सरिस्का में सीटीएच फेरबदल: जनसुनवाई में खनन माफिया की एंट्री, प्रक्रिया पर उठे सवाल

Purshottam Kumar Joshi | Jan 12, 2026, 15:26 IST
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Photograph: (the sootr)

राजस्थान के सरिस्का में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) फेरबदल के प्रस्ताव पर खूब आपत्तियां आ रही हैं। एक पक्ष यह भी है कि इसकी जनसुनवाई में खनन माफिया भागीदारी कर सीटीएच की प्रक्रिया का समर्थन कर रहे हैं। इससे प्रक्रिया फिर सवालों में आ गई है।

Jaipur. राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिचर्स में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) की जन सुनवाई में बड़ा खेल हो रहा है। यह जन सुनवाई सीटीएच को युक्तिसंगत बनाने के लिए दोबारा से सीमाकंन को लेकर बनाए प्रस्ताव पर हो रही है। इस जन सुनवाई में खनन माफिया के लोग भाग ले रहे हैं, जो 4075 हैक्टयर एरिया को सीटीएच से बाहर करने का समर्थन कर रहे हैं। खनन माफिया की सक्रिय भागीदारी से सीटीएच को युक्तिसंगत बनाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा हो गया है।

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इसलिए सीटीएच बदलाव की प्रक्रिया हो रही दोबारा

सरकारी सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरिस्का में सीटीएच को युक्तिसंगत बनाने के लिए सीमांकन की प्रक्रिया दोबारा से शुरू की गई है। इस प्रक्रिया में सीटीएच के बदलाव पर आ​पत्ति मांगी जा रही है। इसके लिए प्रभावित गांवों में जन सुनवाई का काम चल रहा है। इससे पहले की सीटीएच बदलाव प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया था।

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सीटीएच बदलाव का यह है प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार सरिस्का प्रशासन ने सीटीएच को युक्तिसंगत बनाने के लिए कुछ एरिया को हटाकर उसमें नए क्षेत्र जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत सरिस्का की टहला रेंज में यह कह कर 4075 हैक्टयर क्षेत्र को सीटीएच से बाहर करने का प्रस्ताव है कि वहां टाइगर का मूवमेंट नहीं है। इस एरिया की एवज में नारायणपुर और अकबरपुर रेंज के आसपास नए क्षेत्रों का जोड़ने का प्रस्ताव है, जहां टाइगर का मूवमेंट है, लेकिन आबादी क्षेत्र कम है।

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वन्यजीवों प्रेमियों की आपत्ति सीटीएच को लेकर सरिस्का प्रशासन के प्रस्ताव पर वन्यजीव प्रेमी आपत्ति जता रहे हैं। उनका कहना है कि खनन माफिया के इशारे पर सीटीएच के उस क्षेत्र को बाहर किया जा रहा है। ये दावे पूरी तरह गलत है कि यहां बाघों का मूवमेंट नहीं है। वन्यजीवों का आरोप है कि इस एरिया में 50 से अधिक बंद खदानें हैं, जिन्हें सीटीएच में बदलाव के नाम पर खोलने का एजेंडा है। जन सुनवाई में खनन माफिया के पक्ष को रिकॉर्ड में लेना योजनाबद्ध साजिश है, जिससे यह बताया जा सके कि प्रस्ताव का समर्थन ही किया जा रहा है।
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नए एरिया जोड़ने पर ग्रामीणों का विरोध

पिछले सप्ताह प्रस्ताव पर आपत्ति लेने के लिए थानागाजी क्षेत्र की 9 ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं हुई। इनमें दो हजार से अधिक लोग शामिल हुए। इन्होंने अपने गांव को सीटीएच में जोड़ने का विरोध करते हुए कहा कि इससे उनके गांवों का विकास अवरुद्ध हो जाएगा। किशोरी, अजबगढ़, सीलीबावड़ी और पिपलाई के ग्रामीणों का विरोध था कि सीटीएच में जाने से उनके आर्थिक, व्यावसायिक और काम- धंधेय प्रभावित हो जाएंगे। उन्होंने सीटीएच के खसरा नंबर भी सार्वजनिक करने की मांग की। इसी तरह अकबरपुर और मालाखेड़ा क्षेत्र के ग्रामीणों ने भी सीटीएच में नए गांव शामिल किए जाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

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सरिस्का सीटीएच सीमा से छेड़छाड़

अरावली पर्वतमाला को बचाने में जुटी सेव अरावली ट्रस्ट का कहना है कि अगर सरकार सीटीएच का एरिया बढ़ा रही है तो बढ़ाए। लेकिन, कुछ खनन माफियाओ को फायदा पहुंचाने के लिए 4075 हैक्टेयर एरिया को बाहर क्यो किया जा रहा है। इस एरिया में स्पष्ट रूप से बाघों का विचरण देखा गया है। सरिस्का के सीटीएच एरिया में फेरबदल को लेकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और राजस्थान के मंत्री संजय शर्मा की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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खनन माफिया को फायदा पहंचाने का आरोप

सरिस्का में सीटीएच के बदलाव को लेकर पिछले तीन महीने से विवाद बना हुआ है। पर्यावरणविदों के साथ ही विपक्षी दल कांग्रेस का आरोप है कि खनन माफिया के दबाव में सीटीएच में फेरबदल की साजिश चल रही है। उनका आरोप है कि दोनों मंत्री 50 से अधिक बंद पड़ी खदानों को अभयदान देने के लिए यह बदलाव कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सरकार को भी फटकार लगा चुका है।

मुख्य बिंदू:

  • CTH फेरबदल का प्रस्ताव है कि 4075 हेक्टेयर क्षेत्र को सरिस्का टाइगर रिजर्व से बाहर किया जाए और नए क्षेत्रों को जोड़ा जाए, जिनमें टाइगर का मूवमेंट है।
  • खनन माफिया इस फेरबदल के प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं, उनका आरोप है कि CTH से बाहर किया जा रहा क्षेत्र खनन के लिए उपयुक्त है, जबकि वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यहां बाघों का विचरण होता है।
  • पर्यावरणविदों का आरोप है कि यह फेरबदल खनन माफिया के दबाव में किया जा रहा है और यह सरिस्का में खनन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक साजिश है।
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  • केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव
  • सरिस्का टाइगर रिजर्व
  • मंत्री संजय शर्मा
  • सेव अरावली ट्रस्ट
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