राजस्थान पंचायत चुनाव की घोषणा कल, चार चरण में चुनाव की संभावना, चुने जाएंगे 1.69 लाख प्रतिनिधि
Jageshwar prasad | Oct 02, 2026, 17:09 IST
पंचायतीराज चुनावों की घोषणा साथ आचार संहिता लागू हो जाएगी
राजस्थान में पंचायत चुनावों की घोषणा 3 अक्टूबर को होने वाली है। ये चुनाव चार चरणों में आयोजित किए जा सकते हैं, जिसमें लगभग 1.69 लाख जनप्रतिनिधियों का चुनाव किया जाएगा। इस बार महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जो उनकी भागीदारी को बढ़ाएगा। सरपंच व वार्ड पंच चुनाव बैलेट पेपर से होंगे, जबकि अन्य पदों के लिए ईवीएम का प्रयोग होगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- कल होगी राजस्थान पंचायत चुनाव की बड़ी घोषणा
- चार चरणों में हो सकते हैं चुनाव, लगेगी आचार संहिता
- 1.69 लाख जनप्रतिनिधि चुनेगी ग्रामीण जनता
- 20 जिलों में महिलाएं बनेंगी जिला प्रमुख
- चार जिलों में सरपंच के सभी पद एसटी के लिए आरक्षित
किस तरीके से होगी वोटिंग
आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू हो जाएगी। यह आचार संहिता (Model Code of Conduct) करीब दो महीने तक लागू रह सकती है। इस दौरान सरकारी तबादलों पर भी पाबंदी लग जाएगी।
कितने पदों पर होंगे चुनाव
इन चुनावों में 1403 जिला परिषद सदस्य और 8245 पंचायत समिति सदस्य चुने जाएंगे। यह सदस्य मिलकर 41 जिला प्रमुख और 457 पंचायत समितियों में प्रधान का चुनाव करेंगे। इसके अलावा 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच, उपसरपंच और 1.30 लाख वार्ड पंचों के लिए भी चुनाव होंगे।
20 जिलों में होंगी महिला जिला प्रमुख
डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ ऐसे जिले हैं, जहां सिर्फ अनुसूचित जनजाति वर्ग से ही प्रधान बनेगा। जयपुर जिला परिषद में प्रमुख पद अनारक्षित ओपन श्रेणी में है, जबकि भरतपुर और दौसा में यह पद एससी महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
सरपंच और वार्ड पंचों का पूरा गणित
प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में से 7,200 पर महिला सरपंच बनेंगी। वहीं वार्ड पंचों के कुल 1,30,584 पदों में से करीब 65 हजार पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
सरपंच पदों में अनुसूचित जनजाति के लिए 3,058, अनुसूचित जाति के लिए 2,493 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1,961 पद आरक्षित हैं। वार्ड पंचों के 1.30 लाख पदों में से 21,962 वार्ड अनुसूचित जाति, 19,117 वार्ड अनुसूचित जनजाति और करीब 15 हजार वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में सरपंच के सभी 1,253 पद अनुसूचित जनजाति के लिए पूरी तरह आरक्षित हैं।
आरक्षण श्रेणियों का मतलब समझें
इस चुनाव में 50 फीसदी महिला आरक्षण (Women Reservation) है। अनारक्षित ओपन सीटों पर सामान्य वर्ग के अलावा किसी भी वर्ग का प्रत्याशी, चाहे वह महिला हो या पुरुष, चुनाव लड़ सकता है। अनारक्षित महिला सीटों पर सामान्य वर्ग के अलावा किसी भी वर्ग की महिलाएं प्रत्याशी बन सकती हैं।
ओबीसी ओपन सीटों पर अन्य पिछड़ा वर्ग से पुरुष या महिला कोई भी प्रत्याशी बन सकता है, जबकि ओबीसी महिला सीटें सिर्फ इसी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं। इसी तरह एससी ओपन और एससी महिला, तथा एसटी ओपन और एसटी महिला सीटों पर भी क्रमशः उस वर्ग के पुरुष-महिला या सिर्फ महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं।
सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पंचायतीराज चुनाव सरकार और विपक्ष दोनों का गांवों में सियासी असर बनाएगा और बिगाड़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि सत्तारूढ़ भाजपा के सामने कांग्रेस से ज्यादा वार्ड जीतने की चुनौती रहेगी, क्योंकि गांवों में आमतौर पर कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत माना जाता रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार भाजपा ने इस बार विधानसभा चुनावों की तर्ज पर माइक्रो मैनेजमेंट आधारित रणनीति बनाई है, जिसकी असली परीक्षा पंचायतीराज चुनावों में होगी।
वार्डों की जीत से बनेगा असली रुझान
निकाय चुनावों की तरह पंचायतीराज चुनावों में भी दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होता। इसी वजह से प्रधान और जिला प्रमुख चुनने में राजनीतिक जोड़-तोड़ की संभावना बनी रहती है। जिस पार्टी के जितने ज्यादा जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य जीतेंगे, उसी से जनमत का रुझान तय माना जाएगा।
सीकर में ASI ने पंचायती राज चुनाव लड़ने के लिए छोड़ी पुलिस की नौकरी, 13 साल सर्विस थी बाकी
By Ashish Bhardwaj
छत्तीसगढ़ में CAT की स्थायी बेंच बनाने की मांग, हाईकोर्ट ने केंद्र से 3 सप्ताह में मांगा जवाब
By Harrison Masih
पहले मंत्री विजयवर्गीय की बैठक में नहीं गईं विधायक मालिनी गौड़, फिर उनकी ही विधानसभा में उठाया पानी की किल्लत का मुद्दा
By Sanjay Gupta
Rajasthan School Exam: अब 25 नवंबर से 7 दिसंबर तक होंगी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं, CBA भी इसी अवधि में
By Jageshwar prasad
नर्सिंग ऑफिसर की हत्या कर मगरमच्छों वाली नदी में फेंका शव, लिव-इन पार्टनर ने रची साजिश, फिर दर्ज कराई गुमशुदगी
By Manya Jain
MP में गहराया बिजली का संकट: 17 हजार मेगावाट पार डिमांड, किसानों के सामने आई सिंचाई की परेशानी
By Manya Jain
मंत्री झाबर सिंह खर्रा की भाभी का टिकट भाजपा से कटा, बेटे ने पहले ही भर दिया था निर्दलीय पर्चा
By Ashish Bhardwaj