गोल्ड मेडल पर स्टूडेंट का नाम छपा, दीक्षांत समारोह में दूसरे को दिया, हाई कोर्ट पहुंचा छात्र

Jageshwar prasad | May 24, 2026, 16:00 IST
Share
Ashish Bhardwaj - 2026-05-24T155258.284
Photograph: (the sootr)

NLU जोधपुर ने दीक्षांत समारोह शुरू होने से 5 मिनट पहले गोल्ड मेडलिस्ट का नाम बदल दिया। छात्र के नाम पर मेडल छप चुके थे और ब्रोशर में भी नाम था। परीक्षा नियंत्रक ने बिना सुनवाई के मेडल दूसरे को दे दिया। हाई कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है।

News In Short

  • NLU जोधपुर ने दीक्षांत समारोह से 5 मिनट पहले बदल दिया गोल्ड मेडलिस्ट का नाम।
  • छात्र के नाम पर मेडल बन चुके थे और ब्रोशर में भी नाम छपा था।
  • परीक्षा नियंत्रक ने री-इवैल्यूएशन का हवाला देकर बिना सुनवाई के मेडल दूसरे को दे दिए।
  • गोल्ड मेडल रद्द करने का अधिकार एकेडमिक काउंसिल को है, परीक्षा नियंत्रक को नहीं।
  • हाई कोर्ट ने NLU को नोटिस जारी कर मार्कशीट जारी करने पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

News In Detail

राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला एक स्टूडेंट के नाम पर तैयार दो गोल्ड मेडल का है, जो दीक्षांत समारोह में किसी दूसरे स्टूडेंट को दे दिए गए। दीक्षांत समारोह शुरू होने से महज 5 मिनट पहले यह फैसला लिया गया।

जस्टिस संजीत पुरोहित की एकलपीठ ने यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि वह याचिकाकर्ता छात्र की मार्कशीट जारी करने के संबंध में अगली सुनवाई तक अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करें।

दीक्षांत समारोह से 5 मिनट पहले का चौंकाने वाला फैसला

भीलवाड़ा के रहने वाले याचिकाकर्ता अनुज शुक्ला ने NLU ओडिशा से साल 2018 से 2023 तक LLB की पढ़ाई की थी। इसके बाद 26 जुलाई 2023 के दीक्षांत समारोह में उन्हें राष्ट्रपति के हाथों 8 गोल्ड मेडल मिले थे। LLB के बाद अनुज शुक्ला NLU जोधपुर के LLM बैच 2023-24 के छात्र रहे।

23 फरवरी 2025 को यूनिवर्सिटी के 17वें दीक्षांत समारोह में उन्हें 2 गोल्ड मेडल मिलने थे। इन मेडल के लिए यूनिवर्सिटी की कमेटी ने 8 फरवरी 2025 की बैठक में अनुज के नाम की सिफारिश की थी। 15 फरवरी को इसे एकेडमिक काउंसिल ने मंजूरी भी दे दी थी। दीक्षांत समारोह के ब्रोशर में अनुज का नाम छप चुका था और मेडल पर भी उनका नाम लिखा था।

लेकिन 23 फरवरी को दीक्षांत समारोह शुरू होने में 5 मिनट पहले परीक्षा नियंत्रक ने उन्हें रोक दिया। अनुज को बताया गया कि री-इवैल्यूएशन के कारण वे गोल्ड मेडल के हकदार नहीं हैं। बिना सुनवाई का अवसर दिए, दोनों मेडल उसी क्लास की एक अन्य छात्रा को दे दिए गए।

री-इवैल्यूएशन का पेचीदा खेल

इस पूरे विवाद की जड़ LLM फर्स्ट सेमेस्टर का रिसर्च मेथोडोलॉजी सब्जेक्ट है। अनुज ने इस परीक्षा में 82 अंक प्राप्त किए थे, जो री-इवैल्यूएशन के बाद घटकर 65 हो गए। अनुज ने 4 जनवरी 2024 को ईमेल कर इसका जवाब मांगा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

