राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव एक साथ क्यों नहीं? सरकार का आया जवाब
Saurabh Mishra | Aug 18, 2026, 11:08 IST
राजस्थान पंचायत निकाय चुनाव
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव अलग-अलग होंगे। सरकार ने विकास कार्यों की निरंतरता का हवाला दिया। पंचायती राज लॉटरी टलने पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका की चेतावनी दी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ नहीं होंगे।
- सरकार ने पंचायती राज चुनाव की लॉटरी सितंबर 2026 तक टाल दी है।
- नगर निकाय चुनाव की तारीखें जल्द घोषित हो सकती हैं।
- पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अवमानना याचिका की चेतावनी दी है।
- पूर्व आयुक्त ने भी पंचायत-निकाय चुनाव एकसाथ नहीं कराने पर सवाल उठाए।
इससे साफ हो गया है कि 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' के बजाय राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव अलग-अलग वक्त पर होंगे। राज्य निर्वाचन आयोग जल्द ही 309 नगरीय निकायों के चुनावों की घोषणा कर सकता है। एक दिन पहले ही सभी 309 निकायों के वार्डों की आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हुई है।
क्यों नहीं पंचायत-निकाय चुनाव एक साथ हुए?
सरकार के मुताबिक, अगर राजस्थान पंचायत-निकाय चुनावएक साथ घोषित किए जाते, तो पूरे प्रदेश में आचार संहिता एक साथ लागू हो जाती। सरकार का कहना है कि इससे गांवों और शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास कार्य, नई योजनाओं की मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं ठप हो जातीं।
राजस्थान सरकार के मुताबिक प्रशासनिक तंत्र पर दो बड़े चुनावों का दबाव कम करने और आम जनता के रोजमर्रा के काम प्रभावित होने से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया।
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी
लोढ़ा का आरोप है कि पंचायती राज विभाग का यह कदम राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों की सीधी अवमानना है। उन्होंने बताया कि वे सरकार को कानूनी नोटिस भेज रहे हैं और इसके बाद हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेंगे।
पूर्व चुनाव आयुक्त ने उठाया विरोधाभास का सवाल
उन्होंने कहा कि अगर नगर निकाय चुनाव नतीजे पहले आ जाते हैं, तो इसका मनोवैज्ञानिक असर बाद में होने वाले पंचायत चुनाव के मतदाताओं पर पड़ सकता। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद मतदाताओं को प्रभावित करने वाला कोई नया काम करने की अनुमति नहीं होती।
309 नगर निकाय के वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी
वार्डों का आरक्षण तय होने से कई पुराने दावेदार अपनी सामान्य सीट आरक्षित होने के कारण चुनावी दौड़ से बाहर हो गए हैं। आरक्षित घोषित वार्डों में संबंधित वर्गों और महिला उम्मीदवारों की सक्रियता अचानक बढ़ गई है।
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FAQ
- राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव अलग-अलग क्यों हो रहे?
सरकार के मुताबिक, एक साथ चुनाव होने पर आचार संहिता एक साथ लागू हो जाती, जिससे विकास कार्य रुक जाते। इसलिए दोनों चुनाव अलग-अलग समय पर कराने का फैसला लिया गया है। - पूर्व कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा ने क्या आरोप लगाया है?
उन्होंने पंचायती राज लॉटरी टलने को हाईकोर्ट आदेशों की अवमानना बताया। उनके मुताबिक सरकार को 15 अगस्त से पहले यह प्रक्रिया पूरी करनी थी। वे कानूनी नोटिस भेजकर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेंगे। - राजस्थान के नगरीय निकायों की वार्ड लॉटरी कब पूरी हुई?
यह लॉटरी सोमवार को पूरी हुई, जिसमें 309 निकायों के 10245 वार्ड शामिल थे। इससे पहले 13 अगस्त 2026 को महापौर और सभापति पदों का आरक्षण तय हुआ था। सभी निकाय चुनाव 15 नवंबर 2026 से पहले कराए जाने हैं।
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