पेपर से पहले सेंटर का ‘टेस्ट’ कौन करता है? जयपुर में बार-बार फेल हो रहे इंतजाम
Raghvendra Singh Rathore | Sept 23, 2026, 18:13 IST
पेपर से पहले सेंटर का टेस्ट?
जयपुर में 22 दिनों के भीतर चार बड़ी परीक्षाओं के इंतजाम बिगड़े। सीतापुरा के एक ही सेंटर पर लगातार दो दिन पावर फेल हुआ, जबकि नियमों में प्री-एग्जाम ऑडिट और फाइनल मॉक ड्रिल का प्रावधान है। जिम्मेदारी को लेकर सवाल बरकरार?
समझें क्या है मामला
- पेपर से पहले सेंटर का टेस्ट कौन करता है, बड़ा सवाल
- 22 दिन में 4 बड़ी परीक्षाओं के इंतजाम फेल हुए
- एक ही सेंटर पर दो दिन लगातार पावर फेल
- मॉक ड्रिल के बावजूद क्यों बैठ गया पूरा सिस्टम
- सीतापुरा सेंटर को किसने दी थी ऑल ओके रिपोर्ट
पिछली चार बड़ी घटनाओं को जोड़कर देखें तो तस्वीर गंभीर है। 22 अगस्त को AIAPGET, 30 अगस्त को NEET-PG, 31 अगस्त को AIIMS CRE-5 और 13 सितंबर को SET-2026 की परीक्षा जयपुर में प्रभावित हुई।
लेकिन द सूत्र की पड़ताल में इससे बड़ा सवाल सामने आया है। बड़ी कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के लिए सेंटर को सीधे परीक्षा के दिन नहीं खोला जाता। परीक्षा से पहले सेंटर का ऑडिट, पावर बैकअप की जांच और मॉक ड्रिल जैसी व्यवस्थाएं तय हैं। NEET-PG कराने वाली NBEMS की शर्तों में तो वास्तविक परीक्षा से एक दिन पहले सभी सेंटरों पर एक साथ फाइनल मॉक ड्रिल तक का प्रावधान है।
इसके बावजूद जयपुर में इंतजाम परीक्षा के दिन कैसे फेल हो गए?
22 अगस्त: बिजली गई, बैकअप जनरेटर में भी आई दिक्कत
घटना के बाद जयपुर सिटी ईस्ट के एडीएम नरेंद्र वर्मा ने बताया था कि सुबह करीब 10:30 बजे बिजली बाधित हुई और समस्या करीब 30 से 45 मिनट रही। बैकअप के लिए जनरेटर चलाने की कोशिश की गई, लेकिन उसमें भी समस्या आ गई।
मामले में परीक्षा कराने वाली एजेंसी Eduquity Career Technologies Pvt Ltd पर कार्रवाई हुई। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कंपनी का एम्पैनलमेंट तत्काल प्रभाव से निलंबित कर कारण बताओ नोटिस दिया। प्रभावित 49 अभ्यर्थियों की परीक्षा 1 सितंबर को दूसरे सेंटर पर दोबारा कराई गई।
यहीं पहला सवाल उठा— मुख्य बिजली जाने पर अगर जनरेटर भी काम नहीं आया तो परीक्षा से पहले बैकअप व्यवस्था की जांच में यह कमी क्यों नहीं पकड़ी गई?
30 अगस्त: सीतापुरा में 2,445 अभ्यर्थियों की परीक्षा अटकी
30 अगस्त को NEET-PG-2026 के लिए सीतापुरा स्थित iON Digital Zone के टेस्ट सेंटर नंबर 41682 और 41683 पर परीक्षा चल रही थी। यहां इंटरनल पावर सप्लाई की समस्या के कारण 2,445 अभ्यर्थी परीक्षा पूरी नहीं कर सके।
केंद्र सरकार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में इस इंटरनल पावर सप्लाई की समस्या को परीक्षा कराने वाली एजेंसी TCS Ltd. से जुड़ा बताया गया। प्रभावित सभी 2,445 अभ्यर्थियों के लिए 5 सितंबर को जयपुर में दोबारा परीक्षा कराई गई।
मामले की जांच के लिए राजस्थान की प्रमुख सचिव स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई। लेकिन इसके अगले ही दिन जो हुआ, उसने सेंटर की प्री-एग्जाम जांच पर और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
31 अगस्त: वही जगह, दूसरी परीक्षा और फिर पावर फेल
इन दोनों सेंटरों पर 2 हजार अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक RJ0101 पर 1,342 और RJ0102 पर 436 यानी कुल 1,778 अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंचे थे।
AIIMS ने दोनों सेंटरों की परीक्षा रद्द कर दी और 7 सितंबर को दोबारा परीक्षा कराई। साथ ही TCS से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। सिस्टम लॉग, सीसीटीवी फुटेज और कंट्रोल रूम कम्युनिकेशन सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए।
जिस जगह 30 अगस्त को इंटरनल पावर सप्लाई ने NEET-PG रोक दिया, वही जगह 24 घंटे बाद दूसरी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के लिए कैसे तैयार मानी गई?
