672 में से 529 नियुक्तियां संदिग्ध, लिपिक भर्ती में फर्जी दस्तावेजों से मिली नौकरी
Ashish Bhardwaj | May 26, 2026, 13:25 IST
Clerk Recruitment Photograph: (The sootr)
राजस्थान के जयपुर कनिष्ठ लिपिक 2013 भर्ती घोटाले में 529 नियुक्तियां संदिग्ध मिलीं है। इस भर्ती में फर्जी दस्तावेज और बोनस अंक देकर नौकरी देने का खुलासा हुआ है।
News In Short
- जयपुर कनिष्ठ लिपिक भर्ती घोटाले में 529 नियुक्तियां संदिग्ध पाई गईं।
- जांच में फर्जी दस्तावेज और गलत बोनस अंक देकर सरकारी नौकरी देने का खुलासा हुआ।
- 22 अभ्यर्थियों ने आवेदन नहीं किया, फिर भी उन्हें मेरिट सूची में शामिल किया गया।
- 88 अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र अमान्य शिक्षण संस्थानों के पाए गए।
- राज्य स्तरीय जांच के बाद अब पूरे राजस्थान में भर्ती प्रक्रिया की जांच की मांग तेज हो गई है।
News In Detail
इस मामले ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कई अभ्यर्थियों ने ऐसे विश्वविद्यालयों और संस्थानों के प्रमाण-पत्र लगाए जिन्हें सुप्रीम कोर्ट पहले ही अमान्य घोषित कर चुका है।
फर्जी दस्तावेजों से मिली सरकारी नौकरी
भर्ती में सीनियर सेकंडरी (12वीं) के अंकों का 70 प्रतिशत भार रखा गया था, जबकि बाकी अंक अनुभव के आधार पर दिए गए। जांच में सामने आया कि कई अभ्यर्थियों ने फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और अमान्य कंप्यूटर डिग्रियों का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल कर ली।
भर्ती घोटाले में सामने आया यह फर्जीवाड़ा:
अमान्य कंप्यूटर डिग्री
बोनस अंकों में हेराफेरी
मेरिट सूची में नियम विरुद्ध बदलाव
बिना आवेदन किए अभ्यर्थियों का चयन
ऑनलाइन रिकॉर्ड और दस्तावेज गायब
बिना आवेदन किए भी मिल गई नौकरी
जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 22 अभ्यर्थियों ने आवेदन तक नहीं किया था, फिर भी उनके नाम मेरिट सूची में शामिल कर दिए गए।
इसके अलावा 48 अभ्यर्थियों को मेरिट सूची से बाहर होने के बावजूद नियुक्ति दे दी गई। यह मामला भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर मिलीभगत और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
अमान्य संस्थानों के प्रमाण-पत्र भी स्वीकार
10 अभ्यर्थियों की सीनियर सेकंडरी अंकतालिकाएं राजस्थान बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं मिलीं। इससे दस्तावेजों की सत्यता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
बोनस अंक घोटाले में सबसे बड़ा खेल
239 अभ्यर्थियों ने एक ही समय में अलग-अलग जिला परिषदों से अनुभव प्रमाण-पत्र लेकर अतिरिक्त लाभ प्राप्त किया। जबकि नियमों के अनुसार यह लाभ केवल एक संस्था से ही मान्य होता है।
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दस्तावेजों का रिकॉर्ड भी गायब
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में रिकॉर्ड गायब होना भर्ती प्रक्रिया में सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है।
पूरे राजस्थान में हो सकती है बड़ी जांच
अब संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार अन्य जिलों की भर्तियों की भी जांच कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो कई और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
FAQs
जयपुर कनिष्ठ लिपिक भर्ती 2013 घोटाला क्या है?
भर्ती घोटाले में सबसे बड़ी अनियमितता क्या मिली?
क्या पूरे राजस्थान में भर्ती जांच हो सकती है?
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