GI टैग से मोजड़ी की ग्लोबल उड़ान, 100 करोड़ के बाजार को मिलेगी नई ऊंचाई
Jageshwar prasad | Jul 10, 2026, 14:30 IST
जोधपुर मोजड़ी को GI टैग, 200 साल पुरानी कला को मिली वैश्विक पहचान
जोधपुर की पारंपरिक मोजड़ी को GI टैग संख्या 735 के तहत भौगोलिक संकेतक प्रमाणपत्र मिल गया। 5 साल की प्रक्रिया के बाद चेन्नई रजिस्ट्री ने सर्टिफिकेट जारी किया। 100 करोड़ के घरेलू बाजार के साथ निर्यात और कारीगरों को बड़ा बूस्ट मिलेगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- जोधपुर मोजड़ी को मिला GI टैग, दुनियाभर में मिलेगी पहचान, निर्यात को बढ़ावा।
- 200 साल पुरानी कला, अब GI टैग से 100 करोड़ के बाजार को मिलेगी नई उड़ान।
- बंधेज के बाद अब मोजड़ी, जोधपुरी साफा-जीरा भी GI टैग की कतार में।
- 5 साल की मेहनत रंग लाई, चेन्नई GI रजिस्ट्री ने जारी किया प्रमाणपत्र।
- आईआईटी जोधपुर के सहयोग से मिला पेटेंट, अब कारीगरों के दिन बहुरेंगे।
यह प्रमाणपत्र जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और ग्राम विकास सेवा संस्थान, पीपाड़ सिटी के नाम पर जारी हुआ है।
GI टैग मिलने से मारवाड़ की 200 साल पुरानी इस कला को देश-विदेश में विशिष्ट पहचान मिलेगी और स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार और निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे।
2021 में शुरू हुई थी प्रक्रिया
28 मार्च 2026 को चेन्नई स्थित GI रजिस्ट्री ने आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी किया। यह प्रमाणपत्र गुरुवार को हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और ग्राम विकास सेवा संस्थान को मिला।
चेन्नई रजिस्ट्री ने जारी किया मोजड़ी क्राफ्ट का GI सर्टिफिकेट
मारवाड़ की 200 साल पुरानी कला
एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत दिनेश ने बताया कि GI टैग से जोधपुर की पारंपरिक कला को देश-विदेश में पहचान मिलेगी। स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प उद्योग और निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। ई-कॉमर्स कंपनियां अब इसमें रुचि दिखाएंगी।
100 करोड़ का बाजार, निर्यात अभी सिर्फ 10 करोड़
GI टैग मिलने के बाद विदेशी बाजारों में मोजड़ी की प्रामाणिकता की गारंटी मिलेगी। जो नकली उत्पाद बेचे जा रहे थे, उन पर कानूनी रोक लग सकेगी। इससे निर्यात में कई गुना वृद्धि की उम्मीद है।
पहले पेटेंट, अब GI टैग से मिलेगा दोहरा फायदा
वे राजस्थान के पहले जूती निर्माता हैं जिन्हें यह पेटेंट मिला। अब मोजड़ी को GI टैग मिलने से ऐसे कारीगरों के लिए देशी और विदेशी बाजारों में नए द्वार खुलेंगे।
जोधपुर से अभी और GI टैग आने हैं
FAQ
- जोधपुर मोजड़ी को GI टैग क्यों दिया गया?
मोजड़ी मारवाड़ की 200 साल पुरानी पारंपरिक जूती शिल्पकला है। GI टैग इसकी भौगोलिक उत्पत्ति और विशिष्टता की कानूनी गारंटी देता है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, कारीगरों को उचित मान मिलेगा और निर्यात बढ़ेगा। - GI टैग से मोजड़ी कारीगरों को क्या फायदा होगा?
GI टैग मिलने से जोधपुरी मोजड़ी को वैश्विक बाजारों में प्रामाणिकता की पहचान मिलेगी। 100 करोड़ के घरेलू बाजार के साथ 10 करोड़ का निर्यात कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर मोजड़ी की मांग बढ़ेगी और कारीगरों की आमदनी में सुधार होगा।
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