TCS ने माना दोनों दिन एक ही सेंटर पर हुआ इंटरनल पावर फेलियर
कंपनी ने इसे स्थानीय स्तर की अज्ञात इलेक्ट्रिकल समस्या बताया था। इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस के लिए जिम्मेदार वेंडर की विशेषज्ञ टीम को समस्या ठीक करने में लगाने और ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए कदम उठाने की बात भी कही गई थी। लेकिन यही बयान एक नया सवाल पैदा करता है।
अगर 30 अगस्त को इलेक्ट्रिकल समस्या का पता चल चुका था तो 31 अगस्त की परीक्षा शुरू होने से पहले सेंटर की दोबारा जांच किस स्तर पर हुई?
नियम: परीक्षा से पहले सिर्फ एक नहीं, कई स्तर पर जांच
परीक्षा एजेंसी को टेस्ट सेंटर पर उपयुक्त हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, फायरवॉल और LAN की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है। प्रत्येक सेंटर पर कम से कम 10 प्रतिशत अतिरिक्त कंप्यूटर सिस्टम रखने का प्रावधान है।
सबसे महत्वपूर्ण शर्त बिजली को लेकर है। सेंटर पर 3-टियर इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई के साथ परीक्षा की अवधि के लिए यूपीएस और जनरेटर बैकअप उपलब्ध होना चाहिए।
इतना ही नहीं, परीक्षा एजेंसी को सेंटर का प्री-एग्जाम ऑडिट करना होता है। इसमें हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के साथ यूपीएस और जनरेटर की वर्किंग कंडीशन भी जांची जानी है।
यानी सीतापुरा में जिस व्यवस्था ने परीक्षा के दिन जवाब दिया, उसी पावर बैकअप की स्थिति प्री-एग्जाम ऑडिट में जांची जानी थी।
परीक्षा से एक दिन पहले भी होना था ‘फाइनल टेस्ट’
इस दौरान परीक्षा के दिन इस्तेमाल होने वाले सभी कंप्यूटरों के साथ बफर कंप्यूटरों को भी डमी रोल नंबर से लॉग-इन कर वास्तविक परीक्षा जैसी स्थिति तैयार करनी होती है।
इस फाइनल मॉक ड्रिल की रिपोर्ट NBEMS को जमा करने का भी प्रावधान है। यानी NEET-PG से एक दिन पहले सीतापुरा सेंटर भी उस व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए था। ऐसे में सवाल और सीधा हो जाता है—
अगर मॉक ड्रिल में सेंटर तैयार था तो अगले दिन 2,445 अभ्यर्थियों के सामने इंटरनल पावर सिस्टम कैसे फेल हो गया?
NBEMS का अप्रेजर भी करता है प्री-टेस्ट विजिट
NBEMS के अप्रेजर की चेकलिस्ट में भी साफ तौर पर यूपीएस और जनरेटर सहित उचित पावर बैकअप उपलब्ध होने की पुष्टि करना शामिल है।
बार-बार न्यूनतम मानक पूरे नहीं करने वाले सेंटरों को भविष्य की NBEMS परीक्षाओं के लिए ब्लैकलिस्ट करने तक का प्रावधान है।
इस तरह परीक्षा से पहले तीन महत्वपूर्ण स्तर सामने आते हैं—
फिर भी सीतापुरा में परीक्षा के दिन सिस्टम बैठ गया।
किसने किया था सीतापुरा को ‘ओके’? सार्वजनिक रिकॉर्ड में जवाब नहीं
यह भी स्पष्ट नहीं है कि 30 अगस्त की घटना के बाद अगले दिन AIIMS CRE शुरू होने से पहले सेंटर की इलेक्ट्रिकल फिटनेस किस स्तर पर दोबारा जांची गई।
यानी नियम और जांच की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन उस जांच की रिपोर्ट और जिम्मेदारी सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं है।
SET: कंप्यूटर नहीं, इस बार पेपर पहुंचाने का सिस्टम फेल
पिंकसिटी एकेडमी में प्रश्नपत्र करीब आधा घंटा देर से पहुंचा। परीक्षा प्रशासन की ओर से इसकी वजह परीक्षा सामग्री लेकर जा रही टीम का ट्रैफिक में फंसना बताया गया।
लेकिन यहां भी सवाल प्री-एग्जाम प्लानिंग पर ही है।
सुबह 11 बजे पेपर शुरू होना था तो गोपनीय परीक्षा सामग्री कितने समय पहले रवाना की गई? जयपुर जैसे शहर में ट्रैफिक के लिए कितना बफर टाइम रखा गया? और एक वाहन के ट्रैफिक में फंसने से 1,008 अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा की नौबत कैसे आ गई?
