/sootr/media/media_files/2026/02/10/mafiya-2026-02-10-14-16-30.jpg)
Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान में अवैध खनन के खिलाफ विशेष अभियान का दावा
- धरातल पर बजरी माफिया का खौफ और खून का खेल
- प्रदेश के 10 जिलों में अवैध खनन की अधिक बुरी स्थिति
- 5 साल में 24 मौतें और बजरी तस्करी के 10 हजार मामले सामने
- सुप्रीम कोर्ट दे चुकी कई बार निर्देश, फिर भी माफिया पर अंकुश नहीं
News In Detail
योगेन्द्र योगी@जयपुर
राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सख्त निर्देशों के बावजूद अवैध खनन के खिलाफ 'विशेष अभियान' महज कागजी साबित हो रहा है। माफिया की पैठ इतनी गहरी है कि खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण के कारण करोड़ों रुपए की सरकारी रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है। भीलवाड़ा जिले से अवैध रूप से दोहन की जा रही बजरी का बेखौफ परिवहन चित्तौड़गढ़ के रास्ते मध्य प्रदेश तक किया जा रहा है।
अवैध खनन से 10 जिले 'असुरक्षित'
राजस्थान के 10 जिलों - धौलपुर, अजमेर, बारां, अलवर और सीकर सहित 10 जिलों में अवैध खनन नदी तल, वन भूमि और पहाड़ी श्रृंखलाओं में हिंसा के खतरे के बीच बेरोकटोक जारी है। इस माफिया का खौफ इतना है कि पुलिस को कई मामलों में अपनी जान बचाकर पीछे हटना पड़ा है। विशेषकर बनास, चंबल और मासी नदियों के चरागाह भूमि क्षेत्रों में, जहां अवैध खनन के कारण पुलिस और माफिया के बीच झड़पें बढ़ रही हैं।
माफिया और पुलिस में संघर्ष
राजस्थान में बजरी माफिया और पुलिस के बीच संघर्ष हिंसक हो चुका है। इसमें धौलपुर, सवाई माधोपुर और जोधपुर जैसे जिलों में पुलिस व वनकर्मियों को बजरी से भरे ट्रैक्टरों से कुचलकर मारने की घटनाएं सामने आई हैं। माफिया ने पुलिस पर पथराव, हाथापाई और गाड़ियां जलाने तक की हरकतें की हैं। वर्ष 2025 तक 5 साल में 24 मौतें और बजरी तस्करी के 10 हजार मामले सामने आए थे। वर्ष 2026 में भी माफियाओं के आतंक का यह सिलसिला जारी है। सभी खनिजों के अवैध खनन, निर्गमन और भंडारण की बात करें तो यह संख्या 44 हजार है। सबसे ज्यादा अवैध खनन के मामले भीलवाड़ा में दर्ज हुए हैं।
मिलीभगत के भी आए मामले सामने
राजस्थान में बजरी की अवैध खनन, परिवहन और भंडारण में पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के भी मामले सामने आए हैं। पुलिस मुख्यालय की स्पेशल विजिलेंस ब्रांच ने डिकॉय ऑपरेशन के बाद जयपुर, टोंक, अजमेर, धौलपुर, भीलवाड़ा आदि जिलों में कई थाना प्रभारियों को निलंबित और लाइन हाजिर किया है।
राजस्थान में बजरी माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई में अब तक काफी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं। 2025 में खान विभाग की ओर से 60 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी (मई 2025 तक), साथ ही अलग-अलग जिलों में पुलिस द्वारा की गई कार्यवाहियों में 9 और 7 जैसे बड़े समूह (अक्टूबर 2024 व फरवरी 2026) गिरफ्तार हुए हैं, जिसके तहत सैकड़ों वाहन भी जब्त किए गए हैं।
माफिया बेच चुका करोड़ों टन बजरी
बताया जाता है कि खनन माफिया बाड़मेर समेत प्रदेश के 25 जिलों में करोड़ों टन बजरी बेच चुके हैं। खान एवं भू विज्ञान विभाग उदयपुर ने इस संबंध में सभी खनिज अभियंताओं को आदेश जारी किए हैं। बाड़मेर में लूणी नदी क्षेत्र में बालाेतरा,समदड़ी से सिणधरी व गुड़ामालानी तक बजरी का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि खान विभाग सालाना 10 से 12 करोड़ रुपए बजरी के अवैध खनन पर पैनल्टी वसूल चुका है, लेकिन खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद है। गौरतलब है कि प्रदेश के 25 जिलों में सर्वाधिक 12 जगह बड़े स्तर पर अवैध खनन हो रहा है।
यह कह चुका है सुप्रीम कोर्ट
राजस्थान में बजरी खनन पर नवंबर 2017 से रोक लगा दी गई थी। इस रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने बजरी खनन पर लगाई गई रोक करीब 4 साल बाद हटा ली। कोर्ट ने सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की खनन मामले में की गई सिफारिशें मंजूर कर ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में वैध खनन गतिविधियों को ही मंजूरी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि बजरी का खनन वहीं होगा, जहां बजरी माइंस की पर्यावरण क्लियरेंस आ चुकी है। बाकी माइंस की पर्यावरण क्लियरेंस भी 2014-15 की सिफारिशें मानते हुए जारी की जाएं। एम्पावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा था कि अवैध बजरी परिवहन को लेकर पकड़े गए वाहनों पर पर्यावरण एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। राजस्थान में इस एक्ट के तहत अब तक एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।
सीबीआई जांच के लिए कह चुका कोर्ट
हाई कोर्ट ने पिछले साल अप्रैल में बजरी की चोरी और अवैध परिवहन से जुड़ा मामला सामने आने पर सीबीआइ से जांच करने को कहा था। सीबीआइ को छूट दी कि वह बनास और चंबल नदी में अवैध खनन व परिवहन से जुडे मामलों पर भी जांच कर सकती है। हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से सीबीआइ से कहा था कि चाहे सीआरपीएफ या अन्य किसी एजेंसी की मदद लेकर इन केसों में अनुसंधान किया जाए। कितने केसों में अनुसंधान करना है सीबीआइ स्वयं तय करें। कोर्ट ने राज्य सरकार की एजेंसियों से सीबीआइ को सहयोग करने का निर्देश दिया था।
ये भी पढे़:-
राजस्थान में नीट-पीजी की 1122 सीटें अब भी खाली, निजी मेडिकल कॉलेजों का बुरा हाल
प्यासा राजस्थान! पाताल से पानी खत्म, क्या अगली पीढ़ी को मिलेगा सिर्फ सूखा
राजस्थान को कब मिलेंगे चार आईएएस, जानिए कहां अटका है प्रमोशन का यह मामला
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us