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Photograph: (the sootr)
Kota. राजस्थान में किसी भी आम उपभोक्ता का एक महीने का भी बिल बकाया जा जाए तो बिजली निगम तुरंत कनेक्शन काट देता है या फिर बिजली चोरी पकड़ी जाती है तो लाखों का जुर्माना भी लगाता देता है। लेकिन कोटा में कांग्रेस के नेता प्रहलाद गुंजल से लेकर भाजपा के विधायक संदीप शर्मा और पूर्व मंत्री भवानी सिंह राजावात पर लाखों के बकाया बिल की वसूली ही स्थगित कर दी।
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बिजली बिलों की वसूली स्थगित होने से पैदा हुए सवाल
कोटा में केईडीएल (कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड) द्वारा 150 कनेक्शनों के 19.15 करोड़ रुपये की वसूली स्थगित किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इनमें कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल, भाजपा विधायक संदीप शर्मा और पूर्व मंत्री भवानी सिंह राजावत के भी बकाया बिल शामिल हैं। इन नेताओं के बिलों की वसूली स्थगित करने के कारण विभिन्न सवाल उठने लगे हैं, खासकर जब बिजली कंपनी ने वसूली के लिए "अन्य कारण" का हवाला दिया।
विवादित बकाया बिल: क्या है मामला?
केईडीएल की वसूली सूची में कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल का 41 लाख रुपये, भाजपा विधायक संदीप शर्मा का 8 लाख रुपये और पूर्व मंत्री भवानी सिंह राजावत का 17 लाख रुपये का बकाया बिल शामिल है। इन सभी मामलों में केईडीएल ने बकाया बिलों की वसूली स्थगित करने के लिए कोर्ट केस, पुराने डिस्प्यूट्स और "अन्य कारण" का हवाला दिया है। हालांकि सवाल यह है कि क्या इन बकाया बिलों की वसूली में राजनीतिक दबाव और रसूख का कोई रोल है?
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राजावत, गुंजल और शर्मा के बकाया बिल:
भवानी सिंह राजावत (पूर्व मंत्री, भाजपा नेता):
बकाया: ₹17 लाख
स्थिति: राजावत का कहना है कि वह आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और वह जल्द ही अपना बकाया भुगतान करेंगे।
प्रहलाद गुंजल (कांग्रेस नेता):
बकाया: ₹41 लाख
स्थिति: गुंजल का कहना है कि उनके पास कोई बकाया नहीं है और पिछले समय में ज्यादा बिल दिए जाने की वजह से उन्होंने जांच के लिए आवेदन किया है।
संदीप शर्मा (भा.ज.पा. विधायक):
बकाया: ₹8 लाख
स्थिति: शर्मा ने बताया कि उनके पास सभी बिलों की रसीद है और उन्हें कोई बकाया नहीं है।
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स्थगन की वजह और राजनीति का प्रभाव
पिछले कुछ समय से, कोटा में बिजली बिलों की वसूली को लेकर कड़े कदम उठाए जा रहे थे, लेकिन इन तीन नेताओं के बकाया बिलों के साथ वसूली स्थगित करना एक नया विवाद खड़ा कर रहा है। राजस्व के मुद्दे पर राजनीतिक दबाव और रसूख का असर स्पष्ट नजर आता है। विशेष रूप से, जब इन नेताओं के मामले में "अन्य कारण" को आधार बनाकर स्थगन किया गया, तो यह सवाल उठता है कि क्या उनके लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
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राजनीतिक जुड़ाव और उपेक्षित बिल
राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नेताओं के मामलों में वसूली को स्थगित करना, उपभोक्ताओं में असंतोष और सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। जब एक ओर सामान्य नागरिकों से समय पर बिल जमा करने की अपेक्षा की जाती है, तो दूसरी ओर इन नेताओं के मामलों में विशेष व्यवस्था क्यों की जा रही है, यह साफ नहीं है। यह परिदृश्य इस बात की ओर इशारा करता है कि राज्य में कुछ लोग अपनी राजनीतिक स्थिति के कारण सरकारी प्रक्रियाओं से बाहर हैं।
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निष्कर्ष और भविष्य की दिशा
यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक गहरा हो सकता है, यदि इन बकाया बिलों की वसूली को लेकर कोई स्पष्ट और निष्पक्ष निर्णय नहीं लिया जाता। राज्य सरकार और केईडीएल के लिए यह एक बड़ा चैलेंज होगा कि वे इस मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखें और सभी उपभोक्ताओं के साथ समान व्यवहार करें।
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मुख्य बिंदू :
- यह वसूली मुख्य रूप से कुछ नेताओं के बकाया बिलों के कारण स्थगित की गई है। इन मामलों में "अन्य कारण" का हवाला देते हुए वसूली को रोका गया।
- इन नेताओं के बकाया बिलों को स्थगित करने का कारण "अन्य कारण" बताया गया है, जो स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक दबाव और रसूख की संभावना से यह मामला जटिल हो गया है।
- वसूली फिर से शुरू करने के लिए इन नेताओं को अपना बकाया बिल जमा करना होगा। इसके लिए केईडीएल ने इन मामलों को आगे बढ़ाने के लिए जांच की प्रक्रिया शुरू की है।
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