राज्य ओबीसी आयोग ने CM को सौंपी 900 पेज की रिपोर्ट, 25 जातियां अधिक पिछड़ी
Jageshwar prasad | Aug 07, 2026, 11:14 IST
राजस्थान में 25 OBC जातियां आज भी राजनीतिक हाशिए पर, आयोग की रिपोर्ट में खुलासा
राजस्थान ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 90 ओबीसी जातियों में से 25 जातियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व नाममात्र का मिला है, जबकि 11 जातियों का ही दबदबा है। ट्रांसजेंडरों और अनाथ श्रेणी की स्थिति भी बेहद कमजोर है।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में 25 ओबीसी जातियां आज भी राजनीतिक हाशिए पर।
- राज्य ओबीसी आयोग ने CM को सौंपी 900 पेज की रिपोर्ट।
- 11 ओबीसी जातियों का दबदबा, ट्रांसजेंडरों की स्थिति भी कमजोर।
- पंचायत-निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए तैयार हुई रिपोर्ट।
- 14 अगस्त तक लॉटरी का लक्ष्य, उसके बाद चुनाव की तैयारी।
रिपोर्ट में ट्रांसजेंडरों और अनाथ श्रेणी की स्थिति भी बेहद कमजोर बताई गई है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय होगा।
कितनी जातियां हैं किस स्थिति में?
50 से भी कम प्रतिनिधित्व वाली जातियां तमोली, ठठेरा, भड़भूजा, कुंजड़ा, चोबदार, बागरिया, मुल्तानी, सिकलीगर, कोतवाल, पटवा, खेरवा, शोरगर, मोगिया, कागजी और फारूकी हैं।
10 से भी कम प्रतिनिधित्व वाली जातियां मदारी-बाजीगर, चूनगर, मोची, नट, भोपा, जागरी, हेला, न्यारिया, सिरकीवाल और सपेरा हैं। ट्रांसजेंडरों का प्रतिनिधित्व महज 3 है, जबकि अनाथ श्रेणी का खाता भी नहीं खुला है।
कई जातियां बहुत पिछड़ी
सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्देश दिया है कि ओबीसी की जातियों का हर 10 वर्ष में सर्वे होना चाहिए और जिन जातियों को पर्याप्त लाभ मिल चुका है, उन्हें ओबीसी से बाहर किया जाना चाहिए। आयोग ने अपनी रिपोर्ट 19 मापदंडों के आधार पर तैयार की है। सर्वे 74.85 लाख ओबीसी परिवारों पर किया गया है। रिपोर्ट दो भागों में 900 पन्नों की है।
राजस्थान में 25 OBC जातियां आज भी राजनीतिक हाशिए पर, आयोग की रिपोर्ट में खुलासा
क्या है ट्रिपल टेस्ट और क्यों है जरूरी?
आयोग अध्यक्ष मदनलाल भाटी ने कहा कि उन्होंने बंद कमरों में बैठकर रिपोर्ट नहीं बनाई, बल्कि जनता के बीच जाकर सर्वे किया। उन्होंने कहा कि ओबीसी आबादी करीब 20 प्रतिशत बढ़ी है और रिपोर्ट में नए सामाजिक-आर्थिक आंकड़े शामिल किए गए हैं।
निकाय-पंचायत चुनाव को कैसे प्रभावित करेगी रिपोर्ट?
रिपोर्ट में ओबीसी जनसंख्या के आधार पर 309 निकायों में 60 अध्यक्ष पद ओबीसी के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है । पंचायती राज संस्थाओं में भी जिला प्रमुख, सदस्य, प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और सरपंच पदों पर आरक्षण तय होगा।
सियासी हलचल और विरोध
वहीं, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन की दिशा में आगे बढ़ रही है । उनका कहना है कि एक साथ चुनाव से विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित होगा और समय व संसाधनों की बचत होगी।
नौकरियों में भी नाममात्र का प्रतिनिधित्व
FAQ
- राजस्थान में कितनी ओबीसी जातियां राजनीतिक रूप से हाशिए पर हैं?
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की 90 ओबीसी जातियों में से 25 जातियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व नाममात्र का मिला है । - ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट क्या है?
सुप्रीम कोर्ट का ट्रिपल टेस्ट तीन शर्तों वाला फार्मूला है - समर्पित आयोग का गठन, स्थानीय निकायवार अध्ययन, और 50% आरक्षण सीमा । इसके बिना स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण संवैधानिक रूप से मान्य नहीं है। - ओबीसी आयोग की रिपोर्ट निकाय-पंचायत चुनावों को कैसे प्रभावित करेगी?
उइस रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों और नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण तय होगा।
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