेंशन के 8 सब-डिवीजन हैं। इनके लिए केवल 58 एफआरटी टीमें और 58 वाहन तैनात हैं। यानी टीमों की संख्या शिकायतों के अनुपात में बहुत कम है।
कागजों में बंद, जमीन पर खुली शिकायतें
एचटी लाइन का काम भी अधूरा
इन इलाकों में सबसे अधिक परेशानी
बढ़ती आबादी और बिजली की बढ़ती मांग के बीच एफआरटी संसाधनों की समीक्षा और जवाबदेही तय करने की मांग अब तेज होती जा रही है।
FAQ
- जयपुर डिस्कॉम में बिजली फॉल्ट की शिकायत कितने समय में दूर होनी चाहिए?
टेंडर शर्तों के अनुसार जयपुर शहर में 90 मिनट, अन्य शहरी क्षेत्रों में 2 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 4 घंटे में बिजली बहाल करना अनिवार्य है। यह जिम्मेदारी निजी कंपनी की एफआरटी टीमों पर है। हालांकि शिकायतें बताती हैं कि यह समय सीमा अक्सर नहीं मानी जाती। - FRT क्या होती है और इसे किसने चलाने का ठेका लिया है?
एफआरटी यानी फॉल्ट रिपेयर टीम बिजली फॉल्ट को मौके पर जाकर ठीक करने वाली टीम होती है। जयपुर डिस्कॉम ने यह काम संध्या एंड कंपनी जेवी को सौंपा है। इस कंपनी को 476.39 करोड़ रुपए का चार साल का अनुबंध दिया गया है। - जयपुर में बिजली फॉल्ट की शिकायत कैसे करें?
जयपुर डिस्कॉम की हेल्पलाइन पर कॉल करके या मोबाइल ऐप के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत दर्ज होने पर एक नंबर मिलता है जिससे स्थिति ट्रैक होती है। हालांकि मौजूदा व्यवस्था में कई शिकायतें बिना समाधान के ही सिस्टम में बंद दिखा दी जाती हैं।
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