राजस्थान निकाय चुनाव 2026: सीएम भजनलाल का ताबड़तोड़ प्रचार, वसुंधरा राजे दूर
Raghvendra Singh Rathore | Sept 08, 2026, 18:05 IST
राजस्थान चुनाव
राजस्थान निकाय चुनाव में BJP ने CM भजनलाल शर्मा को प्रचार का सबसे बड़ा चेहरा बनाया है। 5 दिन में 10 शहरों में उनके रोड शो हुए। वसुंधरा राजे मैदान से दूर हैं। कांग्रेस ने अपने-अपने गढ़ की रणनीति अपनाई है।
समझें क्या है पूरा मामला
- निकाय चुनाव में सीएम भजनलाल बने BJP का मुख्य चेहरा।
- सीएम भजनलाल शर्मा ने ताबड़तोड़ 5 दिनों में नापे 10 शहर।
- निकाय चुनाव प्रचार से अभी तक दूर हैं पूर्व सीएम वसुंधरा राजे
- अपने-अपने गढ़ में प्रचार करने में जुटे है कांग्रेस के दिग्गज नेता।
- डोटासरा ने सीकर में, तो जूली ने अलवर में संभाला मोर्चा।
पांच दिन में उनके लिए 10 शहरों का रोड शो प्लान बनाया गया। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को जिलों में उतारा गया और सतीश पूनिया को बूथ मैनेजमेंट में लगाया गया। लेकिन इस पूरी चुनावी दौड़ में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अब तक मैदान से दूर हैं।
कांग्रेस ने इससे अलग रास्ता पकड़ा है। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सीकर-लक्ष्मणगढ़, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली अलवर में ज्यादा सक्रिय हैं। अशोक गहलोत सरकार पर हमलों के जरिए चुनावी नैरेटिव बना रहे हैं, जबकि सचिन पायलट की राज्यभर में बड़ी प्रचार श्रृंखला सामने नहीं आई है।
यानी तस्वीर साफ है- BJP ने चुनाव को CM के चेहरे पर चढ़ाया है, कांग्रेस ने अपने दिग्गजों को उनके मजबूत इलाकों में टिकाया है।
भजनलाल की सबसे ज्यादा डिमांड, 5 दिन-10 शहर
7 सितंबर को अलवर में बड़ा रोड शो हुआ। 8 सितंबर को पाली और कोटा में कार्यक्रम रखा गया। पार्टी ने एक दिन में दो से तीन शहर तक कवर करने वाला शेड्यूल बनाया।
चुनाव पार्षद का है, लेकिन BJP वोट CM के चेहरे पर भी मांग रही है। यही वजह है कि पार्टी ने भजनलाल को मेवाड़ से मारवाड़, हाड़ौती से पूर्वी राजस्थान तक उतारा।
शहर-शहर तरक्की, भाजपा सरकार करेगी पक्की!
पाली के देवतुल्य परिवारजनों का यह अपार स्नेह और उत्साह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि 'निकाय चुनाव 2026' में जनता-जनार्दन भाजपा के सेवा, सुरक्षा और सुशासन के मॉडल पर अपनी अटूट मुहर लगाने जा रही है। आज उमड़े इस ऐतिहासिक जनसैलाब ने यह साबित कर… pic.twitter.com/KyyWRofGOC
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) September 8, 2026
सबसे बड़ा सवाल-वसुंधरा कहां?
