सरकार ने नरेश मीणा की जमानत पर क्यों दी सहमति, जानिए पूरा हाई प्रोफाइल मामला
The Sootr | Jul 22, 2025, 21:24 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में नरेश मीणा को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई, जिसके बाद बहस छिड़ गई है। सरकार ने पहले जमानत का विरोध किया था, फिर जमानत पर सहमति दे दी।
मुकेश शर्मा @ जयपुर
राजस्थान में हाई प्रोफाइल एसडीएम थप्पड़कांड और उसके बाद समरावता में हुए उपद्रव मामले में जेल में बंद चल रहे नरेश मीणा को हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर बहस छिड़ गई है। आपराधिक मामलों में सरकार की ओर से आरोपी को जमानत पर रिहा करने का विरोध किया जाता है।
शायद ही किसी मामले में राजस्थान सरकार की सहमति से आपराधिक मामले में आरोपी को जमानत मिलती हो, लेकिन सरकार ने हाई कोर्ट में नरेश मीणा को जमानत पर रिहा करने की सहमति दे दी। इस सहमति के आधार पर ही नरेश मीणा को जमानत मिल गई।
हाई कोर्ट के आदेश से स्पष्ट है कि नरेश मीणा की तीसरी जमानत याचिका का सरकारी अधिवक्ता नरेंद्र सिंह धाकड़ ने लंबे समय से जेल में होने और ट्रायल में समय लगने के आधार पर जमानत देने का समर्थन किया। रोचक बात यह है कि नरेश मीणा के अधिवक्ताओं की ओर से भी यही दलील दी गई थी।
यह मामला नवंबर, 2024 में देवली-उनियारा में हुए विधानसभा चुनाव के समय का है। तब से नरेश मीणा जेल में बंद चल रहे थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने एसडीएम को थप्पड़ मार दिया था। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। बाद में समरावता में गिरफ्तारी को लेकर उपद्रव हो गया। कांग्रेस के नेता रहे नरेश मीणा को आरोपी बनाया गया। वह उस समय निर्दलीय उम्मीदवार था।
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अधिवक्ता अजय कुमार जैन का कहना है कि अगर राज्य सरकार अन्य आपराधिक मामलों में भी ऐसा करे, तो इससे जेल खाली हो जाएं और आमजन में भी संदेश जाएगा कि सरकार सिर्फ राजनीतिक लोगों का ही पक्ष नहीं लेती है। नरेश मीणा के मामले में सरकार का रुख भेदभावपूर्ण और संविधान के विपरीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने पिछली दो जमानत याचिकाओं पर नरेश को जमानत देने का विरोध क्यों किया था!
अधिवक्ता विपुल शर्मा ने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को जान-माल की सुरक्षा की गारंटी देता है, इसलिए ही सरकार आपराधिक मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पैरवी करती है। ऐसे में यदि नरेश मीणा के मामले में राज्य सरकार के स्टैंड का सही माना जाए, तो फिर सरकार अन्य जमानतों के मामले में ऐसा क्यों नहीं करती! जबकि इसी मामले में सरकारी वकील ने 14 फरवरी और 30 मई को नरेश मीणा की जमानत याचिका का विरोध किया था।
देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान चर्चित एसडीएम थप्पड़ कांड और उसके बाद हुई हिंसा और आगजनी के मामलों में गिरफ्तार नरेश मीणा को करीब नौ महीने बाद जमानत पर रिहाई मिली है। नरेश मीणा को 14 नवंबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ मुकदमे मतदान के दिन एसडीएम को थप्पड़ मारने, हिंसा और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में दर्ज किए गए थे।
अब
जमानत पर रिहा होने के बाद नरेश मीणा सात दिन की जनक्रांति यात्रा पर राजस्थान दौरे पर हैं। उनका गांव-गांव में स्वागत हो रहा है। इस यात्रा में बड़ी संख्या में युवा उमड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, रोजाना उनके इंटरव्यू मीडिया और यूट्यूब चैनल पर चल रहे हैं। यह यात्रा 28 जुलाई तक चलेगी।
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राजस्थान में हाई प्रोफाइल एसडीएम थप्पड़कांड और उसके बाद समरावता में हुए उपद्रव मामले में जेल में बंद चल रहे नरेश मीणा को हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर बहस छिड़ गई है। आपराधिक मामलों में सरकार की ओर से आरोपी को जमानत पर रिहा करने का विरोध किया जाता है।
शायद ही किसी मामले में राजस्थान सरकार की सहमति से आपराधिक मामले में आरोपी को जमानत मिलती हो, लेकिन सरकार ने हाई कोर्ट में नरेश मीणा को जमानत पर रिहा करने की सहमति दे दी। इस सहमति के आधार पर ही नरेश मीणा को जमानत मिल गई।
यह आधार बनाकर की जमानत की पैरवी
नवंबर से बंद थे जेल में नरेश
पहले सरकार का विरोध क्यों नरेश मीणा की जमानत याचिका पर अदालत में सरकार के रुख को लेकर पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता विभूतिभूषण शर्मा ने सवाल उठाया है कि क्या ऐसी सुविधा सिर्फ राजनीति से जुड़े लोगों के लिए ही है। आज भी हजारों विचाराधीन कैदी बरसों से जेल में बंद हैं और उन्हें जमानत नहीं दी जा रही है या उनकी जमानत याचिकाओं पर महीनों तक सुनवाई नहीं हो रही है। इस मामले में नरेश मीणा 15 नवंबर से ही न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद था। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को नरेश मीणा की जमानत से कोई समस्या नहीं है, तो फिर पहले दो बार जमानत देने का विरोध क्यों किया था!
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ऐसा हो गया, तो खाली हो जाएंगी जेल
सजा दिलाने में होनी चाहिए सरकार की पैरवी
यह था नरेश मीणा का पूरा मामला
अब जनक्रांति यात्रा पर निकले
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