परीक्षा विभाग ने अनुज को 82 अंकों के आधार पर ही ग्रेड शीट जारी की थी, जिससे उनका कुल स्कोर 441 अंक और सीजीपीए 9.19 था। इसी आधार पर 8 फरवरी को कमेटी ने अनुज को उनकी सहपाठी से बेहतर मानते हुए योग्य ठहराया था। लेकिन दीक्षांत समारोह के दिन परीक्षा नियंत्रक ने अचानक घटे हुए अंकों को आधार बनाकर पूरा फैसला पलट दिया।

गोल्ड मेडल देने का अधिकार सिर्फ एकेडमिक काउंसिल को

हाई कोर्ट में अनुज ने खुद पैरवी करते हुए अपनी याचिका में कई गंभीर कानूनी सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि NLU के नियमों के अनुसार गोल्ड मेडल देने या रद्द करने का एकमात्र अधिकार एकेडमिक काउंसिल को है, परीक्षा नियंत्रक को नहीं।

दीक्षांत समारोह के दिन ऐनवक्त पर लिए गए इस फैसले को कुलपति प्रोफेसर डॉ. हरप्रीत कौर की स्वीकृति 25 फरवरी को मिली, यानी जब मेडल पहले ही बांटे जा चुके थे। याचिका के अनुसार, 17 मार्च 2025 को परीक्षा विभाग ने अनुज को एक नई मार्कशीट थमाई, जिसे बैक डेट 23 फरवरी से सत्यापित किया गया था। अनुज ने इसे अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद से उन्हें आज तक सही मार्कशीट नहीं मिली है।

आरटीआई में चौंकाने वाला खुलासा

अनुज ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत 23 फरवरी 2025 की बैठक की जानकारी मांगी तो NLU के लोक सूचना अधिकारी ने 23 सितंबर 2025 को चौंकाने वाला जवाब दिया। उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से सामने आया कि ऐनवक्त पर गोल्ड मेडल याचिकाकर्ता को नहीं देकर किसी और को देने के लिए बैठक की गई थी।

23 फरवरी को बताई गई इस बैठक में यूनिवर्सिटी के चार सीनियर प्रोफेसर शामिल बताए गए, लेकिन इसके दस्तावेजों पर किसी के भी साइन के नीचे तारीख नहीं है। हैरानी की बात यह भी सामने आई कि 23 फरवरी को ही अचानक निर्णय बदलकर गोल्ड मेडल किसी और को दे भी दिया और वीसी के साइन 25 फरवरी को करवाए गए।

हाई कोर्ट में सुनवाई और NLU को निर्देश

मामले में सबसे पहले 6 नवंबर 2025 को जस्टिस सुनील बेनीवाल ने यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किए थे। अब 22 मई की ताजा सुनवाई में जस्टिस संजीत पुरोहित ने मामले की सुनवाई करते हुए यूनिवर्सिटी को मार्कशीट जारी करने को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।

कोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी अगली सुनवाई तक अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करे। मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में होगी। ज्यूडिशियल एस्पिरेंट अनुज शुक्ला अपने सीनियर निखिल अजमेरा की मदद से कोर्ट में खुद ही पैरवी कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें:-

दो बहनों की आत्महत्या: ब्लैकमेलिंग, जबरन वसूली और खाकी पर ढुलमुल रवैये के आरोप और प्रत्यारोप

हाई कोर्ट ने 16 साल की रेप पीड़िता को 7 महीने के गर्भ के अबॉर्शन की अनुमति दी

सरकार ने किया प्रशासन में बड़ा बदलाव, 8 जिला प्रभारी सचिव का फेरबदल

नीट पेपर लीक के बाद रजिस्ट्रेशन फीस रिफंड करने की प्रक्रिया हुई शुरू, करीब 23 लाख स्टूडेंट्स को मिलेगा रिफंट

Tags:
  • राजस्थान हाई कोर्ट
  • हाई कोर्ट
  • आरटीआई
  • RTI
  • दीक्षांत समारोह
  • NLU
  • सूचना के अधिकार
  • जस्टिस संजीत पुरोहित
  • धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा