ग्रीन टैक्स के 2284 करोड़ पर सवाल: बसों का घाटा और सैलरी चुकाने में खर्च हुआ फंड
Raghvendra Singh Rathore | Sept 07, 2026, 17:38 IST
ग्रीन टैक्स के 2284 करोड़ पर NGT का सख्त आदेश
10 साल में राजस्थान में वसूले ₹2,283.97 करोड़, NGT ने कहा- नियमों के मुताबिक ही खर्च हो पैसा, याचिकाकर्ता बाबूलाल जाजू बोले- पालना नहीं हुई तो फिर जाएंगे कोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- 2284 करोड़ के ग्रीन टैक्स पर NGT की सख्त टिप्पणी
- ग्रीन टैक्स के पैसे से चुकाई गई की सैलरी
- NGT बोला, फंड का इस्तेमाल शॉकिंग और हैरान करने वाला
- RTI से खुला राज, 2009 करोड़ के हिसाब पर सवाल
- ग्रीन टैक्स का अलग रिकॉर्ड ही नहीं, सामने आया सच
NGT की सेंट्रल जोन बेंच ने इसे लेकर कड़ी टिप्पणी की है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अपने ही 2012 के नोटिफिकेशन का उल्लंघन करते हुए इस तरह फंड का इस्तेमाल किया जाना “surprising and shocking” है। NGT ने राजस्थान परिवहन विभाग को RTIDF Rules, 2012 का सख्ती से पालन करने और राशि का इस्तेमाल वायु प्रदूषण नियंत्रण अथवा नियमों में अनुमत उद्देश्यों के लिए ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
जाजू बोले- नियमों की पालना नहीं होती
बाबू लाल जाजू ने कहा कि JCTSL के ऑपरेशनल लॉस और कर्मचारियों की सैलरी जैसी मदों में भी फंड खर्च किया गया है।
उन्होंने NGT के आदेश का स्वागत करते हुए कहा, “माननीय न्यायालय ने परिवहन विभाग को जो निर्देश दिए हैं, हम उनका स्वागत करते हैं। अगर इन निर्देशों की पालना नहीं की गई तो हमें पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।”
RTI से शुरू हुआ ₹2009 करोड़ का सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान NGT ने एक जॉइंट कमेटी गठित कर तथ्यात्मक और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी। इसी कमेटी की जांच में पिछले 10 वर्षों में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग को ग्रीन टैक्स से मिली राशि का आंकड़ा ₹2,283.97 करोड़ सामने आया।
JCTSL तक पहुंचा पैसा, घाटा और बकाया चुकाया
JCTSL ने इसका इस्तेमाल ऑपरेशनल लॉस की प्रतिपूर्ति के साथ कर्मचारियों की बकाया सैलरी और ठेकेदारों के बकाया भुगतान में किया। जॉइंट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि RTIDF के नोटिफिकेशन के मुताबिक इस तरह का खर्च प्रतिबंधित है। इसी आधार पर NGT ने राज्य सरकार के फंड इस्तेमाल पर सख्त टिप्पणी की।
ग्रीन टैक्स का अलग हिसाब ही नहीं
इसका मतलब यह है कि सरकार के पास ग्रीन टैक्स से आए प्रत्येक रुपए को अलग रखते हुए यह बताने की व्यवस्था नहीं है कि वह पैसा आखिर किस विशेष काम पर खर्च हुआ। NGT के रिकॉर्ड में यह भी कहा गया कि ऐसा कोई CAG या अकाउंटेंट जनरल रिकॉर्ड नहीं मिला जिसमें RTIDF के वास्तविक खर्च को उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग दिखाया गया हो।
आखिर किसलिए लिया जाता है ग्रीन टैक्स?
NGT ने परिवहन विभाग को दिए साफ निर्देश
इसके साथ जयपुर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए GRAP सिस्टम जल्द विकसित करने, ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों की नियमित निगरानी, कच्ची सड़कों को पक्का करने, वैक्यूम स्वीपिंग मशीनों के इस्तेमाल, PUC सेंटर बढ़ाने और इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड वाहनों तथा CNG-LPG जैसे स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अब सवाल सिर्फ ₹2,283.97 करोड़ की वसूली का नहीं है, बल्कि इसकी जवाबदेही का भी है। जब वाहन मालिकों से पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर ग्रीन टैक्स लिया जा रहा है तो उसका कितना हिस्सा वास्तव में प्रदूषण कम करने पर खर्च हुआ और कितना दूसरे कामों में गया इसका स्पष्ट और अलग हिसाब सामने आना अभी बाकी है।
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