स्कूली बच्चों के लिए छपवा दी ऐसी 10 लाख किताबें, जिनका कोर्स ही बदल गया, जानें पूरा मामला
Ashish Bhardwaj | May 28, 2026, 12:23 IST
book Photograph: (the sootr)
राजस्थान के शिक्षा विभाग में अजीबोगरीब मामला सामने आया है। अधिकारियों ने 10 लाख किताबें एडवांस में छपवा ली, जबकि इनका कोर्स इस शिक्षा सत्र में बदल चुका है। ये नई किताबें अब रद्दी हो गई हैं।
News In Short
- शिक्षा विभाग में अधिकारियों ने सरकारी धन की बर्बादी की सारी हदें पार कर दी।
- अधिकारियों ने 10 लाख किताबें एडवांस में छपवा ली, जिनका कोर्स ही बदल गया।
- इन किताबों के भारी-भरकम बंडलों को गोदामों के कोने में छिपा दिया गया।
- अफसरों के गलत निर्णय से सरकार के करीब 7 करोड़ रुपए सीधे स्वाहा हो गए।
- अब अधिकारी अजीब तर्क दे रहे कि ये किताबें कुछ साल बाद काम आ जाएंगी।
News In Detail
अफसरों के बिना सोचे-समझे लिए गए फैसलों के कारण सरकार के करीब 7 करोड़ रुपए सीधे स्वाहा हो गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें अकेले सातवीं कक्षा की ही 5 लाख किताबें शामिल हैं, जिन्हें बिना किसी ठोस योजना के एडवांस में छपवा दिया गया था।
कोर्स बदलने की आहट, फिर भी क्यों छपीं किताबें?
नियम और सामान्य प्रक्रिया के अनुसार जब भी किसी कक्षा का पाठ्यक्रम बदलने की संभावना होती है, तो पुरानी किताबों की छपाई तत्काल रोक दी जाती है या बेहद सीमित संख्या में ही की जाती है। लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर पिछले सत्र के दौरान ही भारी मात्रा में एडवांस किताबें छाप दी गईं।
नतीजा यह हुआ कि नया कोर्स लागू होते ही ये 10 लाख किताबें स्कूलों की जगह सीधे कबाड़ के लायक हो गईं।
गोदामों के पीछे छुपाया गया सच
इस महा-लापरवाही को जनता और सरकार की नजरों से छिपाने के लिए अफसरों ने चालाकी दिखाई और इन 10 लाख रद्दी हो चुकी किताबों के भारी-भरकम बंडलों को गोदामों के कोने में छिपा दिया। इनके आगे नई किताबों के बंडल लगा दिए।
मकसद साफ था-ताकि कोई निरीक्षण करने आए तो उसे सिर्फ नई किताबें दिखें और करोड़ों की इस रद्दी पर किसी की नजर न पड़े। लेकिन पाप का घड़ा ज्यादा दिन तक छुपा नहीं रह सका। इस पूरे राज का पर्दाफाश तब हुआ जब इस बार के नए सत्र की किताबों की सप्लाई के दौरान सातवीं कक्षा के कुछ पुराने बंडल गलती से नई किताबों के साथ स्कूलों में वितरित हो गए।
जब अध्यापकों और बच्चों ने देखा कि किताबों का पाठ्यक्रम तो बदल चुका है और यह पुराना स्टॉक है, तब जाकर इस पूरे घालमेल की कड़ियां आपस में जुड़ीं। गोदामों के भीतर नई नवेली किताबों की आड़ में छिपाई गई करोड़ों की इस रद्दी का जखीरा लाइव बरामद हो गया हे।
जिम्मेदारों का तर्क: आगे काम आ जाएंगी
शुरुआत में तो वे इस बात को दबाते रहे, लेकिन जब उन्हें गोदामों के भीतर के पुख्ता फोटो और वीडियो सबूत दिखाए गए, तो वे सच स्वीकार करने को मजबूर हो गए।
उन्होंने अजीब तर्क देते हुए कहा, ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। जब फिर से कभी कोर्स बदलेगा, तो ये किताबें काम आ जाएंगी। इसमें नुकसान जैसी कोई बात नहीं है।
मंडल सचिव का पक्ष
इस सत्र में हमने स्कूलों में 5 करोड़ नई किताबों की लगभग शत-प्रतिशत सप्लाई पूरी कर दी है, और यह सारा काम पूरी तरह से टाइमबाउंड (समयबद्ध) तरीके से हुआ है।
जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी का जिम्मेदार कौन?
क्या एडवांस छपाई का यह आदेश देने से पहले छात्र संख्या और पाठ्यक्रम के आगामी बदलावों की समीक्षा नहीं की गई थी?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह महज एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय लापरवाही है, जिसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी जरूरी है।
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