ये प्यास है बड़ी: डूंगरी बांध से डूब जाएगी दिल्ली-मुंबई रेल लाइन, रेलवे ने जताई कड़ी आपत्ति

Mukesh Sharma | Feb 02, 2026, 17:19 IST
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Indian Rail
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में डूंगरी बांध से दिल्ली—मुंबई रेल लाइन का बड़ा हिस्सा डूब में आ जाएगा। अभी तक माना जा रहा था कि यह बांध उसकी जद में आने वाले गांवो के लिए मुसीबत है। फिर पता चला कि इस बांध की जद में दो नेशनल पार्क भी हैं।

News In Short

  • डूंगरी बांध से दिल्ली-मुंबई रेल लाइन का बड़ा हिस्सा डूब में आएगा
  • बांध से मखोली-मलारना और नारायणपुर टटवारा-निमोदा सेक्शन को खतरा
  • दिल्ली-मुंबई रेल रूट है देश का सबसे व्यस्तम रेलवे मार्ग
  • राजस्थान में डूंगरी बांध है रामजल सेतु लिंक परियोजना का हिस्सा
  • इस बांध के बनने पर बुझेगी पूर्वी राजस्थान के लोगों की प्यास

News In Detail

Jaipur: राजस्थान में डूंगरी बांध प्रोजेक्ट ने रेलवे की नींद भी उड़ा दी है। यह बांध रामजल सेतु लिंक परियोजना का हिस्सा है, जिसका गांव वाले शुरुआत से ही विरोध कर रहे हैं। हाल ही में रेलवे के कोटा मंडल से जारी एक पत्र ने डूंगरी बांध के भविष्य और दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग—की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।



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​क्या है पूरा विवाद

राजस्थान वाटर ग्रिड कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से निर्मित किए जाने वाले इस बांध के डूब क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई रेलवे लाइन का एक बड़ा हिस्सा आ रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बांध के कारण न सिर्फ मौजूदा पटरियां जलमग्न होने का खतरा है, बल्कि भविष्य की विस्तार योजनाओं पर भी पूर्ण विराम लग सकता है।



Indin Train
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डूब का मतलब दिल्ली-मुंबई का संपर्क टूटना

​पश्चिम मध्य रेलवे के उप मुख्य इंजीनियर (निर्माण) के हस्ताक्षर से जारी पत्र के अनुसार, डूंगरी बांध से दिल्ली—मुंबई रेल लाइन का गंगापुर—सवाईमाधोपुर खंड सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा हैं। यह देश का सबसे व्यस्ततम रेल मार्ग है। इसके डूबने का अर्थ है देश की आर्थिक राजधानी और राजनीतिक राजधानी के बीच का संपर्क टूटना।



rail
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तीसरी और चौथी लाइन का विस्तार

रेलवे अधिकारियों के अनुसार सवाई माधोपुर और गंगापुर सिटी के बीच मखोली-मलारना और
नारायणपुर टटवारा-निमोदा ब्लॉक सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन बिछाने का काम प्रस्तावित है। बांध के जल भराव क्षेत्र में आने से यह काम पूरी तरह अधर में लटक सकता है। रेलवे ने स्पष्ट कहा है कि RWGCL को रेलवे लाइन के पुनर्वास और पटरियों के मॉडिफिकेशन के लिए तत्काल रेलवे से संपर्क करना होगा, अन्यथा यह परियोजना एक बड़े रेल संकट को जन्म दे सकती है।

सीपीजीआरएएम के जरिए उठा मुद्दा

हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर विषय पर रेलवे का ध्यान तब गया, जब 15 नवंबर 2025 को एक आवेदन केंद्रीय लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली(सीपीजीआरएएम) के माध्यम से दर्ज किया गया। 23 जनवरी 2026 को मिली इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए रेलवे ने "तत्काल जांच और आपत्ति" की प्रक्रिया शुरू कर दी है



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​विकास बनाम विनाश की बहस

डूंगरी बांध पूर्वी राजस्थान के जल संकट को दूर करने और सिंचाई के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना माना जा रहा है। यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के जिलों के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना का हिस्सा है। वहीं, दूसरी ओर रेलवे जैसे राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान इसकी लागत और योजना पर सवाल उठाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रेलवे लाइन को शिफ्ट करना पड़ा, तो इसमें हजारों करोड़ों का अतिरिक्त खर्च आएगा। साथ ही निर्माण में बरसों की देरी होगी

शुरुआत से ही बांध विवाद में

पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना के तहत बनाया जा रहा डूंगरी बांध शुरुआत से ही विवादों में है। स्थानीय ग्रामीण इस बांध का यह कहकर विरोध कर रहे हैं कि इससे 76 गांव डूब में आ जाएंगे। दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि सिर्फ 16 गांव ही बांध से प्रभावित होंगे। यह विवाद हिंसक झड़पों, महापंचायतों और रेल रोको आंदोलन की धमकियों के साथ लगातार जारी है।



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बांध से ईको सिस्टम भी खतरे में

डूंगरी बांध रणथंभौर टाइगर रिजर्व और कैलादेवी बर्ड सेंचुरी को प्रभावित कर सकता है, जो इसके ईको सिस्टम पर सवाल उठाता है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया से हरी झंडी नहीं मिलने के कारण राजस्थान का जल संसाधन विभाग इस बांध के काम को आगे नहीं बढ़ा पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि विभाग ने इंस्टीट्यूट से जल्द ही अपनी सर्वे रिपोर्ट देने को कहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि बांध का दोनों अभयारण्यों पर कितना असर पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक अनुमान में बांध से दोनों अभयारण्यों का लगभग 3700 हेक्टेयर एरिया प्रभावित होने का अनुमान है।

बीसलपुर छलकने के बाद आएगा पानी

अधिकारियों का कहना है कि डूंगरी बांध बनास नदी पर बनना है। यह सवाई माधोपुर जिले में है। यह हिस्सा रणथंभोर और केवलादेव उद्यान की पहाड़ियों के बीच है। बनास नदी का कुछ हिस्सा भी रणथंभोर टाइगर रिजर्व में आ रहा है। बांध का कुल डूब एरिया लगभग 12000 हेक्टेयर है। बांध की क्षमता 1600 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रस्तावित है, जो बीसलपुर बांध से डेेढ़ गुना अधिक है। नदी से बांध की उंचाई 24.50 मीटर और चौड़ाई 1500 मीटर होगी। बीसलपुर बांध छलकने के बाद पानी डूंगरी बांध में आएगा।

​आगे की राह: क्या है समाधान?

​अब गेंद राजस्थान वाटर ग्रिड कॉरपोरेशन के पाले में है। उन्हें यह तय करना होगा कि ​क्या बांध की ऊंचाई कम की जा सकती है, जिससे नई रेलवे लाइन और अभयारण्य सुरक्षित रहें। ​क्या रेलवे लाइन के लिए ऊंचे पुल बनाए जा सकते हैं? ​क्या इस मार्ग को पूरी तरह से डायवर्ट करना संभव है? फिलहाल ​डूंगरी बांध परियोजना फिलहाल विकास और सुरक्षा के बीच एक जटिल चौराहे पर खड़ी है।

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