जमीनों का गणित बिगड़ा, रडार पर लाखों प्लॉट और खेत, कोर्ट के फैसले ने उड़ाई नींद
Mukesh Sharma | Mar 05, 2026, 18:08 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में सड़कों का चेहरा बदलने वाले कोर्ट के फैसले ने लोगों की नींद उड़ा दी है। इस फैसले से बरसों पुराने निर्माणों और निवेशों पर बुलडोजर चल सकता है। यह मामला अब प्रदेश में गांव की चौपालों से लेकर राजधानी के गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
News In Short
- राजस्थान में सड़क किनारे जमीन का मालिक होना अब संकट का सबब बना।
- हाई कोर्ट के 13 फरवरी के आदेश ने सड़क किनारे जमीन मालिकों की उड़ाई नींद।
- कोर्ट ने सड़क के केंद्र से 75, 60 और 17.5 मीटर के दायरे को लेकर खींची है लक्ष्मण रेखा।
- निर्माण हाईवे के सेंटर 75 मीटर के परिधि में है तो उसे अब हटाया जाना तय।
- सत्ता और विपक्ष इस मामले में सरकार से दखल कर कर चुका है अनुरोध।
News In Detail
कोर्ट ने सड़क के केंद्र से 75, 60 और 17.5 मीटर के दायरे को लेकर जो लक्ष्मण रेखा खींची है, उसने बरसों पुराने निर्माणों और भविष्य के निवेशों पर बुलडोजर का साया मंडरा दिया है। 10 मार्च 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से पहले प्रदेश में बड़े आंदोलन और विरोध प्रदर्शन की आहट सुनाई देने लगी है।
क्यों मचा है हड़कंप
सड़क की श्रेणी बिल्डिंग लाइन (नो कंस्ट्रक्शन) कंट्रोल लाइन (प्रतिबंधित क्षेत्र)
नेशनल/स्टेट हाईवे 45 मीटर, 75 मीटर
मुख्य जिला सड़क (MDR) 25 मीटर, 60 मीटर
अन्य जिला सड़क (ODR) 15 मीटर, 17.5 मीटर
ग्रामीण सड़कें 12.5 मीटर 15 मीटर
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपका प्लॉट हाईवे के सेंटर से 75 मीटर के भीतर है, तो वहां कोई भी स्थायी निर्माण 'अवैध' की श्रेणी में आ सकता है।
कन्वर्जन भी नहीं बचा पाएगा निर्माण!
भले ही आपके पास वैध पट्टा हो, लेकिन यदि निर्माण 75 मीटर की परिधि में है तो उसे हटाया जाना तय है। यह आदेश उन हजारों निवेशकों के लिए बड़ा झटका है जिन्होंने हाईवे के किनारे कमर्शियल कॉम्प्लेक्स या होटल बनाने का सपना देखा था।
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मुआवजा एक बार, संकट बार-बार
अब किसान अपने ही खेत में सड़क के पास कुआं या कोठरी बनाने से पहले कानूनी पचड़ों में फंसेगा। हाईवे किनारे ढाबा चलाकर गुजर-बसर करने वाले हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
धार्मिक स्थलों पर 'सुप्रीम' प्रहार
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7 दिन में एक्शन प्लान
सर्वाधिक प्रभावित होने वाले विशिष्ट जिले
जहां से स्वर्णिम चतुर्भुज और प्रमुख एक्सप्रेसवे गुजरते हैं:
अति-संवेदनशील जिले
जोधपुर: लूणी, मोगड़ा और पाली रोड पर स्थित सैकड़ों धर्मकांटे और औद्योगिक इकाइयां सीधे तौर पर 'कंट्रोल लाइन' की जद में हैं।
अजमेर और भीलवाड़ा: ये जिले टेक्सटाइल और मार्बल हब हैं। हाईवे के किनारे स्थित शोरूम और गोदामों के लिए यह आदेश 'डेथ वारंट' जैसा है।
उदयपुर: पर्यटन नगरी होने के कारण हाईवे किनारे बने रिसॉर्ट्स और होटलों पर गाज गिरना तय है।
अलवर: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और रीको औद्योगिक क्षेत्रों के पास हुए निर्माण इस दायरे में आएंगे।
गंभीर कानूनी सवाल किए खड़ा
दोनों पार्टियां बना रही सरकार पर दबाव
सरकार का रुख: 'सशंकित अनुपालन'
टास्क फोर्स का गठन: कोर्ट की फटकार के बाद गृह विभाग और पीडब्ल्यूडी ने आनन-फानन में जिला स्तरीय 'हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स' के गठन के निर्देश दे दिए हैं।
अधिकारियों की चिंता: सूत्रों के अनुसार सरकार इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि लाखों निर्माणों पर बुलडोजर चला, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। सरकार
संभवतः कोर्ट में 'चरणबद्ध तरीके' से अतिक्रमण हटाने और कुछ श्रेणियों को छूट देने की अपील कर सकती है।
भजनलाल सरकार की घोषणाएं विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि सरकार लीगल टीम के जरिए इस आदेश का अध्ययन करा रही है जिससे आम जनता को कम से कम नुकसान हो।
सत्तापक्ष के विधायकों की 'दबे स्वर' में नाराजगी
विपक्ष (कांग्रेस): संवेदनहीनता का आरोप
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे 'आर्थिक इमरजेंसी' करार देते हुए कहा कि सरकार को उन लोगों के नुकसान की जिम्मेदारी लेनी चाहिए जिन्होंने सरकारी विभागों से एनओसी लेकर निर्माण किया था।
क्या होगा आगे
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