मूल निवास प्रमाण पत्र के नियमों में बड़ा बदलाव, जानें कौन होगा पात्र और कैसे करें आवेदन

Jageshwar prasad | May 10, 2026, 10:49 IST
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Ashish Bhardwaj (36)
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में मूल निवास प्रमाण पत्र के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अगर आप यह प्रमाण पत्र बनवाना चाहते हैं तो पहले ये नियम विस्तार से समझ लें।

Jaipur: राजस्थान सरकार ने मूल निवास (Bonafide) प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में नए और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की योजनाओं का लाभ वास्तविक निवासियों को मिल सके।

​कौन होगा राजस्थान का मूल निवासी?

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार किसी व्यक्ति को राजस्थान का मूल निवासी तब माना जाएगा जब उसके माता-पिता राजस्थान के मूल निवासी हों। वह स्वयं या उसके माता-पिता राजस्थान में पिछले 10 वर्षों या उससे अधिक समय से निवास कर रहे हों।

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​आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

​प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय निवासियों को निम्नलिखित साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे:
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जन्म के आधार पर: आवेदक का जन्म प्रमाण पत्र और माता-पिता का मूल निवास प्रमाण पत्र।

​निवास के आधार पर: यदि कोई व्यक्ति 10 साल से अधिक समय से राज्य में रह रहा है, तो उसे चुनाव पहचान पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, या पहचान के अन्य फोटो युक्त दस्तावेज देने होंगे।

​किरायेदारों और अन्य के लिए: पिछले 10 वर्षों के लगातार बिजली, पानी या टेलीफोन के बिल (हर साल का एक बिल) या 10 वर्ष का निरंतर किरायानामा।

​विवाहित महिलाओं के लिए नियम

बाहरी राज्य की महिलाओं के लिए विशेष राहत दी गई है। यदि किसी महिला ने राजस्थान के मूल निवासी व्यक्ति से विवाह किया है और वह यहां रह रही है, तो उसे राजस्थान की मूल निवासी माना जाएगा। इसके लिए पति का मूल निवास, विवाह प्रमाण पत्र और राजस्थान में रहने का शपथ पत्र आवश्यक होगा।

​डुप्लीकेट और संशोधित प्रमाण पत्र

नियमों के अनुसार मूल निवास प्रमाण पत्र जीवन में एक बार ही बनाया जाता है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में इसे दोबारा जारी किया जा सकता है। प्रमाण पत्र खो जाने या खराब हो जाने की स्थिति में, नाम या पता बदलने पर संशोधन के लिए या 10 साल बाद आयु बढ़ने पर नई फोटो के साथ नवीनीकरण के लिए प्रमाण पत्र दोबारा जारी हो सकेगा।

इन्हें बनाने का अधिकार

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिला कलेक्टर, उप खंड अधिकारी (SDM) और तहसीलदार इन प्रमाण पत्रों को जारी करने के लिए अधिकृत हैं। साथ ही, प्रशासन गांवों के संग या प्रशासन शहरों के संग अभियानों के दौरान जारी प्रमाण पत्र पूरी तरह मान्य होंगे।

डिजिटल हस्ताक्षर वाले प्रमाण पत्रों पर अब किसी अन्य अधिकारी के हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होगी

आवेदन पत्र



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