राजपूताना में केवल अजमेर में रहा मराठों का शासन, वहां भी लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा
Amit Baijnath Garg | Aug 08, 2025, 17:53 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के प्रोफेसर टीके माथुर ने दावा किया है कि राजपूताना में सिर्फ अजमेर में मराठों का शासन था। इसके लिए भी उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ा। जैसलमेर, मेवाड़ और बूंदी पर कभी उनका नियंत्रण नहीं था।
राजस्थान के इतिहासकार प्रो. टीके माथुर ने हाल ही में एक बड़ा दावा किया है कि राजपूताना में केवल अजमेर (Ajmer) ही वह स्थान था जहां मराठों का शासन रहा था। उनका कहना है कि अन्य क्षेत्रों जैसे जैसलमेर, मेवाड़ और बूंदी में कभी भी मराठों का आधिपत्य नहीं था, जैसा कि एनसीईआरटी की किताब में बताया गया है। उनका यह बयान शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विवाद को जन्म दे रहा है, जिसमें किताबों में ऐतिहासिक तथ्यों के गलत प्रस्तुतिकरण पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हर साल होगा एनसीईआरटी की किताबों में चेंज, जरूरत के हिसाब करें अपडेट Ministry of Education
हाल ही में एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है। इस पुस्तक में जैसलमेर, मेवाड़ और बूंदी को मराठों के अधीन बताया गया है, जबकि प्रो. टीके माथुर का स्पष्ट कहना है कि यह जानकारी तथ्यों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के लेखक को प्रमाण पेश करने चाहिए, ताकि अन्य इतिहासकार भी इसे सही मान सकें। उनका कहना है कि इस प्रकार की गलत जानकारी छात्रों के दिमाग में गलत धारणाएं बना सकती हैं, जो भविष्य में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ भ्रम उत्पन्न करेंगी। उनका कहना है कि एनसीईआरटी पुस्तक ऐतिहासिक तथ्यों पर विवाद पैदा कर रही है।
CBSE ने दिया 9वीं कक्षा के चैप्टर ‘डेटिंग एण्ड रिलेशनशिप्स’ पर स्पष्टीकरण, एनसीईआरटी की किताब से नहीं है
एनसीईआरटी की किताबों में अब इंडिया की जगह लेगा भारत, नाम बदलने की सिफारिश हुई मंजूर
प्रो. माथुर ने यह भी कहा कि मराठों का अजमेर में शासन संघर्षपूर्ण था। उनका मुख्य उद्देश्य यहां से गुजरने वाले व्यापारिक मार्गों पर अपना नियंत्रण स्थापित करना था। इसके अलावा, जयपुर और जोधपुर राजवंशों ने भी अजमेर पर अपना अधिकार जमाने के प्रयास किए थे। इस संघर्ष के बीच मराठों ने 1747 से 1818 तक इस इलाके में अपना शासन स्थापित किया, लेकिन यह समय हमेशा संघर्षों से भरा रहा।
एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम में किया बदलाव, महात्मा गांधी और आरएसएस से जुड़े तथ्य हटाए, मुगलों से जुड़े हिस्सों को भी हटाया
मराठों ने अजमेर में अपना शासन स्थापित करने के लिए कई युद्ध किए। जयपुर और जोधपुर राजवंशों से मुकाबला करते हुए वे अजमेर में अपने साम्राज्य को कायम रखने में सफल हुए। उनके शासन के दौरान सिंधिया की राजशाही का प्रभाव अधिक था। यह संघर्ष मुख्य रूप से गुजरात और दक्षिण भारत के व्यापारिक मार्गों के नियंत्रण को लेकर था।
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧
हर साल होगा एनसीईआरटी की किताबों में चेंज, जरूरत के हिसाब करें अपडेट Ministry of Education
एनसीईआरटी की किताब पर सवाल
उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के लेखक को प्रमाण पेश करने चाहिए, ताकि अन्य इतिहासकार भी इसे सही मान सकें। उनका कहना है कि इस प्रकार की गलत जानकारी छात्रों के दिमाग में गलत धारणाएं बना सकती हैं, जो भविष्य में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ भ्रम उत्पन्न करेंगी। उनका कहना है कि एनसीईआरटी पुस्तक ऐतिहासिक तथ्यों पर विवाद पैदा कर रही है।
अजमेर का ऐतिहासिक महत्व प्रो. माथुर ने बताया कि अजमेर का राजपूताना में विशेष महत्व रहा है। यह न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि इसकी सांस्कृतिक और व्यापारिक स्थिति भी अद्वितीय थी। सम्राट पृथ्वीराज चौहान से लेकर मुगलों तक सभी ने अजमेर को अपनी सत्ता का केंद्र बनाया। मुगलों के समय में भी अजमेर को दिल्ली सल्तनत की दूसरी राजधानी के रूप में देखा गया। इस कारण ही मराठों ने अजमेर में अपनी पकड़ बनाने का प्रयास किया था।
एनसीईआरटी की किताबों में अब इंडिया की जगह लेगा भारत, नाम बदलने की सिफारिश हुई मंजूर
मराठों का संघर्ष और अजमेर में शासन
एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम में किया बदलाव, महात्मा गांधी और आरएसएस से जुड़े तथ्य हटाए, मुगलों से जुड़े हिस्सों को भी हटाया
अजमेर में मराठों की शक्ति और संघर्ष
FAQ
- 1. क्या जैसलमेर, मेवाड़ और बूंदी में मराठों का शासन था?
प्रो. टीके माथुर के अनुसार, जैसलमेर, मेवाड़ और बूंदी में कभी मराठों का शासन नहीं रहा। केवल अजमेर में उनका शासन था। - 2. क्या एनसीईआरटी की किताब में दी गई जानकारी गलत है?
हां, प्रो. माथुर का कहना है कि एनसीईआरटी की किताब में जैसलमेर, मेवाड़ और बूंदी को मराठों के अधीन बताया गया है, जो ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ है। - 3.
अजमेर का इतिहास क्या है?
अजमेर का ऐतिहासिक महत्व बहुत बड़ा था। यह दिल्ली सल्तनत की दूसरी राजधानी के रूप में कार्य करता था और मुगलों के समय में भी इसका महत्वपूर्ण स्थान था।
thesootr links
- मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- जॉब्स और एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman