/sootr/media/media_files/2026/02/18/neemrana-japani-zone-2026-02-18-20-37-58.jpg)
Photograph: (the sootr)
News In Short
- आतंकियों के नए निशाने पर राजस्थान का नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र।
- उद्योगपतियों के साथ प्रशासनिक बैठक में हुआ खुलासा।
- पंजाब में पकड़े पाक हैंडलर से नीमराणा के श्रमिक से संपर्क।
- कंपनी को ठेके के मजदूरों के बारे में नहीं होती जानकारी।
- अब नीमराणा में हर कंपनी के मजदूरों का होगा सत्यापन।
News In Detail
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान में यह खुलासा हुआ है कि प्रदेश का बड़ा औद्योगिक क्षेत्र नीमराना आतंकियों के निशाने पर है। यहां जापानी जोन सहित कई अन्य औद्योगिक क्षेत्र हैं, जहां एक हजार से ज्यादा इकाइयां काम कर रही है। कोटपूतली-बहरोड़ जिले में बुधवार को औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुई बैठक में इसका खुलासा हुआ।
नीमराणा थाना अधिकारी राजेश मीणा ने यह सुरक्षा सुरक्षा इनपुट उद्यमियों की बैठक में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक देवेंद्र बिश्नोई के सामने साझा किया। इस खुलासे के बाद नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा बंदोबस्त किए जा रहे हैं।
पाकिस्तान हैंडलर का नीमराणा से कनेक्शन
थाना अधिकारी राजेश मीणा ने बैठक में जानकारी दी कि नीमराणा की एक कंपनी में कार्यरत एक मजदूर के पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में होने की सूचना जांच एजेंसियों को मिली थी। इस सूचना के बाद स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां सतर्क हो गईं। संदिग्ध व्यक्ति दिल्ली-जयपुर क्षेत्र के बाद नीमराणा को अपना ठिकाना बनाने की साजिश में शामिल था। हालांकि समय रहते कार्रवाई करते हुए इसी 10 फरवरी को उसे डील करते वक्त पहले पंजाब में पकड़ लिया गया।
पंजाब में बरामद हुए थे हथियार
थाना अधिकारी के अनुसार पंजाब पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए थे। जब इस सूचना के बाद कंपनी से संर्पक किया तो आरोपी के बारे में ना तो कंपनी को पता था और ना ठेकेदार को मालूम था। यह भी पता नहीं चला कि वह कहां का रहने वाला है। पूछताछ में यह बात जरूर बताई थी कि उसने नीमराना की फैक्ट्री में काम करता था।
संभावित ठिकाना के बारे में जानकारी
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि आतंकियों ंका उद्देश्य किसी औद्योगिक क्षेत्र को निशाना बनाना था। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि औद्योगिक हब होने के कारण नीमराणा को संभावित ठिकाने के रूप में चुना गया था। हालांकि फिलहाल किसी भी स्थानीय इकाई को प्रत्यक्ष नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन यह इनपुट बेहद गंभीर है।
बैठक में इस बात पर अफसोस व्यक्त किया गया कि कोई भी कंपनी ना तो ठेकेदार का वेरिफिकेशन करती है और ना ही मजदूरों का। अधिकतर मजदूर बाहर के होते हैं।
मजदूरों का कोई वेरिफिकेशन नहीं
थाना प्रभारी राजेश ने कहा कि सीधे कंपनी वाले ठेकेदार के माध्यम से मजदूर को रखते हैं। ना तो उन्हें ठेकेदार के बारे में पता होता है और ना ही लेबर के बारे में पुख्ता जानकारी होती है। उसका वेरिफिकेशन भी नहीं कराया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर इसकी सूचना हमें मिले तो हम उसका वेरिफिकेशन भी करके देंगे और उसका सारा रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराएंगे।
अब मजदूरो का सत्यापन अनिवार्य
जिला कलेक्टर ने बैठक में मौजूद सभी उद्योगपतियों को निर्देश दिए कि वे अपने प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से कराएं। साथ ही फैक्ट्रियों में प्रवेश और निकास के लिए मजबूत पहचान प्रणाली लागू करने, सीसीटीवी कैमरे दुरुस्त रखने और सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए। औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाने का भी आश्वासन पुलिस प्रशासन की ओर से दिया गया। बैठक में डीआईजी सह पुलिस अधीक्षक देवेंद्र बिश्नोई ने बताया कि श्रमिकों का सत्यापन आवश्यक है।
सुरक्षा इं​तजाम किए पुख्ता
बैठक में यह भी तय किया गया कि उद्योग इकाइयां किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देंगी। थाना अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने उद्योगपतियों से अपील की कि वे बाहरी श्रमिकों की जानकारी पूरी तरह से दर्ज करें और समय-समय पर सत्यापन कराते रहें।
ये भी पढे़:-
सरकार का संविदाकर्मियों के लिए बड़ा ऐलान, विधानसभा में की घोषणा
तीन सप्ताह में हटाएं अवैध कॉलोनी, अन्यथा हाउसिंग बोर्ड आयुक्त कोर्ट में हो हाजिर
गोलमा का छलका दर्द: ईश्वर ने कोख खाली रखी, पर राजस्थान के लाडलों ने कभी कमी महसूस नहीं होने दी
राजस्थान सरकारी विभाग में भर्ती, 20 फरवरी तक करें ऑनलाइन आवेदन
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us