BJP बोर्ड बनाने में आगे, कांग्रेस से वोट शेयर का अंतर सिर्फ 0.94%; दिल्ली गई रिपोर्ट
Mukesh Sharma | Sept 23, 2026, 19:15 IST
वोट शेयर ने बढ़ाई टेंशन
राजस्थान निकाय चुनावों में बोर्ड गठन में बढ़त के बावजूद भाजपा मामूली वोट शेयर, कांग्रेस की कड़ी टक्कर और बागियों के उभार से चिंतित है। दिग्गजों की नाकामी से मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहट तेज है।
समझें क्या है पूरा मामला
- कांग्रेस से महज 0.94% का अंतर सत्ताधारी दल के लिए बड़ी चेतावनी।
- 2,273 वार्डों में जीत और बागियों का दबदबा टिकट वितरण पर सवाल।
- 7 मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी विफल।
- निकाय नतीजों के बाद मंत्रिमंडल फेरबदल और रिपोर्ट कार्ड पर गाज की सुगबुगाहट।
वोट शेयर के कड़े मुकाबले, कांग्रेस के प्रदर्शन और निर्दलीयों के उभार ने सत्ताधारी दल के रणनीतिकारों को समीक्षा के लिए मजबूर कर दिया। पार्टी इस संबंध में एक रिपोर्ट जल्दी ही केंद्रीय नेतृत्व को भेजने वाली है। हालांकि पार्टी के कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि रिपोर्ट भेज दी गई है।
निकाय चुनाव जीतकर भी भाजपा टेंशन में?
भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले 0.94 फीसदी ही वोट ज्यादा मिले। भाजपा ने अब तक 309 में से 200 बोर्ड पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस महज 94 पर ही निपट गई। एक-एक बोर्ड पर आप और रालोपा ने कब्जा जमाया है।
भाजपा के सूत्रों का मानना है कि अगर कांग्रेस ने भाजपा के समान ही आक्रामक प्रचार किया होता तो यह अंतर ज्यादा भी हो सकता था। इसलिए वोटों का कम अंतर गंभीर चिंता का विषय है।
सीएम ने स्थानीय नहीं बल्कि राज्य के मुद्दों पर किया प्रचार
वोट शेयर और निर्दलीयों की बढ़त ने बढ़ाई चिंता
कांग्रेस पार्टी लगातार भाजपा को कड़ी टक्कर देने में सफल रही है। दोनों दलों के कुल वोट शेयर में एक फीसदी से भी कम का अंतर रहा है। इससे यह साफ है कि शहरी मतदाता पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में लामबंद नहीं हुए हैं।
तीसरी ताकत बने निर्दलीय
टिकट बंटवारे में मनमर्जी से नाराज पार्टी
भाजपा के सूत्र नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों को चौंकाने वाला नहीं मान रहे। उनका कहना है कि पहली बार राज्य में एक साथ निकाय चुनाव होने से ऐसा लग रहा है कि भाजपा के वोट कम हुए हैं। जबकि पिछले चुनावों में भी करीब-करीब ऐसे ही नतीजे रहे हैं। लेकिन, टिकट बंटवारे में विधायकों व मंत्रियों की हठधर्मिता से फर्क जरूर पड़ा है। लेकिन,पार्टी का कहना है कि अधिकांश निर्दलीय भाजपा के बागी ही हैं और पार्टी विचारधारा से जुड़े हुए हैं।
मंत्रियों पर गाज गिरने के आसार
इनमें अतिरिक्त डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा दूदू में, मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग जालौर में, सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक बड़ी सादड़ी में, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा प्रतापगढ़ में, ग्रामीण विकास मंत्री ओटाराम देवासी सिरोही में, महिला बाल विकास मंत्री मंजू बाघमार जायल में और राज्यमंत्री विजय सिंह चौधरी नांवा में बोर्ड व सभापति बनाने में नाकाम रहे।
हालांकि सीएम भजनलाल जयपुर के सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और यहां पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। वहीं पार्टी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पाली में निगम सहित जिले की सभी पालिकाओं में भाजपा जीती है। कृषि मंत्री डॉ.किरोड़ीलाल मीणा के क्षेत्र सवाईमाधोपुर में भाजपा ने बाजी मारी है।
जयपुर निगम के नतीजों पर टिकीं निगाहें
संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहट
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार भजनलाल सरकार के ढाई साल बाद भी अगर मंत्री अपने गृह क्षेत्रों में पार्टी को साफ जनादेश नहीं दिला पा रहे तो यह सीधे तौर पर जनता के बीच उनकी घटती साख का संकेत है। इस रिपोर्ट कार्ड का सीधा असर आगामी पंचायत चुनावों की रणनीति और मंत्रिमंडल फेरबदल में मंत्रियों की छुट्टी या विभाग बदलने के रूप में देखने को मिल सकता है।
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