\यह गैरमौजूदगी इसलिए ज्यादा चर्चा खींचती है क्योंकि राजे दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रही हैं और प्रदेश BJP के सबसे बड़े जनाधार वाले चेहरों में शामिल हैं। उनके प्रभाव वाला झालरापाटन भी निकाय चुनाव में है।
फिलहाल इतना ही साफ है- भजनलाल लगातार शहरों में हैं, वसुंधरा चुनावी मंचों से दूर हैं। इसके पीछे पार्टी की रणनीति है या कोई और वजह, BJP की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बिना इस पर निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होगा।
राठौड़ जिलों में, पूनिया बूथ पर
वहीं सतीश पूनिया की भूमिका अलग रखी गई। बड़े रोड शो के बजाय उन्हें बूथ मैनेजमेंट और कार्यकर्ताओं के साथ माइक्रो प्लानिंग में लगाया गया। जयपुर और शेखावाटी में बूथ कार्यकर्ताओं के साथ उनकी बैठकें रखी गईं।
क्षेत्रीय समीकरण भी साधे गए। गजेंद्र सिंह शेखावत को जोधपुर और ओम बिरला को कोटा में सक्रिय किया गया। मतलब BJP ने चेहरों की तैनाती भी उनके राजनीतिक प्रभाव के हिसाब से की।
डोटासरा का जोर सीकर-लक्ष्मणगढ़ पर
हालांकि सरकार को घेरने और कांग्रेस का चुनावी एजेंडा सेट करने में डोटासरा आगे हैं। पार्टी का निकाय चुनाव घोषणा-पत्र भी उनकी मौजूदगी में आया। सफाई, सीवरेज, कचरा उठाव और शहरी विकास जैसे मुद्दों को कांग्रेस ने चुनावी हथियार बनाया। यानी डोटासरा प्रदेश में पार्टी की आवाज हैं, लेकिन मैदान में सबसे ज्यादा जोर अपने सियासी इलाके पर है।
जय कांग्रेस, विजय कांग्रेस#Laxmangarh pic.twitter.com/E6PHqMmNIf
— Govind Singh Dotasra (@GovindDotasra) September 8, 2026
अलवर में जूली Vs BJP के बड़े चेहरे
BJP ने भी अलवर को हल्के में नहीं लिया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का रोड शो कराया गया। मंत्री संजय शर्मा, प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल और अशोक परनामी जैसे चेहरे भी मैदान में दिखे।
इससे अलवर की लड़ाई दिलचस्प हो गई- कांग्रेस ने जूली-जितेंद्र के स्थानीय प्रभाव पर दांव लगाया तो BJP ने उसके मुकाबले बड़े चेहरों की फौज उतारी।
आप समझ सकते हैं कि राजस्थान का भविष्य क्या होगा, जब मुख्यमंत्री जी ही पार्षद प्रत्याशियों के लिए वोट मांगने आ जाएं तो फिर आखिर बचता ही क्या है?
आज तक के इतिहास में कोई मुख्यमंत्री पार्षदों के लिए वोट मांगने नहीं आया। यह मुख्यमंत्री ही बिल्कुल खाली बैठे हैं। क्योंकि इन्हें काम… pic.twitter.com/4G5k9ChnhF
— Tika Ram Jully (@TikaRamJullyINC) September 7, 2026
गहलोत ने रोड शो पर ही खड़े किए सवाल
सड़क, ट्रैफिक, जलभराव, सफाई और पट्टों जैसे मुद्दों पर उन्होंने सरकार को घेरा। यानी गहलोत ने प्रचार की भीड़ से ज्यादा सरकार के खिलाफ मुद्दे खड़े करने की रणनीति अपनाई। उनके गृह क्षेत्र जोधपुर में 9 सितंबर के लिए रोड शो का कार्यक्रम भी सामने आया है।
A Must Watch! जरूर देखिए!
भाजपा सरकार के दावों और हकीकत का अंतर देखिए।
नगरीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को वोट देकर प्रदेश की स्थिति को सुधारने में योगदान दें। pic.twitter.com/ezwIDZ52sW
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) September 8, 2026
पायलट की बड़ी प्रचार श्रृंखला नहीं
इसलिए कांग्रेस में फिलहाल डोटासरा और जूली की जमीनी सक्रियता ज्यादा साफ दिखाई देती है, जबकि गहलोत और पायलट की भूमिका अलग तरह की रही है।
प्रचार का गणित: BJP का एक चेहरा, कांग्रेस के कई गढ़
कांग्रेस का फॉर्मूला- जिसका गढ़, उसी पर ज्यादा जोर। डोटासरा सीकर-लक्ष्मणगढ़ में, जूली अलवर में मजबूत मोर्चा संभालते दिखे। गहलोत ने मुद्दों से सरकार को घेरा और पायलट की व्यापक प्रचार श्रृंखला नहीं दिखी।
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