अब इन अभ्यर्थियों की परीक्षा 27 सितंबर को नए सेंटरों पर होगी। सेंटर कोड 4057 के अभ्यर्थियों के लिए राजस्थान कॉलेज और 4066 के लिए राजस्थान विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग को नया केंद्र बनाया गया है।
जयपुर पर परीक्षा का कितना भार?
प्रदेशभर में SET के लिए 1 लाख 77 हजार 901 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे। इनमें अकेले जयपुर में 78 हजार 617 अभ्यर्थियों के लिए 171 परीक्षा केंद्र बनाए गए। जयपुर में 60 हजार 94 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। यानी एक ही दिन शहर में 60 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों की परीक्षा संभालनी पड़ी।
इतने बड़े परीक्षा भार के बीच सेंटर चुनने से लेकर बिजली, तकनीकी संसाधन, स्टाफ और गोपनीय सामग्री पहुंचाने तक हर कड़ी की क्षमता महत्वपूर्ण हो जाती है।
22 दिन की टाइमलाइन
30 अगस्त — NEET-PG: सीतापुरा iON Digital Zone में इंटरनल पावर फेल, 2,445 अभ्यर्थियों का री-एग्जाम। तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनी।
31 अगस्त — AIIMS CRE-5: उसी सीतापुरा iON Digital Zone में फिर इंटरनल पावर समस्या, दोनों सेंटरों की परीक्षा रद्द; 2 हजार रजिस्टर्ड अभ्यर्थियों के लिए री-एग्जाम।
13 सितंबर — SET 2026: जयपुर और चौमूं के दो सेंटरों पर प्रश्नपत्र देर से पहुंचा, 1,008 अभ्यर्थियों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला।
गलती के बाद री-एग्जाम, लेकिन कीमत कौन चुका रहा?
लेकिन री-एग्जाम का मतलब अभ्यर्थी के लिए फिर सेंटर तक यात्रा, समय और तैयारी है। परीक्षा कराने वाली संस्था के लिए भी सेंटर, स्टाफ, सुरक्षा और दूसरी व्यवस्थाओं पर दोबारा खर्च होता है।
AIAPGET में एजेंसी पर कार्रवाई सामने आई। NEET-PG में जांच कमेटी बनी। AIIMS ने TCS से रिपोर्ट और डिजिटल रिकॉर्ड मांगे। SET में नए सेंटर तय कर दिए गए।
लेकिन इन री-एग्जाम पर कुल कितना अतिरिक्त खर्च आया और जिम्मेदार एजेंसी या सेंटर से कितनी राशि वसूली गई, इसका पुष्ट सार्वजनिक आंकड़ा सामने नहीं है।
मौके पर भी जवाब नहीं
सार्वजनिक रिकॉर्ड में भी सीतापुरा सेंटर की प्री-टेस्ट विजिट रिपोर्ट, प्री-एग्जाम ऑडिट रिपोर्ट और परीक्षा से एक दिन पहले हुई फाइनल मॉक ड्रिल की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं मिली।
सवाल बिजली जाने का नहीं, ‘ऑल ओके’ मिलने का है
AIAPGET में मुख्य बिजली के बाद जनरेटर भी परेशानी में आया। NEET-PG में इंटरनल पावर सप्लाई फेल हुई। अगले ही दिन उसी जगह AIIMS CRE में फिर पावर की समस्या हुई। SET में प्रश्नपत्र पहुंचाने की योजना समय पर काम नहीं कर सकी।
दूसरी तरफ नियम बताते हैं कि सेंटर पर पावर बैकअप जांचने से लेकर प्री-एग्जाम ऑडिट और फाइनल मॉक ड्रिल तक की व्यवस्था है।
इसलिए सवाल यह नहीं कि परीक्षा के दिन सिस्टम क्यों फेल हुआ?
असली सवाल है -
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