पंचायत चुनावों की देरी का दिख रहा असर, 1900 करोड़ की अटकी केंद्रीय मदद

Mukesh Sharma | Mar 25, 2026, 17:39 IST
Share
sarpanch
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में समय पर पंचायत चुनाव नहीं होने का असर दिखने लगा है। केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाली राशि रिलीज नहीं हो पा रही है। पंचायतें वित्तीय संकट से जूझने लगी हैं।

News In Short

  • समय पर पंचायत चुनाव नहीं होने से केंद्रीय सहायता अटकी।
  • प्रदेश की पंचायतों के सामने आने लगा है भुगतान का संकट।
  • वित्तीय संकट को देखते हुए सरकार ने केंद्र को लिखी चिट्ठी।
  • चुनावों में देरी का कारण ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलना।
  • कोर्ट ने पंचायत चुनावों के लिए 15 अप्रैल की डेडलाइन तय की है।

News In Detail

​Jaipur: राजस्थान में पंचायत चुनावों के समय पर नहीं होने का सीधा असर अब जमीन पर दिखने लगा है। 15वें केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाली लगभग 1900 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि केंद्र में अटक गई है। इससे पंचायतों में सफाई जैसे काम प्रभावित होने लगे हैं। वित्तीय संकट को देखते हुए सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर नियमों में शिथिलता देने का आग्रह किया है।

​चुनाव में देरी बनी रोड़ा

​सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बहाल रखते हुए पंचायत चुनाव कराने के लिए 15 अप्रैल तक की डेडलाइन तय कर रखी है। इस समय सीमा में अब मात्र 21 दिन बचे हैं। इन चुनावों को कराने को लेकर सरकार में असंमजस की स्थिति बनी हुई है।

चुनाव में देरी का असर पंचायती राज संस्थाओं के वित्तीय संसाधनों पर नजर आ रहा है। नियमों के तहत पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के लिए केंद्रीय अनुदान प्राप्त करने में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का होना अनिवार्य है। वर्तमान में प्रदेश की लगभग 10 हजार ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों के अभाव में सरकारी प्रशासक काम कर रहे हैं। इसी कारण वित्त आयोग ने फंड जारी करने पर रोक लगा दी है।

फंड की कमी से भुगतान का संकट

​प्रदेश में कुल 11,303 ग्राम पंचायतें हैं। फंड की कमी के कारण करीब 7800 पंचायतों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। पंचायतों को ​फंड नहीं मिलने से सबसे बड़ी समस्या सफाई कर्मचारियों के भुगतान को लेकर खड़ी हो गई है।

एक अधिकारी का कहना है कि ​ठेके पर काम कर रहे सफाईकर्मियों का तीन-तीन महीने का वेतन बकाया है। ​भुगतान में देरी के कारण ठेकेदारों ने काम की रफ्तार धीमी कर दी है या काम पूरी तरह बंद कर दिया है।

प्रत्येक ग्राम पंचायत में सफाई और अन्य रखरखाव कार्यों के लिए प्रति माह लगभग 2 लाख रुपये का खर्च आता है। ​हर पंचायत में औसतन 10 से 12 लोगों की मैनपावर तैनात है, जो अब बिना वेतन काम करने को मजबूर हैं।

इन योजनाओं पर पड़ेगा असर

अधिकारियों का कहना है कि केंद्र से 1900 करोड़ की राशि समय पर नहीं मिलती है तो प्रदेश की ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर गहरा संकट आ सकता है। मुख्य रूप से स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के कार्य, हर घर तक पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य, ग्रामीण रोजगार और विकास कार्य और गांवों में सड़कों, नालियों तथा सामुदायिक भवनों का निर्माण सीधा प्रभवित होगा।

​क्यों नहीं हो पा रहे हैं चुनाव

चुनावों में देरी का मुख्य कारण ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट का जारी न होना बताया जा रहा है। रिपोर्ट के बिना पंचायत और निकायों में अभी तक ओबीसी सीटों का निर्धारण नहीं हो सका है। यदि इस रिपोर्ट के बिना चुनाव कराए जाते हैं तो ओबीसी सीटों को सामान्य श्रेणी में माना जाएगा, जो एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। इसी तकनीकी पेंच के कारण चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

​चुनाव पर असमंजस और कोर्ट का दखल

प्रदेश में पंचायत चुनाव कब होंगे, इसे लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, न्यायपालिका ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर रखे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नई चुनी हुई सरकार कार्यभार नहीं संभालती, तब तक वित्तीय और प्रशासनिक गतिरोध बने रहने की आशंका है।

​पूर्व सरपंचों पर फूटा नाराजगी का ठीकरा

राजस्थान सरपंच संघ का कहना है कि गांवों में सफाई और विकास कार्य रुकने का सबसे ज्यादा गुस्सा पूर्व सरपंचों को झेलना पड़ रहा है। चूंकि, वर्तमान में प्रशासक के रूप में पूर्व सरपंच ही सारा काम देख रहे हैं। उन्हें सरकार की ओर से पर्याप्त सहयोग या बजट नहीं मिल रहा, इसलिए ग्रामीण अपनी समस्याओं के लिए पुराने प्रतिनिधियों को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

ये भी पढे़:-

पीएम नरेंद्र मोदी से मिले भजनलाल, दिल्ली में इस साल की यह पहली मुलाकात

मानगढ़ धाम को अभी राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं, केंद्र सरकार ने किया साफ इनकार

हनुमान बेनीवाल वो सियासी चेहरा, जिनके तरकश में विवादों के तीरों की कमी नहीं

पेपर लीक के मास्टरमांइड कटारा की बर्खास्तगी अटकी, पौने तीन साल बाद भी फैसला नहीं

Tags:
  • ओबीसी
  • सरकार
  • पंचायत चुनाव
  • पंचायती राज
  • न्यायपालिका
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा