तीन गुना कीमत पर खरीदे गए मेडिकल उपकरण, जांच में सीएमएचओ को माना जिम्मेदार
Ashish Bhardwaj | Jan 09, 2026, 15:02 IST
Photograph: (The Sootr)
राजस्थान के जालोर में चिकित्सा विभाग में 50 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी और अन्य अधिकारियों पर आरोप हैं कि उन्होंने सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया।
Jalore: राजस्थान चिकित्सा विभाग में एक और घोटाला सामने आया हैं। इस बार नियमों को ताक पर रखकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। करीब 50 लाख रुपए का यह घोटाला जालोर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद में सामने आया है। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों और विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट ने इस भ्रष्टाचार की पोल खोली है।
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दस्तावेजों के अनुसार, सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी ने अजमेर की एक फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए बाजार दर से 200% से 300% अधिक कीमत पर उपकरण खरीदे। ये उपकरण प्रेग्नेंसी टेस्ट किट है, जिसकी बाजार कीमत 7 रुपए है। इसे 25 रुपए में खरीदा गया। वहीं, हीमोग्लोबिन मीटर की कीमत 10,000 रुपए है। लेकिन, इसका भुगतान 28,000 रुपए तक किया गया। ग्लूकोमीटर की बाजार कीमत 3,750 रुपए है। इसे भी तीन गुना भाव पर यानी 9,500 रुपए में खरीदे गए।
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इस घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात सप्लाई और मैन्युफैक्चरिंग डेट में हेराफेरी है। रिकॉर्ड में प्रेग्नेंसी किट की सप्लाई 31 मार्च 2025 दिखाई गई, जबकि किट्स पर मैन्युफैक्चरिंग डेट मई 2025 अंकित थी। इस मामले का पर्दाफाश होने के बाद रजिस्टर में कांट-छांट कर तारीख 10 मई 2025 कर दी गई, जबकि बिल मार्च में ही पास कर दिए गए थे।
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जोधपुर जोन के संयुक्त निदेशक कार्यालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष समिति ने अपनी रिपोर्ट में सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी सहित पांच अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। इनके साथ उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भजनाराम, भंडार पाल विनोद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक चरण सिंह, जिला लेखा प्रबंधक सुशील माथुर शामिल हैं।
समिति ने बताया कि फर्म द्वारा प्रस्तुत 'एनालिसिस रिपोर्ट' पूरी तरह से फर्जी थी, क्योंकि किट के निर्माण की तारीख से पहले उनका परीक्षण किया गया था, जो वैज्ञानिक दृष्टि से असंभव था।
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हालांकि, सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि सभी खरीद प्रक्रियाएं पारदर्शी रहीं और नियमों के तहत की गई हैं। उन्होंने किसी भी जांच रिपोर्ट की जानकारी होने से इनकार किया है।
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सप्लाई की तारीखों में हेराफेरी
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नियमों की खुली अवहेलना जांच रिपोर्ट (सितंबर 2025) के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। फर्म ने केवल सीमन विश्लेषण किट के लिए अनुमति ली थी, लेकिन टेंडर में मलेरिया, डेंगू और एचआईवी सहित 45 आइटम जोड़ दिए गए। ये आइटम पोर्टल पर सामान्य श्रेणी में उपलब्ध थे, जिनका अवैध रूप से अलग टेंडर निकाला गया। इसके अलावा, 3.41 लाख यूरिन स्ट्रिप की जगह केवल 2.27 लाख ही सप्लाई हुईं, जिससे 6.37 लाख रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ।
अधिकारियों की संलिप्तता
समिति ने बताया कि फर्म द्वारा प्रस्तुत 'एनालिसिस रिपोर्ट' पूरी तरह से फर्जी थी, क्योंकि किट के निर्माण की तारीख से पहले उनका परीक्षण किया गया था, जो वैज्ञानिक दृष्टि से असंभव था।
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सीएमएचओ की सफाई
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- यह घोटाला जालोर के चिकित्सा विभाग में 50 लाख रुपये के फर्जी उपकरण खरीदने से संबंधित है, जिसमें प्रेग्नेंसी टेस्ट किट, ग्लूकोमीटर और अन्य उपकरणों को अधिक कीमतों पर खरीदा गया।
- सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी पर आरोप हैं कि उन्होंने अजमेर की फर्म को तीन गुना कीमत पर खरीदे गए मेडिकल उपकरण लिए और सप्लाई डेट में हेराफेरी की।
- जांच समिति ने सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी समेत पांच अधिकारियों को नियमों की अवहेलना और वित्तीय अनियमितताओं का दोषी ठहराया है।
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