काम बराबर, स्टाइपेंड में फर्क क्यों: राजस्थान के FMG इंटर्न्स का प्रदर्शन
Raghvendra Singh Rathore | Sept 17, 2026, 17:11 IST
ड्यूटी पूरी भुगतान शून्य
सरकारी अस्पतालों में OPD से इमरजेंसी और नाइट ड्यूटी तक करने का दावा, FMGs बोले- भारतीय MBBS इंटर्न्स को करीब 21,700 रुपए महीना, हमें शून्य भुगतान
जानें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में FMG इंटर्न्स ने स्टाइपेंड नहीं मिलने का मुद्दा उठाया।
- दावा- करीब 2000 FMGs सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप कर रहे हैं।
- OPD, इमरजेंसी और नाइट ड्यूटी के बावजूद भुगतान शून्य।
- IMG इंटर्न्स को करीब ₹21,700 प्रतिमाह मिलने का दावा।
- FMGs ने समान स्टाइपेंड और बकाया भुगतान की मांग की।
FMG इंटर्न्स का दावा है कि प्रदेश में करीब 2 हजार विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स सरकारी चिकित्सा संस्थानों में इंटर्नशिप कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्टाइपेंड के नाम पर अब तक कोई भुगतान नहीं किया जा रहा।
इसके विरोध में 16 सितंबर को FMG इंटर्न्स जयपुर के आदर्श नगर स्थित चिकित्सा शिक्षा भवन पहुंचे और प्रदर्शन किया। उन्होंने राज्य सरकार से स्टाइपेंड शुरू करने के साथ पात्र इंटर्न्स का बकाया भुगतान करने की मांग की। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने भी इस मामले में राजस्थान सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
OPD-इमरजेंसी से नाइट ड्यूटी तक
इंटर्न्स के मुताबिक वे मरीजों की देखभाल, वार्ड, OPD, इमरजेंसी और नाइट ड्यूटी तक कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा। उनका सवाल है कि जब काम और जिम्मेदारियां समान हैं तो भुगतान में अंतर क्यों है?
दावा- IMG को 21,700 रुपए, FMG को शून्य
राजस्थान के सरकारी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अनिवार्य मेडिकल इंटर्नशिप कर रहे करीब 2000 फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMGs) ने स्टाइपेंड नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है। #jaipur #rajasthan pic.twitter.com/FDKiQK6mqB
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NMC के नियम में क्या है?
NMC ने FMG इंटर्नशिप को लेकर जारी निर्देशों में भी स्टाइपेंड और इंटर्नशिप व्यवस्था में समानता पर जोर दिया है। FMG इंटर्न्स इन्हीं नियमों को आधार बनाकर राजस्थान में भी IMG के समान भुगतान की मांग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका स्टाइपेंड का मामला
राजस्थान के FMGs का कहना है कि नियामक निर्देशों और न्यायिक स्तर पर मामला उठने के बावजूद उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है।
राजस्थान में पहले भी उठ चुका मुद्दा
पूर्व में सामने आई रिपोर्टों में राजस्थान के वित्त विभाग द्वारा FMG stipend के लिए वित्तीय मंजूरी नहीं दिए जाने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में अब सवाल यह है कि मेडिकल एजुकेशन और वित्त विभाग के बीच स्टाइपेंड की फाइल वर्तमान में किस स्तर पर लंबित है।
अब FMGs ने मांगा बकाया भी
अब इस विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि FMG और IMG दोनों एक ही सरकारी चिकित्सा व्यवस्था में मरीजों की देखभाल और अस्पताल की ड्यूटी कर रहे हैं, तो स्टाइपेंड की व्यवस्था अलग क्यों है? इसका जवाब मेडिकल एजुकेशन और वित्त विभाग की मौजूदा नीति और FMG stipend से जुड़ी फाइल की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगा।
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