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Photograph: (the sootr)
News In Short
- स्कूल व्याख्याता भर्ती 2024 का फाइनल रिजल्ट डेढ़ साल बाद भी नहीं आया।
- 2022 पदों के लिए जून-जुलाई 2025 में हुई थी भर्ती परीक्षा।
- दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन का कार्य भी पूरा।
- आरपीएससी की फाइनल सिलेक्टर लिस्ट का अभी तक अता-पता नहीं।
- नई व्याख्याता भर्ती परीक्षा सिर पर, लेकिन आरपीएससी नहीं सुन रहा दर्द।
News In Detail
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में है। मामला है स्कूल व्याख्याता (स्कूल लेक्चरर) भर्ती-2024 का, जिसके अंतिम परिणाम का इंतजार करते-करते अभ्यर्थियों की आंखों की चमक अब निराशा में बदलने लगी है। विडंबना देखिए कि जिस भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुए डेढ़ साल बीत चुका है, उसका अंतिम परिणाम फाइलों में कैद है। अगली भर्ती की परीक्षा तिथि मई 2026 सिर पर है।
​कछुआ चाल से चलती भर्ती प्रक्रिया
2202 पदों के लिए इस महत्वपूर्ण भर्ती की परीक्षा 23 जून से 4 जुलाई 2025 के बीच हुई थी। परीक्षा हुए 8 महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन नतीजा सिफर है। आयोग ने 20 अगस्त 2025 को अंग्रेजी और हिंदी विषयों का प्रोविजनल रिजल्ट जारी कर उम्मीद जगाई थी। लेकिन, अन्य विषयों के परिणाम आने में ही 5 महीने लग गए। दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 तक डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन का कार्य भी पूरा हो चुका है, फिर भी फाइनल सिलेक्शन लिस्ट का अता-पता नहीं है।
​पिछली भर्ती अधूरी, अगली की तैयारी कैसे करें
​सबसे बड़ा संकट उन अभ्यर्थियों के सामने है, जो चयन की सीमा रेखा पर खड़े हैं। RPSC स्कूल व्याख्याता भर्ती 2025 की परीक्षा मई 2026 में प्रस्तावित है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि पिछली भर्ती का अंतिम परिणाम जारी हो जाता, तो चयनित अभ्यर्थी दौड़ से बाहर हो जाते और असफल रहे छात्र नए सिरे से तैयारी में जुट पाते।
​अभ्यर्थियों का कहना है कि हम मानसिक तनाव और भारी असमंजस में हैं। समझ नहीं आ रहा कि पुरानी भर्ती में सिलेक्शन का इंतजार करें या नई परीक्षा की तैयारी करें। आरपीएससी की इस देरी ने हमारी पूरी रणनीति बिगाड़ दी है।
​पटवारी और ग्राम सेवक भर्ती से भी पीछे
​बेरोजगारों में नाराजगी का बड़ा कारण यह भी है कि इस भर्ती के बाद हुई पटवारी और ग्राम सेवक जैसी बड़ी भर्तियों के फाइनल रिजल्ट जारी हो चुके हैं। वहां नियुक्तियों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ गई है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब आरएसएसबी तेजी दिखा सकते हैं, तो आरपीएससी स्कूल लेक्चरर जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए इतनी देरी क्यों?
​प्रमुख बिंदु: सुस्ती के सवाल
सिस्टम की मार और 'ओवरएज' होने का डर ​हजारों अभ्यर्थी ऐसे हैं जो इस परिणाम के इंतजार में अपनी उम्र की सीमा पार कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आए युवाओं के लिए जयपुर जैसे शहरों में रहकर कोचिंग का खर्च उठाना अब दूभर हो गया है। अभिभावकों का दबाव और समाज के ताने उनकी मानसिक स्थिति को और बिगाड़ रहे हैं।
​क्या जागेगा प्रशासन
​शिक्षा विभाग में व्याख्याताओं के हजारों पद खाली पड़े हैं, जिससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। एक तरफ सरकार 'युवा शक्ति' की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ आयोग की कछुआ चाल युवाओं के भविष्य को अधर में लटका रही है। अब मांग उठ रही है कि मई 2026 की परीक्षा से पहले पिछली भर्ती के अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए ताकि नई भर्ती में प्रतिस्पर्धा का सही आकलन हो सके।
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