राजस्थान में छह माह से अटका सरेंडर लीव का भुगतान, अब सात लाख सरकारी कर्मचारियों पर दिवाली बोनस का संकट
Jageshwar prasad | Oct 08, 2026, 12:00 IST
राजस्थान में 7 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों का सरेंडर लीव का भुगतान अटका
राजस्थान में सात लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों के सरेंडर लीव का भुगतान बकाया है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अप्रैल से भुगतान में देरी ने त्योहारों के दौर में स्थिति को और गंभीर बना दिया है। पंचायत चुनाव नजदीक आने से कर्मचारी संगठन सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं ।
राजस्थान के सात लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों को सरेंडर लीव भुगतान (Surrender Leave Payment) का इंतजार लंबा हो गया है। अप्रैल से भुगतान अटका है। अब त्योहारी सीजन में दिवाली बोनस पर संकट (Diwali Bonus Crisis) की आशंका है।
असल में निकाय चुनाव से ठीक पहले कुछ कर्मचारियों को भुगतान किया गया था। इससे कर्मचारियों के बीच भुगतान शुरू होने का संदेश गया। लेकिन फिर भुगतान रुक गया। अब पंचायत चुनाव (Pnachayat Election) से पहले सरकार पर वैसा ही दबाव आने वाला है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर लंबित भुगतान जल्द जारी करने का दबाव बढ़ा दिया है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष महावीर शर्मा का कहना है कि पहली बार इतने लंबे समय तक भुगतान रोका गया है। इससे कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश है। इससे कर्मचारियों को करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है।
एकीकृत कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ के मुताबिक लंबित सरेंडर लीव के भुगतान की मांग मुख्य सचिव से की गई है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जीपीएफ, स्टेट इंश्योरेंस, ग्रेच्युटी और पीएल के भुगतान में देरी का मुद्दा भी ज्ञापन में उठाया गया है।
कर्मचारी संगठनों की नजर अब पंचायत चुनाव पर है। निकाय चुनाव से पहले कुछ कर्मचारियों को सरेंडर लीव का भुगतान हुआ था। इसके बाद उम्मीद बनी थी कि बाकी कर्मचारियों को भी जल्द भुगतान मिल जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
बड़ी संख्या में भुगतान लंबित रहने से मामला फिर कर्मचारी संगठनों के एजेंडे में आ गया है। संगठनों का कहना है कि जब अप्रैल से सरेंडर लीव का भुगतान अटका है तो कर्मचारियों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ सकती है। अब देखना जरूरी है कि सरकार कब तक भुगतान जारी करती है।
सरेंडर लीव का मतलब है कि कर्मचारी अपनी अर्जित अवकाश की छुट्टियां न लेकर उनके बदले भुगतान लेता है। यानी वह छुट्टी लेने के बजाय काम करता है और बदले में पैसे लेता है। यह व्यवस्था सरकारी कर्मचारियों के लिए है।
यह भुगतान कर्मचारियों की आय का अहम हिस्सा होता है। खासकर त्योहारों के समय यह राशि उनके काम आती है। भुगतान में देरी होने से उनकी त्योहार की तैयारियां प्रभावित होती हैं। इसलिए यह मुद्दा संवेदनशील है।
राज्य में 7 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी हैं। इनका भुगतान अटकना बड़ा मुद्दा है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। त्योहारी सीजन में यह नाराजगी और गहरी हो सकती है।
पंचायत चुनाव से पहले यह मुद्दा और गर्मा सकता है। कर्मचारी संगठन सरकार पर दबाव बना रहे हैं। अगर समय रहते भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन की स्थिति बन सकती है। अब सरकार क्या कदम उठाती है, यह देखना जरूरी है।
असल में निकाय चुनाव से ठीक पहले कुछ कर्मचारियों को भुगतान किया गया था। इससे कर्मचारियों के बीच भुगतान शुरू होने का संदेश गया। लेकिन फिर भुगतान रुक गया। अब पंचायत चुनाव (Pnachayat Election) से पहले सरकार पर वैसा ही दबाव आने वाला है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर लंबित भुगतान जल्द जारी करने का दबाव बढ़ा दिया है।
कर्मचारी संगठनों का रुख
एकीकृत कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ के मुताबिक लंबित सरेंडर लीव के भुगतान की मांग मुख्य सचिव से की गई है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जीपीएफ, स्टेट इंश्योरेंस, ग्रेच्युटी और पीएल के भुगतान में देरी का मुद्दा भी ज्ञापन में उठाया गया है।
चुनाव से पहले फिर गर्माया मुद्दा
बड़ी संख्या में भुगतान लंबित रहने से मामला फिर कर्मचारी संगठनों के एजेंडे में आ गया है। संगठनों का कहना है कि जब अप्रैल से सरेंडर लीव का भुगतान अटका है तो कर्मचारियों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ सकती है। अब देखना जरूरी है कि सरकार कब तक भुगतान जारी करती है।
क्या है सरेंडर लीव?
यह भुगतान कर्मचारियों की आय का अहम हिस्सा होता है। खासकर त्योहारों के समय यह राशि उनके काम आती है। भुगतान में देरी होने से उनकी त्योहार की तैयारियां प्रभावित होती हैं। इसलिए यह मुद्दा संवेदनशील है।
7 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी
पंचायत चुनाव से पहले यह मुद्दा और गर्मा सकता है। कर्मचारी संगठन सरकार पर दबाव बना रहे हैं। अगर समय रहते भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन की स्थिति बन सकती है। अब सरकार क्या कदम उठाती है, यह देखना जरूरी है।
- सरेंडर लीव भुगतान क्या है?
सरेंडर लीव भुगतान एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कर्मचारी अपनी अर्जित अवकाश की छुट्टियां न लेकर उनके बदले पैसे लेता है। यह भुगतान सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण होता है। - राजस्थान में सरेंडर लीव भुगतान क्यों अटका हुआ है?
राजस्थान में सरेंडर लीव भुगतान अप्रैल से अटका हुआ है, जिससे कर्मचारियों के बीच नाराजगी बढ़ रही है। निकाय चुनावों से पहले कुछ कर्मचारियों को भुगतान किया गया था, लेकिन फिर यह रुक गया। - सरेंडर लीव भुगतान की देरी का क्या असर है?
सरेंडर लीव भुगतान की देरी से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, खासकर त्योहारी सीजन में जब उन्हें इस राशि की आवश्यकता होती है। इससे सरकार के प्रति कर्मचारी संगठन का रोष भी बढ़ सकता है।
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